जानें क्‍या है इनएप्रोप्रीऐट साइनस टेककार्डिया

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Aug 20, 2015
Comment

हेल्‍थ संबंधी जानकारी के लिए सब्‍सक्राइब करें

Like onlymyhealth on Facebook!

Quick Bites

  • इनएप्रोप्रीऐट साइनस टेककार्डिया दिल से संबधित रोग है।
  • इसमें अचानक ही तेज चलने लगती है दिल की धड़कन।
  • टेककार्डिया के रोगी को ज्यादा नहीं करें शारीरिक श्रम।
  • दवा या ओपन हार्ट सर्जरी से होता है इस रोग का इलाज।

इनएप्रोप्रीऐट साइनस टेककार्डिया (आइएसटी) हार्ट से संबंधित समस्‍या है। टेककार्डिया, शरीर की सामान्य प्रतिक्रिया का हिस्सा हो सकता है। अक्‍सर चिंता, बुखार, खून का ज्यादा बहाव व थकावट वाली एक्सरसाइज के बाद हृदय की गति बढ़ जाती है। साथ ही कई चिकित्सीय कारणों के चलते भी टेककार्डिया की समस्या हो जाती है जैसे थायराइड, हाइपरथाइराइडिज्म आदि। कई बार व्यक्ति में निमोनिया होने के कारण वह सांस लेने में असमर्थ हो जाता है जिससे टेककार्डिया की शिकायत हो सकती है।

आइएसटी होने के लक्षण

टेककार्डिया साइनस और नॉन साइनस दो प्रकार का होता है। साइनस टेककार्डिया एप्रोप्रीऐट साइनस टेककार्डिया और इनएप्रोप्रीऐट साइनस टेककार्डिया (आइएसटी) दो तरह का होता हैं। इनएप्रोप्रिएट साइनस टेककार्डिया को पहली बार 1979 में परिभाषित किया गया था। आइएसटी अक्‍सर युवा महिलाओं में पायी जाने वाली समस्‍या है। यह समस्‍या क्‍यों होती है इसके बारे में अभी स्‍पष्‍ट जानकारी नहीं है। सामान्‍यतया आइएसटी की समस्‍या की पहचान 20 साल और 30 साल के युवाओं में की जाती है। धकधकी (दिल का तेजी के साथ धड़कना) की समस्‍या, रोगी के सीने में दर्द और गर्दन में स्‍पन्‍दन, थकावट और पसीने आने के लक्षण, मरीज को हृदय गति तेज महसूस होना, हाइपरथाइराइडिज्म, वजन में कमी होना, बुखार का बने रहना, चिंता बनी रहना आदि इसके सबसे मुख्य लक्षण होते है।

आइएसटी होने का कारण

इनएप्रोप्रीऐट साइनस टेककार्डिया क्‍यों होता है, अभी शोधकर्ता इस निष्‍कर्ष पर नहीं पहुंच सके हैं। इसमें हार्ट रेट बिना किसी खास वजह के सामान्‍य से तेज हो जाती हैं और हार्ट रेट 100 बीट प्रति मिनट और इससे ऊपर तक पहुंच जाती है। यदि किसी में इनएप्रोप्रीऐट साइनस टेककार्डिया के लक्षणों में से कोई लक्षण पाया जाता है तो 24 घंटे तक मॉनीटरिंग करके आइएसटी की पहचान की जा सकती है। आइएसटी के मरीजों की सामान्‍यतया प्रति दिन की हार्ट रेट 100 बीट प्रति मिनट से भी अधिक होती है। जब इस तरह के मरीज बिस्‍तर पर लेट जाते हैं तो इन्‍हें अपनी हार्ट रेट नार्मल लगती है। आइएसटी के मरीज को कई बार सोने के दौरान अपनी कम हार्ट बीट महसूस होती है। जबकि देखा जाता है कि उसकी हार्टबीट 130 तक होती है।

आइएसटी का उपचार

आइएसटी का रोगी को शारीरिक श्रम से परहेज करना चाहिए। इनएप्रोप्रीएट साइनस टेककार्डिया लंबे समय तक बनी रहने वाली समस्‍या है। इसलिए इसका उपचार भी लंबे समय तक चलता है। आइएसटी का उपचार दवाईयों के द्वारा या ओपन हार्ट सर्जरी के द्वारा किया जाता है। हालांकि ऐसा कम देखा गया है कि ओपन हार्ट सर्जरी की कम ही जरूरत पड़ती है। इसके मरीजों का उपचार चिकित्‍सक अधिकतर दवाईयों द्वारा ही करते हैं।

यदि आपको इनमें से इनएप्रोप्रीऐट साइनस टेककार्डिया का कोई भी लक्षण अपने शरीर में लगता है तो 24 घंटे तक अपने शरीर की मॉनीटरिंग करें। इसके बाद तुरंत चिकित्‍सक से परामर्श करें।

Image Source-Getty

Read More Articles On Heart Health In Hindi

 

Write a Review
Is it Helpful Article?YES12 Votes 6649 Views 0 Comment
प्रतिक्रिया दें
disclaimer

इस जानकारी की सटिकता, समयबद्धता और वास्‍तविकता सुनिश्‍चित करने का हर सम्‍भव प्रयास किया गया है । इसकी नैतिक जि़म्‍मेदारी ओन्‍लीमाईहैल्‍थ की नहीं है । डिस्‍क्‍लेमर:ओन्‍लीमाईहैल्‍थ पर उपलब्‍ध सभी साम्रगी केवल पाठकों की जानकारी और ज्ञानवर्धन के लिए दी गई है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्‍सक से अवश्‍य संपर्क करें। हमारा उद्देश्‍य आपको रोचक और ज्ञानवर्धक जानकारी मुहैया कराना मात्र है। आपका चिकित्‍सक आपकी सेहत के बारे में बेहतर जानता है और उसकी सलाह का कोई विकल्‍प नहीं है।

संबंधित जानकारी
  • सभी
  • लेख
  • स्लाइडशो
  • वीडियो
  • प्रश्नोत्तर