घुलनशील और अघुलनशील फाइबर में क्या है फर्क...?

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Feb 19, 2017
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Quick Bites

अघुलनशील फाइबर को रफ फाइबर के रूप में जानते हैं।
बीन, मटर, ओट, बारले, फल आदि में घुलनशील फाइबर पाए जाते हैं।
फाइबर के रूप में प्रत्येक दिन तीन सब्जियां और एक फल अवश्य लें।

ज्यादातर लोगों के मुंह से आपने सुना होगा कि फाइबर हमारी सेहत के लिए अच्छा है। खासकर बच्चों को फाइबर अवश्य दें। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कई किस्म के फाइबर होते हैं? जी, हां! सामान्यतः हम दो किस्म के फाइबर से परिचित होते हैं। घुलनशील और अघुलनशील। जबकि कई बार देखने में ऐसा आता है कि दोनों ही किस्म के फाइबर एक ही खाद्य पदार्थ में मौजूद हो, लेकिन दोनों ही बेहतर स्वास्थ्य में अलग अलग भूमिका अदा करते हैं। आइए जानते हैं घुलनशील और अघुलनशील फाइबर क्या है और हमें इनकी क्यों जरूरत है?

fiber

अघुलनशील फाइबर

सामान्यतः लोग अघुलनशील फाइबर को रफ फाइबर के रूप में जानते हैं। इसे आमतौर पर व्होल ग्रेन में पाया जाता है मसलन बादाम, सब्जी, फल। यह खासकर सब्जी या फल के कुछ हिस्सों में मौजूद होता है जैसे की बीज, त्वचा आदि। अघुलनशील फाइबर पानी में नहीं घुलता। अघुलनशील फाइबर पेट में जाकर टूटता भी नहीं है और न ही हमारे रक्त में घुलता है। इसे आप कह सकते हैं कि पाचन तंत्र में वेस्ट की संख्या बढ़ाता है। इससे पेट साफ रहने में मदद मिलती है। यही नहीं कॉन्स्टीपेशन यानी कब्ज की समस्या जिन लोगों को होती है, उनके लिए अघुलनशील फाइबर काफी उपकारी है। इसके अलावा पेट से संबंधित यानी खानपान से संबंधित बीमारी के लिए अघुलनशील फाइबर का उपयोग कर सकते हैं।

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घुलनशील फाइबर

घुलनशील फाइबर सॉफ्ट और स्टिकी होता है। यह पानी में घुलकर पांचन तंत्र में जाकर जेल जैसा तत्व का निर्माण करता है। इसमें बीन, मटर, ओट, बारली, फल आदि चीजें शामिल हैं। घुलनशील फाइबर असल में मल को नर्म करने का काम करता है ताकि कब्ज के दौरान समस्या न हो। जिन लोगों का मल काफी सख्त हो, उनके लिए घुलनशील फाइबर उपयोगी है। यह कोलेस्ट्रोल और शुगर की मात्रा को नियंत्रित करता है, साथ ही रक्त में इन्हें घुलने से रोकता है। इसलिए इसे ब्लड शुगर नियंत्रक कहा जाता है। यही नहीं इसके उपयोगी गुणों के कारण इसे हृदय के लिए भी लाभकारी माना जाता है। साथ ही यह ब्लड कोलेस्ट्रोल को भी कम करता है। इसके अलावा घुलनशील फाइबर अच्छे बैक्टेरिया बढ़ाता जिससे हमारी इम्यून पावर बढ़ती है। घुलनशील फाइबर का एक और लाभ यह है कि इससे हमारा मूड भी बेहतर होता है। अतः जिन लोगों को मूड स्विंग की शिकायत रहती है, वे चाहे तो घुलनशील फाइबर की मात्रा अपने खानपान में बढ़ा सकते हैं।

दोनों क्यों हमारी शरीर को चाहिए

घुलशील और अघुलनशील दोनों किस्म के फाइबर हमारे शरीर के लिए जरूरी होते हैं। इसलिए कहा भी जाता है कि पूर्ण मात्रा में फाइबर लें। अर्काईव्स आफ इंटरनल मेडिसिन में हुए एक अध्ययन से पता चलता है कि आप जितना ज्यादा फाइबर लेते हैं, उतना ही आपके मरने की आशंका में गिरावट आती है। मतलब यह कि बीमारी संबंधी मौत के आसार में कमी आती है। जो लोग नियमित रूप से फाइबर लेते हैं, उनके मरने की आशंका में 22 फीसदी की कमी आती है। जबकि, जो लोग फाइबर नहीं लेते उनके साथ ऐसा कुछ नहीं है।

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डाइट में किस तरह शामिल करें

यह कोई जरूरी नहीं है कि हर समय घुलनशील और अघुलनशील फाइबर की गिनती की जाए। आप सिर्फ इतना नियम बना लें कि नियिमत रूप से प्रत्येक दिन तीन सब्जियां जरूर खाएंगे। एक बार फल खाएंगे। खानपान का सही शिड्यूल बनाना है, तो नाश्ते में फल को शामिल करें।

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Image Source- Shutterstock

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