जानें क्‍यों ऑक्‍सीजन की कमी से होती है हाइपोजेमिया

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jan 19, 2016
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Quick Bites

  • जीने के साथ शारीरिक श्रम के लिए जरूरी है ऑक्सीजन।
  • शरीर में ऑक्सीजन की कमी से होता है हाइपोजेमिया।
  • 95-100% तक होता है शरीर में ऑक्सीजन का स्तर।
  • ऑक्सीजन की कमी से त्वचा नीली पड़ जाती है।

 

जीने के साथ ही शरीर के विभिन्न अंगों जैसे, मस्तिष्क, लिवर और किडनी समेत सभी अंगों को काम करने के लिए ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है। ऐसे में जब शरीर में गंभीर रुप से ऑक्सीजन की कमी हो जाती है तो उसे हाइपोजेमिया या हाइपोक्सिया कहते हैं। इंसान का शरीर सुचारु रूप से तभी काम कर पाता है जब उसके सभी भागों में ऑक्सीजन की पूर्ति आवश्यकतानुसार होती है। ऑक्सीजन की वजह से ही शरीर उचित तरीके से काम करता है। ऑक्सीजन की ये पूर्ति पूरे शरीर में खून के जरिये होती है। लेकिन कई बार शारीरिक कमी और कुछ बीमारियों के कारण शरीर के लिए जरूरी ऑक्सीजन का स्तर जरूरत से ज्यादा नीचे आ जाता है। इस स्थिति को हाइपोजेमिया या हाइपोक्सिया कहते हैं। इस स्थिति में कई बार सांस लेने में तकलीफ होने लगती है। इसके बारे में इस लेख में विस्‍तार से पढ़ते हैं।

हाइपोजेमिया

क्‍या होना चाहिए ऑक्सीजन का स्तर

सामान्य तौर पर शरीर में ऑक्सीजन का स्तर 95 से 100 प्रतिशत तक होता है। जब शरीर में ऑक्सीजन का स्तर 90% से नीचे जाता है तो उसे ऑक्सीजन की कमी माना जाता है। अस्थमा जैसी बीमारी में ऑक्सीजन की कमी होने के खतरे ज्यादा होते हैं। ऐसे में ऑक्सीजन के स्तर को बनाए रखने के लिए जरूरी है कि अस्थमा जैसी बीमारी को नियंत्रण में रखा जाए।

इस बीमारी से बचने के लिए समय-समय पर शरीर में ऑक्सीजन के स्तर की जांच करते रहें। ब्लड टेस्ट के जरिये ऑक्सीजन के स्तर की जांच की जा सकती है। इसके लिए किसी भी आर्टरी से रक्त का नमूना लेकर जांच हो सकती है। इसके अलावा ऑक्सीमीटर के जरिये भी शरीर में ऑक्सीजन के स्‍तर का पता लगाया जा सकता है। इस तकनीक में एक छोटी सी क्लिप को ऊंगली पर लगाकर खून में ऑक्सीजन की मात्रा को छोटी सी स्क्रीन पर रखकर देखते हैं।


हाइपोजेमिया के कारण

हाइपोजेमिया कभी भी भेदभाव नहीं करता। ये किसी को भी हो सकता है। लेकिन बीमारीग्रस्त इंसान को होने की संभावना अधिक होती है। जिन लोगों को फेफड़ों के रोग जैसे अस्थमा, निमोनिया आदि बीमारियां होती हैं, उनको इस बीमारी का खतरा होता है। इस बीमारी का सबसे बड़ा कारण शरीर में आयरन की कमी होती है।


क्‍या हैं इसके लक्षण

  • त्वचा का नीला पड़ना।
  • सीने में दर्द होना।
  • सांस लेने में तकलीफ होना।
  • बिना शारीरिक मेहनत के पसीना आना।
  • त्वचा की नमी खोना।

 

इससे बचने के तरीके

कुछ सावधानी बरतकर इस बीमारी से बचाव किया जा सकता है। कई सारी गंभीर बीमारियों से मेडिकल ट्रीटमेंट के जरिये ही इलाज हो सकता है लेकिन अपनी तरफ से सावधानी बरत कर हम इस बीमारी से बच सकते हैं। इस बीमरी से बचने के लिए ये तरीके अपनाएं।

  • कमरा बंद ना रखें, सबुह के समय खिड़कियां जरूर खोलें।
  • अपने घर में पेड़-पौधे जरूर लगायें जिससे हरियाली बनी रहे।
  • पानी पर्याप्त मात्रा में पीयें, रोज 8 से 10 गिलास पानी पीयें।
  • रोजाना पांच से दस मिनट एक्सरसाइज जरूर करें।
  • आयरन से भरपूर भोजन करें।


अगर आपको किसी तरह की समस्‍या हो तो चिकित्‍सक से तुरंत सलाह लें।

 

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