जानें क्‍या है पिगमेंटेशन

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Aug 13, 2013
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चेहरे की असमान त्‍वचा आपके माथे पर शिकन की लकीरें खींच सकती हैं। पिगमेंटेंशन से आपकी त्‍वचा पर दाग धब्‍बे और निशान उभर आते हैं। लेकिन, पिगमेंटेशन से घबराने की जरूरत नहीं यह एक सामान्‍य समस्‍या है।

  • हायपोपिगमेंटेशन में दाग धब्‍बों का निशान सामान्‍य त्‍वचा के रंग से हल्‍का होता है।
  • हायपरपिगमेंटेशन में त्‍वचा पर पड़ने वाले निशानों का रंग गहरा होता है।
  • महिलाओं को अधिक होती है यह समस्‍य। 
  • गर्मियों में पिगमेंटेशन की टेंश बढ़ जाती है।

बेदाग खूबसूरत त्‍वचा कौन नहीं चाहता। हर किसी की चाहत होती है उसका रूप सदा दमकता रहे। लेकिन हर बार ऐसा नहीं हो पाता। गाहे-बगाहे त्‍वचा संबंधी समस्‍यायें सामने आती ही रहती हैं। पिगमेंटेशन एक ऐसी ही समस्‍या है। आइए जानें आखिर पिगमेंटेशन है क्‍या और यह कितने प्रकार का होता है।

 

खूबसूरत महिलापिगमेंटेशन भी दो प्रकार का होता है हायपोपिगमेंटेशन और हायपरपिगमेंटेशन। हायपोपिगमेंटेशन में त्‍वचा पर पड़ने वाले धब्‍बों का रंग त्‍वचा के सामान्‍य रंग से हल्‍का हो जाता है। वहीं हायपरपिगमेंटेशन में धब्‍बों का रंग आसपास की त्‍वचा से गहरा हो जाता है।

क्‍यों होता है पिगमेंटेशन

पिगमेंटेशन/हायपरपिगमेंटेशन त्‍वचा की एक सामान्‍य समस्‍या है। इस समस्‍या में त्‍वचा का कुछ हिस्‍सा सामान्‍य से गहरा रंग का हो जाता है। इसके अलावा कई बार त्‍वचा पर धब्‍बे भी पड़ जाते हैं। आमतौर पर यह समस्‍या कोई हान‍ि नहीं पहुंचाती। पिगमेंटेशन की सबसे बड़ी वजह त्‍वचा में मेलानिन का स्‍तर बढ़ना होती है। पूरी दुनिया के लोगों को त्‍वचा संबंधी इस समस्‍या का सामना करना पड़ता है।


कितने प्रकार का होता है पिगमेंटेशन

मेलेसमा
त्‍वचा की यह समस्‍या अधिकतर व्‍यस्‍कों में देखने को मिलती है। इसमें चेहरे पर भूरे रंग के धब्‍बे उभर आते हैं। चेहरे के दोनों ओर इस तरह के निशान आ जाते हैं। चेहरे के जिस हिस्‍से पर मेलेसमा के निशान सबसे अधिक नजर आते हैं, उनमें गाल, नाक, माथा और ऊपरी होंठ शामिल होता है। यह समस्‍या महिलाओं में अधिक सामान्‍य है। इस समस्‍या से पीड़ि‍त होने वाले लोगों में पुरुषों की संख्‍या केवल दस फीसदी होती है। गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन करने वाली महिलाओं में यह समस्‍या सबसे अधिक देखी जाती है। अगर वे महिलायें सूर्य की रोशनी में अधिक वक्‍त बितायें तो उनकी समस्‍या बढ़ जाती है। गर्मियों के दिनों में यह समस्‍या काफी अधिक होती है।

पुल्टिस
कुछ गर्भवती महिलाओं की त्‍वचा में मेलानिन का उत्‍पादन काफी अधिक होने लगता है। इस स्थिति को च्‍लोसमा (पुल्टिस) कहा जाता है। कुछ लोग इसे 'माक्‍स ऑफ प्रेग्‍नेंसी' भी कहते हैं। यह निशान आमतौर पर महिलाओं के चेहरे और उनके पेट के आसपास नजर आते हैं। यह निशान काफी बड़े क्षेत्र में फैल सकते हैं और सूर्य की रोशनी में अधिक वक्‍त बिताने से यह समस्‍या बढ़ सकती है।

सन डैमेज
ढलती उम्र के निशानों को कई बार 'लिवर स्‍पॉट' भी कहा जाता है। यह भी पिगमेंटेशन का ही एक प्रकार है। सूर्य की हानिकारक अल्‍ट्रा वायलेट किरणों से त्‍वचा को काफी नुकसान होता है। इस समस्‍या का सबसे बड़ा कारण सूर्य की रोशनी में अधिक वक्‍त बिताना भी होता है। छोटे लेकिन गहरे धब्‍बे इस समस्‍या का सबसे आम लक्षण होते हैं। ये निशान आमतौर पर हाथों और चेहरों पर नजर आते हैं। लेकिन, शरीर का कोई भी हिस्‍सा जो काफी देर तक सूर्य की किरणों के संपर्क में रहता है वहां ऐसी समस्‍या हो सकती है।

झाइयां
यह भी त्‍वचा से जुड़ी एक सामान्‍य समस्‍या है। इसमें त्‍वचा पर कुछ निशान पड़ जाते हैं। त्‍वचा की इस समस्‍या को वंशानुगत भी माना जाता है। हालांकि, कुछ लोग झाइयों को आकर्षक मानते हैं, लेकिन अधिकतर की नजर में यह खूबसूरती पर छाए बादल ही हैं, जिनसे जल्‍द से जल्‍द निजात पायी जानी चाहिए।

पीआईएच
पीआईएच यानी पोस्‍ट इंन्‍फ्लेमेंटरी हायपरपिगमेंटशन की समस्‍या आमतौर पर त्‍वचा पर किसी प्रकार की चोट के बाद ही नजर आती है। यह समस्‍या एक्‍ने के निशानों और त्‍वचा पर अन्‍य किसी प्रकार के घावों के बाद अधिक मुखर हो जाती है। इसके साथ ही लेजर थेरेपी से होने वाले नुकसान के चलते भी यह समस्‍या सामने आ सकती है। इसके साथ ही कुछ सौंदर्य उत्‍पादों में भी हानिकारक केमिकल होते हैं, जो त्‍वचा के लिए फायदेमंद नहीं होते। ऐसे उत्‍पादों का अधिक इस्‍तेमाल भी यह समस्‍या पैदा कर सकता है।

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