मां बनने में आ रही हो समस्‍या, ये आठ जांच करेंगी समाधान

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jul 25, 2014
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Quick Bites

  • भारत में करीब दो करोड़ जोड़ों में यह समस्‍या।
  • बांझपन के एक तिहाई मामले महिलाओं में।
  • रक्‍त जांच से भी इस बारे में चलता है पता।
  • हार्मोनल जांच से भी समस्‍या का पता लगाया जाता है।

यदि नि‍यमित असुरक्षित संभोग के बाद भी कोई महिला मां न बन पा रही हो, तो उसे प्रजनन क्षमता के अभाव और आम बोलचाल की भाषा में बांझपन कहा जाता है। जीवनशैली से जुड़ी समस्‍याओं के कारण यह समस्‍या आजकल काफी आम हो गयी है। एक अनुमान के अनुसार दुनिया में छह से आठ करोड़ जोड़े इस समस्‍या से परेशान हैं और इनमें से 1.5 करोड़ से 2 करोड़ जोड़े भारत में हैं।

हमारे देश में यह समस्‍या और भी गंभीर इसलिए है क्‍योंकि यहां पर इस संदर्भ में चिकित्‍सीय सलाह लेने से बचते हैं। इस विषय पर हमारे देश में अब भी खुली चर्चा का अभाव है। चिकित्‍सीय सलाह नहीं लेने के कारण यह समस्‍या जोड़ों के आपसी संबंध और मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य को प्रभावित करती है।

 

woman infertility in hindi

एक अन्‍य अनुमान के अनुसार बांझपन के एक तिहाई मामले ही महिलाओं की प्रजनन क्षमता में कमी होने के कारण होते हैं। कई जोड़ों में नपुसंकता या बांझपन के लिए एक से अधिक कारण उत्‍तरदायी होते हैं इसलिए इनका पता लगाने के लिए उन्‍हें कई जांच करवानी पड़ती हैं। अगर आपको गर्भधारण करने में परेशानी हो रही हो, तो आपको गायनाकॉलोजिस्‍ट से मिलना चाहिये।

महिला को बांझपन की कब जांच करवानी चाहिये

बांझपन की शिकायत करवाने से पहले, महिला को जागरुक होना चाहिये। उसे स्‍वत: यह पता लगाने का प्रयास करना चाहिये कि आखिर गर्भ धारण करने सबसे अच्‍छा समय कौन सा है। कई लोग गर्भधारण करने के सबसे अच्‍छे दिनों के बारे में अनजान होते हैं। महिलायें ऑव्‍युलेशन और उससे एक-दो दिन पहले मां बनने के लिए सबसे अधिक तैयार होती हैं। मां बनने की इच्‍छुक महिलाओं को अपने मासिक चक्र और ऑव्‍युलेशन के दिनों में बारे सही जानकारी होनी चाहिये। इससे उनके डॉक्‍टर को भी यह फैसला लेने में आसानी होगी कि महिला को जांच करवाने की जरूरत है अथवा नहीं।

महिलाओं में बांझपन का इलाज करने से पहले कुछ जांच की जानी जरूरी हैं। इनके नतीजे यह पता लगाने में मदद करते हैं कि आखिर आप मां क्‍यों नहीं बन पा रहीं।

कम्‍प्‍लीट ब्‍लड काउंट (CBC)

सीबीसी की जांच से रक्‍त में लाल रक्‍त कोशिकाओं, श्‍वेत रक्‍त कोशिकाओं और प्‍लेट्लेट्स की संख्‍या का पता चलता है। इससे कई समस्‍याओं जैसे संक्रमण, अनीमिया और रक्‍त संबंधी अन्‍य विकारों का निदान करने में मदद मिलती है। सीबीसी के आधार पर यह तय करने में मदद मिलती है कि आप कुदरती तरीके से मां नहीं बन सकतीं और ऐसे में आपको इन-विट्रो फर्टलाइजेशन यानी आईवीएफ की मदद लेनी चाहिये। ऐसा इसलिए होता है कि क्‍योंकि आईवीएफ प्रक्रिया में अंडाणुओं को पुन: प्राप्‍त करने के लिए सर्जरी की जरूरत पड़ती है और ऐसे में डॉक्‍टर के लिए यह जानना जरूरी है कि कहीं आप अनीमिया से पीडि़त तो नहीं हैं।

ईएसआर (Erythrocyte sedimentation rate)

यह उस दर को कहते हैं जिस पर आपकी लाल रक्‍त कोशिकायें स्थिर हो जाती हैं। यदि शरीर में सूजन हो तो यह दर बढ़ जाती है। तो यह टेस्‍ट तब किया जाता है, जब सूजन या जलन होने की आशंका होती है। इस जांच में एचएसजी (hysterosalpinogogram) करवाने से पहले ईएसआर करवाना जरूरी होता है।

रक्‍त शर्करा

फास्टिंग और पीपी की मात्रा भी मां बनने की आपकी संभावनाओं को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए, रक्‍त शर्करा और इनसुलिन का स्‍तर मां बनने में आ रही बाधाओं का कारण हो सकता है।

Infertility test in hindi

वीडीआरएल (सिफलिस टेस्टिंग)

सिफलिस मां बनने की क्षमता को तो असर नहीं पहुंचाता, लेकिन यदि इसका इलाज न किया जाए तो यह मां और शिशु दोनों को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए इस जांच को जरूर करवाना चाहिये।

रूबेला एलजीजी (Rubella IgG)

इस जांच से यह पता चलता है कि कहीं आप रूबेला वायरस से पीडि़त तो नहीं। यह महिलाओं में मां न बन पाने की समस्‍या को दूर करने के लिए जरूरी नहीं हैं, लेकिन गर्भ धारण करने से पहले हर महिला को इस वायरस से सुरक्ष‍ित रहने का प्रयास करना चाहिये। यदि कोई महिला गर्भधारण के पहले तीन महीनों में इस वायरस से पीडि़त हो जाए, तो भ्रूण को खतरा हो सकता है।


विटामिन बी12 और डी3 टेस्‍ट

विटामिन बी12 अथवा फोलेट स्‍तर अनीमिया के स्‍तर की जांच के लिए जरूरी होता है, वहीं डी3 विटामिन का संबंध महिला के मां बनने की क्षमता अथवा बांझपन से होता है।

थायराइड की जांच

फ्री टी3, फ्री टी4, टीएसएच (thyroid stimulating hormone) थायराइड हॉर्मोन होते हैं। यदि इन हॉर्मोन का स्‍तर सही न हो तो महिला ओवर‍एक्टिव अथवा अंडरएक्टिव थायराइड की शिकार हो सकती है। थायराइड का ऑव्‍युलेशन और गर्भावस्‍था पर गहरा असर पड़ता है।

 

test in hindi

हॉर्मोनल टेस्‍टिंग
महिलाओं में हॉर्मोन असंतुलन भी गर्भावस्‍था को बाधित कर सकता है। हॉर्मोन्‍स का असंतुलन ऑव्‍युलेशन और अन्‍य कई कारकों को प्रभावित कर सकता है। जानते हैं कौन-कौन से हॉर्मोंस का क्‍या असर हो सकता है।

प्रोलेक्टिन
प्रोलेक्टिन महिलाओं में प्रजनन क्षमता बनाये रखने में बहुत जरूरी होता है। इसमें महिलाओं में प्रजनन क्षमता बढ़ाने वाले हॉर्मांस फॉलिक्‍ल स्टिम्‍यूलेटिंग हॉर्मोन (एफएसएच) और गोनाडोट्रोपिन-रिलिजिंग हॉर्मोन (gonadotropin-releasing hormone) GnRH) समाहित होते हैं। ये हॉर्मोन अंडाणुओं में ऑव्‍युलेशन की प्रक्रिया को शुरू करने और उन्‍हें बढ़ाने में उत्‍तरदायी होते हैं। अगर आपका प्रोटेक्टिन स्‍तर अधिक है तो इससे ऑव्‍युलेशन की प्रक्रिया बाधित होती है, जो बांझपन का कारण बन सकती है।

एएमएच (Anti Mullerian Hormone)
यह हॉर्मोन ओवेरियन में निर्मित होता है। इसलिए इन हॉर्मोंस का स्‍तर ओवेरीज में अंडाणुओं के प्रवाह को प्रभावित करता है। इसका कम स्‍तर बांझपन का कारण हो सकता है।

इनके अलावा एफएसएच, एचएसजी, एलएच और ई2 जैसी हॉर्मोन जांच भी महिलाओं में प्रजनन क्षमता के स्‍तर की जांच करने में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाती है।

 

 

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