कैसे कुछ लोग बहुत ज्यादा खाने के बावजूद नहीं होते मोटे

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jun 25, 2015
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Quick Bites

  • थर्मोजेनेसिस के कारण ज्यादा खाकर भी मोटे नहीं होते हैं लोग।
  • यह फैट को जला कर ऊर्जा प्राप्त करने की सामान्य प्रक्रिया है।
  • कैलोरी और प्रोटीन की मात्रा पर निर्भर करता है 'थर्मोजेनेसिस'।
  • हाई फैट डाइट के साथ अधिक मात्रा में नमक से भी नहीं बढ़ता वज़न।

ज्यादा खाओगे तो मोटे हो जाओगे, यह एक ऐसा बात है जिसे सुनने के बाद बहुत से लोग अपनी प्लेट से आधा खाना दूसरे की प्लेट में डाल देते हैं या फिर भले ही उन्हें कितनी ही भूख क्यों ना लगी हो वो यही कहते नज़र आते हैं कि मैं बिल्कुल नहीं खा सकता। और हो भी क्यों न वे मोटे जो हो जाते हैं। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जो दबा कर सब कुछ खाते हैं, और फिर भी मोटे नहीं होते! लेकिन भला क्यों? चलिये आज जानने का कोशिश करते हैं कि भला कैसे कैसे कुछ लोग बहुत सारे खाने के बावजूद नहीं होते मोटे?

 

Not Gaining Weight in Hindi

 

थर्मोजेनेसिस के कारण होते है ऐसा  

ऐसा थर्मोजेनेसिस के कारण होता है। थर्मोजेनेसिस (NEAT) आहार से प्रेरित फैट को जला कर ऊर्जा प्राप्त करने की सामान्य शारीरिक प्रक्रिया है। भोजन करने के बाद ऊर्जा की खपत में वृद्धि अंतिम भोजन के बाद कई घंटे तक रहती है। दरअसल दैनिक ऊर्जा की खपत के तीन घटक होते हैं, आहार से प्रेरित थर्मोजिनेसिस, बेसल मेटाबॉलिक रेट और दैनिक गतिविधियों से प्रेरित ऊर्जा की खपत। हालांकि आहार से प्रेरित थर्मोजिनेसिस कुल दैनिक ऊर्जा की खपत का सबसे छोटा घटक है पर यह मोटापे को नियंत्रित करने के लिए महत्वपूर्ण है। वे लोग जो अधिक कैलोरी का सेवन करते हैं उनमें शरीर के मोटापे को नियंत्रित करने के लिए थर्मोजिनेसिस का नियमन महत्वपूर्ण होता है। तो वे लोग जो अधिक खाने के बाद भी मोटे नहीं होते, संभवतः उनका प्राकृतिक रूप से थर्मोजेनेसिस अधिक सक्रिय होता है।

 

 

Not Gaining Weight in Hindi

 

 

सामान्यतः वयस्क कामकाजी पुरूषों को न्यूनतम 2500 कैलोरीज़ व वयस्क महिलाओं को 2000 कैलोरीज़ की जरूरत होती है। आराम से व अपेक्षाकृत निष्क्रिय जीवन बताने वाले लोगों में यह उनकी कुल कैलोरी की दैनिक आवश्यकता का 60-80 प्रतिशत के बराबर होता है। हमें अपनी दैनिक गतिविधियों के लिए भी कुछ कैलोरीज़ की जरूरत पड़ती है। अगर हमारी दैनिक भोजन से कैलोरीज़ की आपूर्ति इन सब (आहार प्रेरित थमोजिनेसिस, रेस्टिंग मेटाबॉलिक रेट और रोज़मर्रा के कार्यों के लिए आवश्यक कैलोरी) आवश्यकताओं से अधिक है तो ये अधिक मात्रा में ली गई कैलोरीज़ का फैट के रूप में शरीर में जमा हो जाती है। जिन लोगों में थर्मोजेनेसिस अधिक सक्रीय होता है, उनका मोटापा अधिक खा लेने पर भी नहीं बढ़ता है।



वहीं जर्नल ऑफ साइंटिफिक रिपोर्ट्स में छपे एक ताज़ा अध्ययन के अनुसार जब चूहों को हाई फैट डाइट में अधिक मात्रा में नमक (सोडियम की अधिक मात्रा) दी गई तो, विशेषज्ञों का परिकल्पना की सटीक विपरीत उसका वजन कम बढ़ा।



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