रियल स्‍टोरी: जब रिश्‍ते निभाना हो मुश्किल तो खुद को ऐसे रखें मजबूत

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Sep 13, 2017
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Quick Bites

  • कोई व्यक्ति अपने जजीवनसाथी को बार-बार धोखा दे रहा हो
  • तो ऐसे रिश्ते को बचाना मुश्किल हो जाता है
  • एक ऐसी ही समस्या को कैसे सुलझाया गया

जब कोई व्यक्ति अपने जीवनसाथी को बार-बार धोखा दे रहा हो तो ऐसे रिश्ते को बचाना मुश्किल हो जाता है। एक ऐसी ही समस्या को कैसे सुलझाया गया बता रही हैं, मनोवैज्ञानिक सलाहकार विचित्रा दर्गन आनंद।

लगभग छह साल पहले की बात है। एक युवती मुझसे मिलने आई। उसके पति विदेश में जॉब करते थे। शादी से पहले वह भी किसी कंपनी में सीए थी लेकिन बच्चों की वजह से उसे नौकरी छोडऩी पड़ी।पति का व्यवहार बड़ा ही संदेहास्पद था। मसलन, उसने पत्नी से कहा था कि मैं वहां बहुत व्यस्त रहता हूं। तुम मुझे कभी भी फोन मत करना, मैं ही तुम्हें कॉल करूंगा। इस बीच कई ऐसी बातें हुईं, जिससे पत्नी का यह शक यकीन में बदल गया कि सिंगापुर में उसका पति दूसरी स्त्री के साथ रहता है। उसने बताया कि इन दिनों उसका पति नवीन (परिवर्तित नाम) दिल्ली में ही है। मैंने उससे कहा कि दो दिनों के बाद तुम उसे साथ लेकर आना।

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कोशिश परिवार बचाने की

अगली सिटिंग में वह अपने पति के साथ मुझसे मिलने आई तो मैंने उन दोनों से अलग-अलग बात की। उस व्यक्ति ने मुझे बताया कि वहां कोई बेसहारा लड़की बहुत परेशान थी, इंसानियत के नाते मैंने उसकी मदद की। इस तरह हम दोनों एक-दूसरे के करीब आ गए। उस व्यक्ति ने मेरे सामने पत्नी से माफी मांगते हुए कहा कि यहां से वापस जाने के बाद वह उस लड़की से कोई संबंध नहीं रखेगा। पत्नी भी इस बात पर सहमत हो गई और दोनों वापस चले गए।   

बढ़ती गई मुश्किल

इसके बाद लगभग दो साल तक मुझे उस स्त्री की कोई खबर नहीं मिली। फिर एक रोज़ अचानक उसका $फोन आया। उसने मुझसे कहा कि मुझे आज ही आपसे मिलना है। बातचीत के बाद मालूम हुआ कि अब उसका पति घर लौट आया है। वह कहने लगी, 'मैंने हर तरह से कोशिश की पर दिनोदिन उनकी आदतें बिगड़ती जा रही हैं। कई स्त्रियों के साथ उनके अवैध संबंध हैं। वह इतने झूठे व्यक्ति हैं, इसका मुझे अंदाज़ा नहीं था। कहते हुए वह फफक पड़ी। फिर मैंने उसे अगली बार पति के साथ आने को कहा। उस व्यक्ति के मन में अपने ऐसे कार्यों के लिए ज़रा भी अफसोस नहीं था, बल्कि वह कहने लगा कि मेरी आदतें ऐसी ही हैं और मैं इन्हें बदल नहीं सकता। आशा (परिवर्तित नाम) भी पूरी तरह आज़ाद है, वह जो चाहे करे, जहां चाहे, जाए। यह सब सुनने के बाद इस मुझे इस बात का अंदाज़ा हो गया था कि उस व्यक्ति में सुधरने की कोई गुंजाइश नहीं है।

एक नई शुरुआत आखिर

अगली बार मैंने आशा को अकेले ही बुलाया और उसे समझाया कि बच्चों को अच्छी परवरिश देने की जि़म्मेदारी अब तुम्हें ही निभानी होगी। मैंने उससे कहा कि तुम्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनना होगा। इसलिए जब तक नौकरी नहीं मिलती, तुम घर से ही फ्रीलांस जॉब की शुरुआत करो। उसके बाद तुम्हें नए सिरे से अपने भविष्य के बारे में सोचना होगा। इस तरह बीच में कई बार आशा मुझसे मिलने आती रही। उसकी कंसल्टेंसी जॉब अच्छी चल रही था। इसी बीच उसे अच्छी कंपनी में जॉब भी मिल गई। अपने बेटे की बोर्ड परीक्षा खत्म होने के बाद वह मुझसे मिलने आई और कहने लगी, आखिर कब तक उनकी मारपीट बर्दाश्त करती रहूं? अब मैं इस रिश्ते से अलग होना चाहती हूं। मैंने उसे समझाया कि इसके लिए तुम किसी अच्छे वकील की मदद लो। एक सप्ताह बाद जब वह मुझसे मिलने आई तो कहने लगी कि मेरे पति भी यही चाहते थे।

इसलिए हमने आपसी सहमति से तलाक के लिए कोर्ट में अरजी लगा दी है। इस तरह एक साल के भीतर उनका तला$क हो गया। पति अपने दूसरे फ्लैट में शिफ्ट हो गए। बच्चों ने मां के साथ रहने की इच्छा ज़ाहिर की। इसलिए कोर्ट में उनकी बात मान ली गई पर उन्हें महीने में एक बार पिता से मिलने की अनुमति दी गई। हाल ही में एक रोज़ उसने मुझे फोन करके बताया कि उसका बड़ा बेटा इंजीनियर बन गया है और छोटा भी एमबीए कर रहा है। इस तरह एक दुखद रिश्ते से बाहर निकलने के बाद आशा बहुत खुश लग रही थी। यह एक ऐसा मामला था, जिसमें अनिश्चित अंतराल पर कई वर्षों तक आशा की काउंसलिंग चली। उस दौरान उसने दुखद दांपत्य से बाहर निकलने की हिम्मत दिखाई, जिससे उसकी जिंदगी संवर गई।

Source: Sakhi

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