प्रोसोपैग्नोसिया जैसे दिमागी रोग से ग्रस्‍त व्‍यक्ति को होती है पहचानने में दिक्‍कत

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Oct 08, 2013
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Quick Bites

  • इस बीमारी में घरवालों और रिश्‍तेदारों को पहचानने में होती है दिक्‍कत।
  • दिमाग पर चोट लगने के बाद इस बीमारी के होने की संभावना बढ़ती है।
  • प्रोसोपैग्नोसिया नामक इस रोग में चेहरे के भाव पहचान में नहीं आते।
  • यूनिवर्सिटी ऑफ ईस्ट लंदन में कग्निटिव न्यूरोसाइकोलॉजी ने किया शोध।

Cannot Recognise Someone

यदि आपकी दिमाग आपका साथ देना बंद कर दे तो क्‍या होगा, ऐसे में आप अपने घरवालों और रिश्‍तेदारों को नहीं पहचान पायेंगे। हाल ही में हुए एक नये शोध में इस बीमारी के बारे में पता चला है जिसके कारण आदमी लगभग सबकुछ भूल जाता है।

 


दिमाग पर चोट लगने के बाद इस बीमारी के होने की संभावना बढ़ जाती है। इस बीमारी को प्रोसोपैग्नोसिया नाम दिया गया है। इस बीमारी के शिकार लोग आंखें, नाक, मुंह को अलग-अलग देख सकते हैं लेकिन किसी के चेहरे को अच्‍छे से पहचान नहीं पाते और न ही चेहरे के भाव या मुद्राएं पहचान पाते हैं।

 


ब्रिटेन में इस बीमारी से ग्रस्‍त डेविड बताते हैं, "मैं घर आने पर अपनी बीवी को पहचान सकता हूं लेकिन अगर वो सड़क पर मेरे बगल से गुजरे और मुझे पता न हो कि वो वहां आने वाली है तो मैं उसे पहचान नहीं पाऊँगा"




इंग्लैंड के एसेक्स के निवासी डेविड की आंख में जन्म से ही दिक्कत थी लेकिन उन्हें इसका पता नहीं था। उनकी रक्तवाहिनियां (आर्टरीज़) और शिराएं आपस में जुड़ी हुई थीं। इससे आंख में रोशनी कम हो गई और दिमाग में क्षति हुई जिससे प्रोसोपेग्नोसिया हो गया।

 


यूनिवर्सिटी ऑफ ईस्ट लंदन में कग्निटिव न्यूरोसाइकोलॉजी विशेषज्ञ डॉक्टर अशोक जनसारी कहते हैं, "उपार्जित प्रोसोपेग्नोसिया बहुत दुर्लभ होता है क्योंकि इसके लिए बहुत खास जगह पर चोट लगने की ज़रूरत होती है।"

 

 

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