जानें क्‍यों मसूड़ों के लिए नुकसानदेह है धूम्रपान

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jan 01, 2013
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Quick Bites

  • ध्रुमपान से मसूड़ों को भी पहुंचता है नुकसान।
  • इससे मुंह के कैंसर होने का खतरा रहता है। 
  • इसमें गले का कैंसर या टोंसिल्स का कैंसर शामिल है।
  • तम्बाकु चबाने वालों को भी इसका खतरा है।

क्या आपको  पता है की जब भी आप सिगरेट  पीने के लिए माचिस की तीली या लाइटर  जलाते हैं तो यह आपके मसूड़ों को कितना नुकसान पहुंचाता है?  सिगरेट या सिगार पीना मसूड़ों, मुँह, गले एवं दाँतों के लिए बहुत हीं खतरनाक है एवं इससे कैंसर होने का पूरा खतरा रहता है।  लेकिन अगर आप शराब भी  पीते हैं  और सिगरेट  भी तो आपको मुँह या गले का कैंसर (मौखिक कैंसर) होने की  पूरी संभावना है। 


मौखिक कैंसर के अंतर्गत होंठों का (खासकर निचले होंठ  का ) कैंसर, गाल के अंदरूनी भाग का कैंसर,  गले के भीतर का कैंसर या टोंसिल्स का कैंसर शामिल हैं। स्त्रियों के मुकाबले पुरुषों में  मुख का कैंसर ज्यादातर पाया जाता है।  मुख के कैंसर का निदान बड़े मुश्किल से होता है।  ज्यादातर लोग मुख के कैंसर के बारे में जागरूक नहीं रहते न हीं शुरूआती  समय में उन्हें इसके लक्षण का  पता चलता है और जब तक उन्हें कुछ  पाता चलता है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।  अगर इसके प्रारंभिक अवस्था में इसके निदान के बारे में कुछ नहीं किया गया तो फिर सर्जरी या विकिरण चिकित्सा या रसायन चिकित्सा की जरूरत पड़ सकती है।

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धुंआ बिलकुल नहीं फिर भी खतरा खूब

क्या आपको  पता है की तम्बाकू  के प्रयोग से मुख का कैंसर होता है? सिगरेट या सिगार पीने से मौखिक कैंसर का खतरा तो होता हीं है, तम्बाकू  खाने या चबाने से भी मुँह का खतरा बहुत हीं रहता है।

तम्बाकू   चबाने (खाने) वाले अगर यह समझते हैं की वे धुआं  नहीं खीचते  हैं इसलिए उनको सिगरेट पीने वालों जितना खतरा नहीं है तो वे गलत सोचते हैं। तम्बाकू   में धुआं भले नहीं होता है लेकिन इससे मुँह के कैंसर का खतरा औरों से ५० गुना ज्यादा होता है। इसलिए सिगरेट या सिगार पीना या तम्बाकू  खाना या किसी तरह का तम्बाकू   सूंघना  छोड़िये  ताकि आप कैंसर जैसी   खतरनाक  बीमारी से बच सकें। अगर किसी व्यक्ति को कई सालों से तम्बाकू   चबाने की लत है और वह इस आदत को छोड़ देता है तो कुछ सालों में उसे कैंसर होने का खतरा काफी घट जाता है। शराब और तम्बाकू   दोनों के हीं प्रयोग से कैंसर हो सकता है।

 

मौखिक कैंसर: संकेत एवं लक्षण

 

ज्यादातर  लोग या तो मुख कैंसर के संकेतों को समझ नहीं पाते या फिर वे सब कुछ समझते हुए भी कैंसर के लक्षणों की उपेक्षा करते हैं। इसलिए ऐसे कैंसर तब पकड़ में आते हैं जब वे उग्र रूप धारण कर चुके होते हैं। भले हीं आपको कैंसर के लक्षणों की जानकारी हो फिर भी कई बार आप इसे प्रारंभिक अवस्था में पकड़ नहीं पाते। इसलिए अगर आप तम्बाकू   चबाते हैं तो आपकी भलाई इसी में है की अपने दन्त चिकित्सक या डॉक्टर से नियमित रूप से मिलते रहें और अपने मुख एवं दांतों की जांच करवाते रहें।

 

आपके डॉक्टर कैंसर के प्रारंभिक लक्षणों को पकड़ सकते हैं।

 

यदि आप निम्नलिखित किसी भी लक्षण को देखें तो तुरंत  अपने  दंत चिकित्सक से परामर्श लें

  • मसूड़ों, होंठ या गाल पर कोई घाव या पैच या गांठ दिखे जो ठीक होने का नाम हीं न ले रहा हो या जीभ से खून बहता हो
  • मुँह में सनसनी या सुन्नता हो
  • भोजन निगलने में या चबाने पर दर्द या कठिनाई होती हो
  • आपके गले में किसी  गाँठ के होने कि अनुभूति  हो लेकिन उसके कारण का कुछ  पता न चल पा रहा हो
  • जबड़ों में किसी तरह का सूजन हो जिसकी वजह से देन्चर्स ठीक से फिट नहीं हो पा रहे हों
  • आपकी आवाज बदल गई हो या स्वर बैठ गया हो


तीन ऐसे कारण जिनकी  वजह से आप डेंटिस्ट से अवश्य  मिलें

अगर आपको यह बताया गया है कि आपको मौखिक कैंसर है तो इलाज शुरू होने के दो सप्ताह पहले अपने दांतों का पूरी तरह चेक अप  करवा लें।

  • आप अपने डेंटिस्ट को अपनी समस्या के बारे में बताएं तथा अपने उस डॉक्टर का फोन नम्बर दे दें जिसके पास आपके मुख के कैंसर का इलाज चल रहा है ताकि दोनों डॉक्टर एक दूसरे से फोन पर आपकी समस्या और प्रोग्रेस पर बात करके आपका उचित इलाज कर सकें।
  • कई मरीज, जिनके कैंसर का उपचार चल रहा होता है, वे इस बात से अनजान रहते हैं कि कैंसर के इलाज का उनके दांतों, मसूड़ों, लार ग्रन्थियों पर क्या कुप्रभाव पड़ेगा।

 

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