क्‍या है निमोनिया, इसको समझें

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Nov 05, 2013
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Quick Bites

  • फंगस और बैक्‍टीरिया के कारण होता है निमोनिया।
  • निमोनिया बच्‍चों और बुजुर्गों के लिए अधिक खतरनाक।
  • निमोनिया फेफड़ों में होने वाले संक्रमण का नाम है।
  • निमोनिया के कारण वायुकोष्ठिकाओं में भर जाती है पस।

निमोनिया कुछ समय पहले तक निमोनिया जानलेवा बीमारी समझी जाती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं है। हालांकि, अभी भी अगर यह बीमारी गंभीर रूप धारण कर ले, तो जानलेवा हो सकती है, लेकिन इसकी तादाद काफी कम हो गयी है। निमोनिया आमतौर पर बच्‍चों और बड़ी उम्र के लोगों को अधिक परेशान करता है। लेकिन, यह किसी भी आयु और लिंग के व्‍यक्ति को हो सकता है।



निमोनिया फेफड़ों को होने वाला संक्रमण है, जो बैक्‍टीरिया, वायरस, फंगस अथवा पेरासाइट्स के कारण होता है। इसकी सबसे अहम पहचान है, फेफड़ों की वायुकोष्‍िठका में सूजन हो जाती है अथवा उसमें तरल पदार्थ भर जाता है। कई बार निमोनिया गंभीर रूप धारण कर लेता है। इसी परिस्थिति में व्‍यक्ति की हालत बहुत खराब हो जाती है और उसकी जान भी जा सकती है। हालांकि, यह बीमारी जवान एवं स्‍वस्‍थ लोगों को भी हो सकती है, लेकिन बुजुर्गों, बच्‍चों, ऐसे लोग जो पहले से किसी बीमारी से पीड़‍ित हैं अथवा जिनकी प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हैं, के लिए यह बीमारी काफी खतरनाक हो सकती है।

 

अमेरिका में हर साल तीस लाख से अधिक लोगों को निमोनिया होता है और इनमें से करीब 17 फीसदी ही अस्‍पतालों में इसका इलाज करवाते हैं। अधिकतर लोग इस रोग से उबर आते हैं, लेकिन पांच फीसदी लोग बीमारी के कारण मौत का ग्रास बन जाते हैं।


कैसे होता है निमोनिया

बैक्‍टीरिया और वायरस निमोनिया के प्रमुख कारण होते हैं। यह बीमारी तब होती है जब जब किसी व्‍यक्ति की सांस के साथ निमोनिया ग्रस्‍त कीटाणु उसके शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता उन कीटाणुओं से लड़ नहीं पाती। तब ये कीटाणु फेफड़े की वायुकोष्ठिका में बैठकर अपनी संख्‍या बढ़ाने में जुट जाते हैं। जब शरीर इस संक्रमण से लड़ने के लिए श्‍वेत रक्‍त कोशिकाओं को भेजता है, तो वायुकोष्ठिकाएं तरल पदार्थों और पस से भर जाती हैं, जिसके कारण निमोनिया होता है।

निमोनिया बैक्‍टीरिया, वायरल, फंगल और कई अन्‍य कारणों से होता है।

बैक्‍टीरिया

स्‍ट्रेपऑक्‍स निमोनिया, बैक्‍टीरियल निमोनिया का सबसे सामान्‍य प्रकार है। वे लोग जो क्रॉनिक ऑब्‍स्‍ट्रक्‍टिव पलमोनरी डिजीज (सीओपीडी) अथवा शराब पीने की लत से परेशान होते हैं उन्‍हें यह निमोनिया होने का खतरा काफी अधिक होता है। ऐसे लोग क्‍लेबसिला निमोनिया और हेमोफिलस निमोनिया के शिकार अधिक होते हैं। एटीपिकल निमोनिया, निमोनिया का ऐसा प्रकार है, जो आमतौर पर गर्मियों के मौसम में अधिक देखने को मिलता है। यह भी बैक्‍टीरिया के कारण ही होता है।

वायरल

वायरल निमोनिया वे निमोनिया होते हैं, जो आमतौर पर एंटी-बायोटिक ट्रीटमेंट के प्रति असंवदेनशील होते हैं। एडेनावायरस, रिहनोवायरस, इनफ्लूंजा वायरस, रेपिरेटरी सिनेसाइ‍यटिकल वायरस और पारेनफ्लूएंजा वायरस, वायरल निमोनिया होने के संभावित कारण हैं।

फंगल

हिस्‍टोप्‍लास्‍मोसिस, कोसिडायोमाइकोसिस, ब्‍लास्‍टोमाइकोसिस, एस्‍पेरगिलोसिस और क्राइपटोकोसकोसिस, ऐसे फंगल इंफेक्‍शन हैं, जो आपको निमोनिया दे सकते हैं। अमेरिका में इस प्रकार के निमोनिया आमतौर पर देखने को नहीं मिल रहे।

 

 

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