हम एक-दूसरे को किस क्यों करते हैं? इसका जवाब यहां है...

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Mar 31, 2017
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Quick Bites

  • हम एक-दूसरे को किस क्यों करते हैं...???
  • 'किस' के दौरान 8 करोड़ बैक्टीरिया मूंह में जाते हैं।
  • हिंदुओं में 3500 साल पुरानी है ये संस्कृति।
  • मिस्र में आलिंगन करना था महत्वुपूर्ण।

हम एक-दूसरे को किस क्यों करते हैं...???


जब हम एक-दूसरे को 'किस' करते हैं तो एक 'किस' करने के दौरान लगभग 8 करोड़ बैक्टीरिया एक-दूसरे के मूंह में जाते हैं। लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है कि इसमें से सारे बैक्टीरियां नुकसान ही पहुंचाते हों। लेकिन किस करने के दौरान और किस ना करने के दौरान भी अधिकतर लोगों के मन में ये ख्याल जरूर आया होगा की हमलोग 'किस' क्यों करते हैं।


तो सवाल फिर से वही है कि हम 'किस' क्यों करते हैं?


ये सवाल हर किसी के जेहन में एक बार जरूर आया होगा। लेकिन जवाब नदारद रहा होगा। ऐसे में अधिकतर लोग इस सवाल को बेतुका मान पीछे छोड़ आगे बढ़ गए होंगे तो कुछ इसका जवाब पता लगाने के लिए आगे बढ़े होंगे। आखिरकार इस सवाल का जवाब मिल ही गया।


8 करोड़ बैक्टीरिया के एक-दूसरे के मुंह में जाने के बावजूद हर कोई 'किस' करने के लिए उतारू रहता है और शायद ही कोई अपने जीवन का पहला 'किस' भूलता है। और इसमें कोई दो राय भी नहीं कि पति-पत्नी, लव-बर्ड्स और प्यार करने वालों के बीच (चाहे वो किसी भी जाती के हों) 'किस' की अहम भूमिका है।

पश्चिमी सभ्यता में 'किस' का चलन

लेकिन ये 'किस' का चलन आया कहां से है? अगर देखा जाए तो ये 'किस' का चलन पश्चिमी दुनिया से आया है। पश्चिमी समाज में एक दूसरे को 'किस' करने का चलन कुछ ज़्यादा है। पश्चिमी दुनिया में तो 'किस' करने को एक सामान्य आदत माना जाता है जबकि हमारे यहां एक निजी पल है।

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हर जगह ये चलन नहीं

लेकिन इस स्टडी के मुताबिक 'किस' का चलन दुनिया की सभी संस्कृतियों में नहीं है। दुनिया के आधे से भी कम देशों में ही 'किस' का प्रचलन है। औऱ इसके अलावा 'किस' का चलन जानवरों की दुनिया में भी दुर्लभ ही है। जानवर शायद ही एक-दूसरे को 'किस' करते हैं।

 

'किस' करने का चलन

ऐसे में सवाल उठना लाज़िमी है कि 'किस' करने के व्यवहार का चलन क्यों और क्या है? अगर यह करना दापत्य जीवन के लिए इतना ही उपयोगी है तो फिर ये जानवरों की दुनिया में क्यों नहीं होता है? या फिर सभी देशों के लोग ऐसा क्यों नहीं करते?

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जबकि हकीकत यही है कि अधिकतर जानवर 'किस' नहीं करते हैं और ना ही सारे इंसान।इस नए अध्ययन में दुनिया की 168 संस्कृतियों का अध्ययन किया गया है, जिसमें केवल 46 प्रतिशत संस्कृतियों में लोग रोमांटिक पलों में अपने साथी को 'किस' करते हैं। पहले ऐसा माना जाता था कि लगभग 90 प्रतिशत संस्कृतियों में लोग रोमांस के पलों में अपने साथी को 'किस' करते हैं। लेकिन अध्ययन के अनुसार ऐसा नहीं है।

 

'लिप किस' पर किया गया अध्ययन

हम आपको पहले भी बता चुके हैं और फिर से बता रहे हैं कि इस अध्ययन में केवल 'लिप किस' का अध्ययन किया गया है। इन अध्ययकर्ताओं को कई आदिम समुदाय के लोगों में 'लिप किस' करने के कोई सबूत नहीं मिले हैं। ब्राज़ील के मेहिनाकू जनजातीय समुदाय में इसे अशिष्टता माना जाता है।
ऐसे समुदाय आधुनिक मानव के सबसे नज़दीकी पूर्वज माने जाते हैं, इस लिहाज़ से देखें तो हमारे पूर्वजों में भी 'किस' करने का चलन शायद नहीं रहा होगा।
इस अध्ययन दल के प्रमुख और लॉस वेगास यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर विलियम जानकोवायक के मुताबिक यह सभी मानवों के स्वभाव में नहीं है।

 

हिंदुओं में 3500 साल पुरानी है ये संस्कृति

इस अध्ययन में शामिल एक शोधकर्ता प्रोफ़ेसर विलियम जानकोवायक के अनुसार 'किस' करना पश्चिम सभ्यता की देन है जो एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में जाती रही, जबकि ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड के प्रोफ़ेसर राफ़ेल वलोडारस्की कहते हैं कि 'किस' करना हाल-फिलहाल का चलन है। जबकि हिंदु संस्कृति में 'किस' की क्रिया का सबसे पुराना उदाहरण हिंदुओं की वैदिक संस्कृति में मिलता है जो करीब 3500 साल पुराना है। ऐसे में ये भी कह सकते हैं कि 'किस' करने का अंदाज शायद हिंदुस्तान से पूरी दुनिया में गया हो। 

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मिस्र में आलिंगन करना था महत्वुपूर्ण

मिस्र की पुरानी संस्कृति में लोग 'किस' करने के बजाय आलिंगन कर एक-दूसरे के करीब आते थे और अपना प्यार जताते थे। ऐसे में सवाल पैदा होता है कि 'किस' करना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है या आधुनिक इंसानों ने इसकी खोज की है। मानव के बुजुर्ग चिम्पांजी को माना जाता है। जॉर्जिया, अटलांटा स्थित एमरी यूनिवर्सिटी के जीव विज्ञानी फ्रांस डि वॉल के अनुसार चिम्पांजी एक दूसरे से लड़ने-झगड़ने के बाद एक दूसरे को 'किस' करते हैं या एक दूसरे को 'हग' करते हैं। लेकिन चिम्पांजियों में किया गया ये 'किस' रोमांस का हिस्सा नहीं होता था।


वहीं चिम्पांजियों की एक प्रजाति बोनोवो में चिम्पाजी कई मौकों पर एक-दूसरे को 'किस' करते हैं और 'किस' करते वक़्त जीभ का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन उनमें भी 'किसिंग' की प्रवृति का रोमांस से कोई लेना-देना नहीं है।

 

क्यों करते हैं 'किस'

सवाल अब भी जस का तस है जिसका जवाब 2013 में वलोडारस्की के अध्ययन में मिलता है। इस अध्ययन में 'किस' करने की प्रवृति पर विस्तार से अध्ययन किया गया। वलोडारस्की ने सैकड़ों लोगों से ये पूछा कि वे जब एक दूसरे को 'किस' करते हैं तो क्या खास महसूस करते हैं? इसमें पता चला कि शरीर की सुगंध से लोग एक दूसरे के प्रति आकर्षित होते हैं और 'किस' अपने आप हो जाता है।



वलोडारस्की कहते हैं, "हममें स्तनधारियों के सारे गुण हैं, इसमें समय के साथ हमने कुछ चीजें जोड़ भी ली हैं।" ऐसे में हम कह सकते हैं कि 'किस' लोगों को एक-दूसरे के करीब लाता है।

 

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