इन तीन कारणों वर्तमान में सामान्‍य हो गई है थायराइड समस्‍या

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jan 25, 2016
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Quick Bites

  • गले में मौजूद थायराइड ग्रंथि थायराक्सिन हार्मोन का निर्माण करती है।
  • इसे साइलेंट किलर भी कहा जाता है क्‍योंकि इसके लक्षण दिखाई नहीं पड़ते।
  • वर्तमान में ज्‍यादातर लोग तनाव और अवसाद का शिकार हो रहे हैं।
  • केमिकलयुक्‍त प्रदूषण और हार्मोन में बदलाव के कारण भी बढ़ रही समस्‍या।

थायरायड ग्रंथि तितली के आकार की ग्रंथि है जो मेटाबॉलिज्‍म को नियंत्रित करती है। यह ग्रंथि गले के अंदर होती है और पिट्यूट्री ग्रंथि जो मस्तिष्क में स्थित होती है, इसके द्वारा नियमित की जाती है। यह ग्रंथि दो हार्मोन टी- 3, ट्राईआयोडोथायरोनिन और टी-4, थायरोक्सिन का उत्‍पादन करती है। इन हार्मोन्‍स के अनियमित होने से कई समस्‍यायें होने लगती हैं। थायराइड दो तरह का होता है - ओवरएक्टिव या अण्डरएक्टिव थायराइड। अमेरिका के कोलम्बिया मेडिकल सेंटर की मानें तो हर साल करीब 20 लाख लोग इस बीमारी से प्रभावित होते हैं। पुरुषों की तुलना में 35 साल की महिलाओं में इस बीमारी के होने की संभावना 30 प्रतिशत अधिक होती है। इस लेख में विस्‍तार से जानते हैं वर्तमान में यह बीमारी सामान्‍य क्‍यों हो गई है।

तनाव के कारण

वर्तमान में अगर युवा पीढ़ी किसी समस्‍या से सबसे अधिक ग्रस्‍त है तो वह है तनाव। कुछ अलग करने और नया मुकाम पाने की चाहत के कारण युवा घंटों काम करते हैं, इसके कारण तनाव उनका सबसे अच्‍छा साथी हो जाता है। तनाव का असर थायराइड ग्रंथि पर पड़ता है। शोधों में भी ये बात साबित हो चुका है कि तनाव थायरॉयड ग्रंथि से निकलने वाले थायरॉक्सिन हार्मोन के स्राव को नियंत्रि‍त करने की महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में अधिक तनाव होने पर इस हार्मोंस पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। तनाव के कारण हार्मोंस का स्तर तेजी से बढ़ने लगता हैं। तनाव के कारण पुरुषों में प्राइमरी हाइपोथायराइडिज्म की समस्या होने लगती हैं। इससे रोगों से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है और हार्मोनल ग्रंथि काम करना बंद कर देती है।

प्रदूषण के कारण

पदूषण का असर हमारे स्‍वास्‍थ्‍य पर पड़ता है और इसके कारण श्‍वांस संबंधी कई बीमारियां होने लगती हैं। प्रदूषण वर्तमान की खतरनाक समस्‍याओं में से एक हो गया है। भारत में इसकी हालत और अधिक खराब है, क्‍योंकि दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर दिल्‍ली ही है। प्रदूषण के कारण हवा में मौजूद पार्टिकुलेट मैटर थायराइड ग्रंथि को भी नुकसान पहुंचाते हैं। अमेरिकन थायराइड एसोसिएशन ने इसपर शोध भी किया। इस शोध में यह साबित हुआ कि कल-कारखानों से निकलने वाला प्रदूषण शरीर के इंडोक्राइन सिस्‍टम को क्षतिग्रस्‍त कर देता है और इसका सीधार असर हार्मोन पर पड़ता है, इसी से थायराइड ग्रंथि प्रभावित होती है।

हार्मोन असंतुलन के कारण

थायराइड की समस्‍या हार्मोन के अंसुतलन के कारण होती है। क्‍योंकि थायराइड ग्रंथि का प्रमुख काम हार्मोन का निर्माण करना होता है। शरीर के अधिवृक्क ब्लड शुगर को नियंत्रित करने वाले हार्मोन बनाते हैं। तनाव और अनियमित जीवनशैली इसको प्रभावित करती है। इससे थायराइड ग्रंथि प्रभावित होती है जिसका नतीजा हाइपरथाइरोडिज्म होता है। इसके लिए जिम्‍मेदार कारण हैं - पोषण की कमी, व्यायाम न करना, गलत डायट, अनियमित दिनचर्या, आदि। महिलाओं और पुरुषों में हार्मोन असंतुलन के अलग-अलग प्रभाव होते हैं। एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरोन और..
और प्रोलैक्टिन हार्मोन पुरुषों के शरीर में भी उत्पादित होते हैं। इन सभी हार्मोन में टेस्टोस्टेरोन पुरुषों के शरीर में मौजूद सबसे महत्वपूर्ण हार्मोन में से एक है।


इसके अलावा आयोडीन की कमी, सेलेनियम की कमी, फ्लोराइड युक्‍त पानी, और आजकल के आहार में बहुतायत में प्रयोग होने वाले सोया उत्‍पाद के कारण थायराइड की समस्‍या होती है।

 

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