इसलिए अंबिलिकल कॉर्ड की सुरक्षा है जरूरी

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Apr 04, 2016
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Quick Bites

  • नाभिरज्जु को सुरक्षित कर, बीमारियों को दूर भगाएं।
  • नाभिरज्जु को सुरक्षित कर, शिशु को दे स्वस्थ जीवन।
  • स्टेम सेल्स से होती है 80 से ज्यादा बीमारियां ठीक।
  • इससे डिसआर्डर, एनीमिया आदि से करता है बचाव।

क्या आप जानते हैं कि स्टेम सेल के जरिये 80 से भी ज्यादा बीमारियों को सफलतापूर्वक ठीक किया जा सकता है? इसमें कैंसर से लेकर ब्लड डिसआर्डर, एनीमिया आदि शामिल हैं। जी, हां! अकेले स्टेम सेल में इतनी ताकत होती है कि यदि इसे सुरक्षित कर लिया जाए तो आपके शिशु को आप एक स्वस्थ जीवन की उपहार दे सकते हैं। लेकिन याद रखें कि स्टेमल सेल को सुरक्षित करने का मौका जीवन में सिर्फ और सिर्फ एक ही बार आता है। स्टेम सेल को सुरक्षित करने के और भी फायदे हैं। आइये इन पर गौर करें।

 

80 ज्यादा बीमारियां ठीक करता है

वर्तमान समय में कोर्ड ब्लड स्टेम सेल्स का इस्तेमाल 80 से भी ज्यादा बीमारियां ठीक करने हेतु किया जा रहा है। स्टेल सेल प्रत्यारोपण हेतु डाक्टर बोर्न मैरो का नहीं वरन कोर्ड ब्लड का इस्तेमाल करने को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसके अलावा कोर्ड ब्लड स्टेम सेल का उपयोग स्पाइनल इंजुरी, अल्झाइमर, हृदयाघात, डायबिटीज, हृदय सम्बंधी बीमारियों के लिए भी हो रहा है।

ब्लड सेल

मौका सिर्फ एक बार मिलता है

यदि आप अपने शिशु के प्रति सजग हैं और चाहते हैं कि उसके जीवन के सुखद एवं स्वस्थ बनाएं तो इसके पैदा होते हुए नाभिरज्जु सुरक्षित रखें। यकीन मानें इसमें अकेले इतनी ताकत होती है कि ये आपके शिशु को ताउम्र किसी भी किस्म की शारीरिक समस्याओं से दूर रख सकता है। स्टेम सेल का बेहतरीन स्रोत अम्बलिकल कोर्ड ब्लड स्टेम सेल्स है। यह प्रत्येक व्यक्ति में अलग और खास किस्म का होता है। इसे इसलिए भी खास कहा जा सकता है क्योंकि यह अपने आप नया हो सकता है। इसकी मदद से बच्चे में हो रही बीमारी को संभवतः खुद ब खुद ठीक किया जा सकता है।

 

शिुश को नुकसान नहीं पहुंचाती

कुछ लोगों को लग सकता है कि नाभिरज्जु को दान करने से या इसके सुरक्षित करने से इसका शिशु पर बुरा असर पड़ता है। लेकिन ऐसा नहीं है। असल में इसे सुरक्षित करने से न तो शिशु पर इसका कुप्रभाव पड़ता है और न ही मां पर। इसका इस्तेमाल रेड ब्लड सेल्स, व्हाईट ब्लड सेल्स और प्लेटेलेट्स को उत्पन्न करने के लिए किया जा सकता है।

 

कौन कौन से इलाज संभव है

ल्यूकेमिया, लिम्फोमा, एनीमिया, थेलेसीमिया, एक्यूट लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया, एक्यूट मीलोजीनियस ल्यूकेमिया, क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया, प्यूर रेड सेल एप्लेसिया, प्लाजमा सेल डिसआर्डर आदि।

 

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