टेस्टिकुलर कैंसर के बारे में रखें ये जानकारियां

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Dec 24, 2009
Comment

हेल्‍थ संबंधी जानकारी के लिए सब्‍सक्राइब करें

Like onlymyhealth on Facebook!

Quick Bites

  • टेस्टिकुलर कैंसर काले लोगों की तुलना में गोरे लोगों में होना आम है।
  • यदि अंडकोष में गलगण्ड रोग का संक्रमण हुआ है तो यह हो सकता है।
  • एक बार टेस्टिकुलर कैंसर विकसित होने के बाद वृषण के भीतर रहता है।
  • डाउन सिंड्रोम या क्लिनफेल्‍टर सिंड्रोम ग्रस्‍त महिलाओं को भी हो सकता है।

जब वीर्यकोष की कोशिकाओं में असामान्‍य तरीके से वृद्धि होती है उस स्थिति को टेस्टिकुलर कैंसर या वृषण कैंसर कहते हैं। यह कैंसर पुरुषों में होता है। वीर्यकोष पुरुष सेक्स ग्रंथियां हैं जो लिंग के पीछे, अंडकोश की थैली में स्थित होती हैं जो टेस्टोस्‍टेरॉन और अन्य हार्मोन का उत्पादन करती है। साथ ही वह शुक्राणुओं का उत्पादन भी करती है, जो कि पुरुष प्रजनन कोशिकाएं हैं। यह युवा पुरुषों में सबसे आम कैंसर है। एक बार टेस्टिकुलर कैंसर विकसित होने के बाद, यह वृषण के भीतर रहता है, या यह पेट में लिम्फ नोड्स में फैल सकता है। यदि इसका पता न चले तो यह वृषण कैंसर अंततः किडनी, ब्रेन, लीवर और अन्य जगहों में फैल सकता है।
 
वृषण अर्थात टेस्टिकुलर कैंसर काले लोगों की तुलना में गोरे लोगों में आम है। जिन पुरूषों में वीर्यकोष का कुछ भाग नीचे अंडकोष के बजाय पेट में रह जाता है ऐसे पुरुषों में वृषण कैंसर का जोखिम ज्यादा होता है। इसके अलावा, जिन पुरुषों में एक अंडकोष में कैंसर का विकास होता है, उनको लगभग 2 प्रतिशत से 3 प्रतिशत तक दूसरे अंडकोष में भी कैंसर के विकास का जोखिम जीवन भर रहता है।

 

 

टेस्टिकुलर कैंसर के कारण

  • अगर घर में किसी को यह कैंसर हो चुका है तो परिवार के अन्‍य लोग इसकी गिरफ्त में आ सकते हैं। यह एक आनुवांशिक बीमारी है।
  • जिनके गुप्‍तांगों का विकास नही हो पाता उनको भी टेस्टिकुलर कैंसर का खतरा होता है।
  • एचआईवी पॉजिटिव मरीजों को भी कैंसर का यह प्रकार हो सकता है।
  • डाउन सिंड्रोम या क्लिनफेल्‍टर सिंड्रोम ग्रस्‍त महिलाओं को भी हो सकता है।

 

टेस्टिकुलर कैंसर के अन्‍य कारण

  • यदि अंडकोष में गलगण्ड रोग का संक्रमण हुआ है तो यह हो सकता है।
  • एजेंट ऑरेंज के संपर्क में आने से।

 

वृषण कैंसर के 5 प्रतिशत  मामले अंडकोष सहायक ऊतकों में ट्यूमर होने से शुरू होते है। इन कैंसर कोशिकाओ को सेर्टोली और लीडिग कोशिका ट्यूमर कहा जाता है।

 

 

Image Source - Getty Images

Read More Articles on testicular Cancer in Hindi

Write a Review Feedback
Is it Helpful Article?YES2 Votes 13368 Views 0 Comment
प्रतिक्रिया दें
disclaimer

इस जानकारी की सटिकता, समयबद्धता और वास्‍तविकता सुनिश्‍चित करने का हर सम्‍भव प्रयास किया गया है । इसकी नैतिक जि़म्‍मेदारी ओन्‍लीमाईहैल्‍थ की नहीं है । डिस्‍क्‍लेमर:ओन्‍लीमाईहैल्‍थ पर उपलब्‍ध सभी साम्रगी केवल पाठकों की जानकारी और ज्ञानवर्धन के लिए दी गई है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्‍सक से अवश्‍य संपर्क करें। हमारा उद्देश्‍य आपको रोचक और ज्ञानवर्धक जानकारी मुहैया कराना मात्र है। आपका चिकित्‍सक आपकी सेहत के बारे में बेहतर जानता है और उसकी सलाह का कोई विकल्‍प नहीं है।

संबंधित जानकारी
  • सभी
  • लेख
  • स्लाइडशो
  • वीडियो
  • प्रश्नोत्तर