महिलाओं के लिए स्‍वस्‍थ रहने के टिप्‍स

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Apr 08, 2015
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Quick Bites

  • परम्परांगत रूप से स्त्रियों का स्वास्थ्य एक उपेक्षित मुद्दा रहा है।
  • औरतें, पुरुषों के मुकाबले स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों में अधिक लचर रहती हैं।
  • महिलाएं अपने जीवन काल में अनेक परिवर्तनशील चरणों से गुज़रती है।
  • यौवन के दौरान होने वाले हार्मोनल बदलाव धीरे-धीरे उत्पन्न होते हैं।

परम्परांगत रूप से स्त्रियों का स्वास्थ्य एक उपेक्षित मुद्दा रहा है, विशेषकर भारत में। औरतें एक बहन, मां और पत्नी के तौर पर अपने पारिवारिक सदस्यों की देखभाल करती हैं। लेकिन अब यह स्थिति बदल रही है। अब लोगों में पहले से अधिक जागरूकता है। आज औरतें भी अपने स्वास्थ्य की समस्याओं के प्रति जागरूक हो चुकी हैं, जोकि बेहद ज़रूरी भी है। तो चलिये जानें कि महिलाओं को स्‍वस्‍थ रहने के लिए किन बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है।

खुद के स्वास्थ्य को संभालते हुए एक परिवार में औरतों की भूमिका   

औरतें, पुरुषों के मुकाबले स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों में अधिक लचर रहती हैं। फिर चाहे खुद के स्वास्थ्य का ख्याल रखना हो या अपने परिवार के किसी सदस्य के स्वास्थ्य का ख्याल रखना हो, या एक नियमित अंतराल पर निरीक्षण के लिए चिकित्सक के पास जाना हो या फिर सही खुराक और दवा उपचार का अनुसरण करना हो। आज के युग में औरतों को अपने घर और बाहर, दोनों जगह कई काम निपटाने होते हैं, जिसके कारण उनके ऊपर अत्यधिक तनाव का बोझ रहता है। हर दिन के तनाव के अलावा, औरतों का शरीर गर्भावस्था, प्रसव और मेनोपॉज जैसे बदलावों से भी होकर गुज़रता है। शरीर में आये इन सारे बदलावों की वज़ह से एक स्त्री का शरीर कमज़ोर बन जाता है और उसके व्यवहार में भी कई बदलाव आते हैं। ब्रेस्ट कैंसर, सर्विकल कैंसर, ह्रदय रोग और प्रजनन तंत्र संबंधी बीमारियों से भी औरतों को जूझना पड़ सकता है।

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जब शरीर में आये बदलाव शांत होते हैं   

जब शरीर में होने वाले बदलावों का चरम समय आता है, तो आमतौर पर औरतें शान्ति से सहती हैं, जबकि पुरुषों के बारे में ऐसा नहीं कहा जा सकता है। औरतें सब कुछ शान्ति से सहने की वज़ह से अक्सर अवसाद की शिकार भी हो जाती हैं। ऐ से में उन्हें शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए घर और कार्यस्थल के बीच में सही तालमेल मिलाने की बेहद जरूरत होती है। स्त्रियों में एक परफेक्ट पत्नी, एक परफेक्ट मां और एक परफेक्ट कामकाजी स्त्री बनने की अपनी बेजोड़ प्रतिभा को निभाने के चलते कई बार इन्हें अत्यधिक तनावपूर्ण स्थिति से भी गुजरना पड़ाता है। ऐसे में उन्हें यह समझना बेहद आवश्यक है कि ‘परफेक्ट’ जैसी कोई चीज नहीं होती है। और सेहत का ध्यान रखना सर्वोपरी होता है।

 

महिलाएं और हार्मोन   

महिलाएं अपने जीवन में ऐसे अनेक चरणों से होकर गुज़रती है, जहां पर वह अपने शरीर में प्राकृतिक तौर पर होने वाले हार्मोनल बदलावों का अनुभव करती हैं। हार्मोनल बदलाव यौवन, गर्भावस्था और मेनोपॉज के दौरान उत्पन्न होते हैं, जिसके कारण महिलाओं में मूड बदलना और अवसाद जैसी मानसिक परेशानियों हो सकती हैं। ऐसे में यह बेहद जरूरी है कि स्त्रियों को उसके जीवन में प्राकृतिक रूप से विभिन्न चरणों में आने वाले हार्मोनल बदलावों के बारे में पहले से ही जानकारी हो, जिससे कि उसे इन चरणों का बेहतर ढंग से सामना करने में मदद मिले।

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प्यूबर्टी (यौवन) के चरण   

प्यूबर्टी (यौवन) के चरण के दौरान होने वाले हार्मोनल बदलाव धीरे-धीरे उत्पन्न होते हैं, इन बदलावों का महिला के शरीर पर साकार और स्थाई परिणाम नज़र आते हैं। जीवन के इस बिंदु पर होने वाले बदलाव ब्रेस्ट का विकास, निजी स्थानों में बालों का विकास और कद का विकास आदि के रूप में नज़र आते हैं। मासिक धर्म की प्रक्रिया भी इसी चरम में आरम्भ होती है। शरीर में उत्पन्न होने वाले बदलाव करीब तीन से चार वर्षों की अवधि तक नज़र आते हैं और इस दौरान एक कन्या अनेक परिवर्तनशील मनोभावों से होकर गुज़रती है। एक कन्या को अपने लगातार बदलते शरीर रूबरू होना पड़ता है, वह खुद के लिंगभेद के बारे में सचेत हो जाती है। साथ ही फर्टिलिटी के उत्पन्न होने की वजह से कन्या मानसिक रूप से बेहद संवेदनशील और चकित हो जाती है। इस चरण में पीयूष ग्रंथि एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, क्योंकि यह शरीर और प्रजनन संबंधी अंगों के विकास के लिए शरीर में हार्मोनों के निर्माण में मदद करती है।


गर्भावस्था का चरण  

गर्भावस्था में मासिक धर्म के दौरान एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टरोन जैसे कुछ निश्चित हार्मोन की कमी हो सकती है, इसके बदले एक नया हार्मोन ह्यूमेन क्रोइनिक गोंडाडोट्रोफिन (एचसीजी), सामने आता है। ह्यूमेन क्रोइनिक गोंडाडोट्रोफिन (एचसीजी) का विकसित हो रही प्लेसेंटा द्वारा निर्माण किया जाता है। जोकि ओवरी एस्ट्रोजन और प्रोगेस्ट्रोन के स्तर को बढाती है, और जिसकी गर्भ को पूर्ण अवधि तक उठा सकने के लिए आवश्यक्ता होती है।


उम्र के हर बदलते पड़ाव के साथ-साथ एक महिला को जीवन भर अपने स्वास्थ्य के बेहद सावधानी से ध्यान रखना चाहिये। उसे नियमित व्यायाम, स्वस्थ खान-पान और योग आदि भी करना चाहिये।

ImageCourtesy@gettyimages
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