जानें, क्‍या है टाइप 2 फैटी लीवर

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Mar 31, 2017
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Quick Bites

  • शराब की लत, बाइपास सर्जरी, आदि कई कारण होते हैं फैटी लीवर के।
  • अतिरिक्त दवाईयां फैटी लीवर को प्रभावित करती हैं।
  • फैटी लीवर से बचाता है जीवनशैली, खानपान, नियमित एक्सरसाइज।

फैटी लीवर या नानअल्कोहोलिक फैटी लीवर डिजीज़ तेजी से बढ़ता हुआ लीवर डिजीज़ है। हालांकि टाइप 2 फैटी लीवर कोई मेडिकल शब्द नहीं है लेकिन इसका रिश्ता टाइप 2 डायबिटीज मेलिटस से है। इसके अलावा टाइप 2 फैटी लीवर, टाइप 2 डायबिटीज की आशंका को भी बढ़ाता है। यूं तो सामान्यतः टाइप 2 फैटी लीवर के किसी प्रकार के लक्ष्ण देखने को नहीं मिलते। मगर कुछ स्थिति में लीवर टिश्यू में सूजन की समस्या देखने को मिलती है। इससे फैटी लीवर की स्थिति भयावह हो जाती है जिसे स्टीटोहैपाटाइटिस कहा जाता है। परिणामस्वरूप लीवर पूरी तरह खराब भी हो सकता है। यदि आपको टाइप 2 डायबिटीज, मोटापा या वजन बढ़ने सम्बंधी समस्या है तो बेहतर है कि जल्द से जल्द अपना रूटीन चेक अप करवाएं।

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फैटी लीवर क्या है?

लीवर सेल में वसा का जमना ही फैटी लीवर है। इससे लीवर में सूजन, घाव, सख्त होना या फिर लीवर में किसी प्रकार की क्षति होना है। असल में सिरोसिस लीवर की वह बीमारी है जिसमें लीवर में घाव हो सकता है। अतः लीवर सही ढंग से काम करना बंद कर सकता है। यदि किसी व्यक्ति विशेष को टाइप 2 डायबिटीज है तो उनके लीवर में वसा के जमने की आशंका तो होती ही है साथ ही उनके रक्त में कोलेस्ट्रोल का स्तर भी बढ़ सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक डायबिटीज का नियमित चेकअप कराते रहना चाहिए। खासकर यदि आप टाइप 2 डायबिटीज के मरीज हैं तो अपने लीवर के प्रति खासा सजग रहें। यदि ऐसा न किया जाए तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। यहां तक कि इसके दुखद परिणाम ही देखने को मिलते हैं।

फैटी लीवर

 

फैटी लीवर की वजह

हालांकि विशेषज्ञ फैटी लीवर की ठीक ठीक वजह बताने अक्षम हैं। बावजूद इसके कुछ मेडिकल स्थिति और जीवनशैली को इसकी वजह माना जाता है, जिस कारण फैटी लीवर की आशंका बढ़ जाती है। शराब की लत, गैस्ट्रिक बाइपास सर्जरी, तेजी से वजन का गिरना आदि। इन सबका फैटी लीवर से गहरा सम्बंध माना गया है। इसके अलावा मेडिकल स्थिति मसलन स्थूलता, मेटाबोलिक सिन्ड्रोम,  हाई कोलेस्ट्रोल और विल्सन डिजीज़ के कारण फैटी लीवर की आशंका में बढ़ोत्तरी होती है। यूएस न्यूज और विश्व रिपोर्ट के मुताबिक यदि आप डायबिटीज के मरीज हैं तो स्वस्थ आहार, स्वस्थ जीवनशैली, नियमित एक्सरसाइज आदि तमाम चीजों के जरिये शर्करा के स्तर को नियंत्रित किया जा सकता है। इससे फैटी लीवर की आशंका को भी कम किया जा सकता है। चूंकि कुछ दवाईयां और मेडिकल स्थिति भी फैटी लीवर के लिए जिम्मेदार मानी जाती हैं तो ऐसे में जरूरी है कि डाक्टर से सीधे संपर्क किया जाए।

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फैटी लीवर का समाधान कुछ इस प्रकार हैं-

  • जैसा कि पहले ही जिक्र किया जा चुका है कि शराब की लत के कारण फैटी लीवर हो सकता है। अतः सबसे पहले शराब का सेवन जितना संभव हो कम करें। इसके अलावा अल्कोहोलिक पेय का सेवन भी न करें। विशेषज्ञों के मुताबिक फैटी लीवर को आसानी से रिपेयर किया जा सकता है बशर्ते उसमें सूजन या घाव न हो। आप चाहें तो इसके समाधान के लिए अपने डाक्टर से बात कर सकते हैं। शराब का सेवन कम कर सकते हैं। इसके लिए चाहें तो काउंसलिंग भी ली जा सकती है। यदि आपका नानअल्कोहोलिक फैटी लीवर तो भी जरूरी है कि आप शराब से बचे रहें।
  • वजन कम करना। तमाम बीमारियों की जड़ वजन है। जब तक आपका वजन कम नहीं होगा तब तक आप कई किस्म की परेशानियों से जूझते रहेंगे। अतः कोशिश करें कि अपना वजन कम करे। स्वस्थ आहार लें। जिम ज्वाइन करें। अपने डाइट चार्ट को बदलें। विशेषज्ञों की राय अनुसार ही आहार लें। प्रतिदिन कम से 30 मिनट तक व्यायाम आवश्यक तौरपर करें। प्रतिदिन चलना, जागिंग, ऐराबोकि आदि भी वजन कम करने के लिए कर सकते हैं। जैसे जैसे आपका वजन कम होगा, आपके फैटी लीवर की स्थिति बेहतर होती रहेगी।
  • स्वस्थ डाइट लें। जितना संभव हो जंक फूड न लें। इसके अलावा ऐसे आहार से बचें जिसमें वसा ज्यादा हो। आपके आहार में जितनी वसा होगी, फैटी लीवर की आशंका उतनी ज्यादा होगी। अपने खानपान में फलाहार शामिल करें। प्राकृतिक एंटीआक्सीडेंट आपके स्वास्थ को लाभ पहुंचा सकती है। इससे शरीर में मौजूद टाक्सिक से छुटकारा पाया जा सकता है। संभव हो फैटी मीट से बचें। हो सके तो लीन मीट यानी चिकन आदि लें।
  • दवाईयों से बचें। ऐसी दवाईयां न लें जो लीवर के नुकसादेय है। विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसी तमाम दवाईयां हैं जो लीवर को नुकसान पहुंचा सकती है। अतः संभव हो तो अपने डाक्टर से संपर्क करें। इसके अलावा गैर कानूनी दवाईयां भी न लें और न ही छोटी छोटी चीजों के लिए दवाईयों पर निर्भर हों।

 

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