एएलएस और इसका आईस बकेट चैलेंज से संबंध

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Aug 27, 2014
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Quick Bites

  • मस्तिष्‍क की कुछ खास कोशिकाओं पर हमला होता है एएलएस में।
  • एएलएस से पीड़‍ित व्‍यक्ति‍ की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं।
  • पीडि़त व्‍यक्ति को बात करने और निगलने में होती है परेशानी।
  • ऐसा व्‍यक्ति अवसादग्रस्‍त भी हो सकता है।

एमियोट्रोफिक लेटरल सेरोसिस अथवा एएलएस (Amyotrophic Lateral Sclerosis or ALS) को लाऊ गेहरिग के नाम से भी जाना जाता है। मोटर न्‍यूरॉन से जुड़ी इस बीमारी के बारे में लोगों का ध्‍यान आइस बकैट चैलेंज के जरिये आकर्षित हुआ। आखिर यह बीमारी यह क्‍या।

एएलएस एक ऐसी बीमारी है जो मस्तिष्‍क की कुछ खास कोशिकाओं पर हमला करती है। इसके साथ ही इस बीमारी का आघात रीढ़ की हड्डी पर भी होता है। इससे मांसपेशियों की मूवमेंट पर असर पड़ता है। इसलिए इस बीमारी से पीडि़त व्‍यक्ति को मांसपेशियों में अकड़न और झटके महसूस होते हैं। वह हाथों, टांगों, पैरों और टखनों में कमजोरी महसूस करता है। इसके साथ ही इस बीमारी से पीड़ित व्‍यक्ति के लिए बोलने और यहां तक कि निगलने में भी परेशानी होती है। लेकिन, उसकी सुनने, सूंघने, स्‍वाद और स्‍पर्श जैसी संवेदी इंद्रियां काम करती रहती हैं।

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क्‍या है एएलएस

अगर आप इस बीमारी के नाम को तोड़कर बोलें तो Amyotrophic Lateral Sclerosis में अंग्रेजी अक्षर 'ए' का अर्थ ग्रीक भाषा में नकारात्‍मक अथवा 'ना' होता है। मयो (myo) का अर्थ मांसपेशियां और पौष्टिकता होता है। इसका अर्थ निकला मांसपेशियों में किसी प्रकार का पोषण न होना। और बिना किसी पोषण के मांसपेशियां सही प्रकार से काम नहीं कर पातीं। लेटरल (lateral) का अर्थ है रीढ़ की हड्डी का इलाका। यह वह हिस्‍सा होता है जहां नर्व कोशिकायें होती हैं। जब यह स्थिति उत्‍पन्‍न होने लगती है, तो मांसपेशियां सख्‍त हो जाती हैं।

आपके शरीर में मौजूद मोटर न्‍यूरॉन नष्‍ट होने शुरू हो जाते हैं। और ऐसी परिस्थिति में वे मांसपेशियों के फाइबर्स को आवेगी संवेदनायें नहीं भेज पाते। इस कारण मांसपेशियों का मूवमेंट प्रभावित होती है। एएलएस से पीडि़त व्‍‍यक्ति को शुरुआती रूप से बाजुओं, टांगों, बोलने में, निगलने में या सांस लेने में परेशानी हो सकती है। आपकी मांसपेशियां इसलिए काम करना बंद कर देती हैं, क्‍योंकि उन्‍हें मस्तिष्‍क के मोटर न्‍यूरॉन्‍स से संकेत मिलने बंद हो जाते हैं। इस बीमारी से पीडि़त व्‍यक्ति को देखने पर आप उसमें शारीरिक रूप से बड़े बदलाव महसूस कर पायेंगे। जिन मांसपेशियों का हम पहले जिक कर चुके हैं वे व्‍यर्थ और छोटे होने लगते हैं। इसका असर यह होता है कि आपके अंग पतले नजर आने लगते हैं।

कारण

एएलएस में आपके मूवमेंट को नियंत्रित करने वाली नर्व कोशिकायें धीरे-धीरे मरने लगती हैं। तो आपकी मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं और धीरे-धीरे बेकार हो जाती हैं।

पांच से दस फीसदी मामलों में एएलएस अनुवांशिक होता है। बाकी अन्‍य मामलों में यह किसी को भी हो सकता है।

शोधकर्ता एएलएस के कई संभावित कारणों की जांच कर रहे हैं, जिनमें -

जीन उत्परिवर्तन

कई जीन उत्‍परिवर्तनों के कारण अनुवांशिक एएलएस हो सकता है। यह देखने में गैर अनुवांशिक एएलएस की ही तरह होता है।

केमिकल असंतुलन

एएलएस से पीडि़त लोगों में आमतौर पर ग्‍लूटेमेट नामक रसायन का स्‍तर अधिक होता है। यह रसायन मस्तिष्‍क में संदेश वाहक के तौर पर काम करता है। और स्‍पाइनल फ्लूड के पास की नर्व कोशिकाओं में भी यह मौजूद होता है। इस रसायन की अधिकता विषाक्‍ता पैदा करती है।


रोग प्रतिरोधकता की अनियमिततता

कई बार किसी व्‍यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता शरीर की सामान्‍य कोशिकाओं पर ही हमला करने लगती है। इससे नर्व कोशिकाओं की मौत हो जाती है।

प्रोटीन को सही प्रकार से नहीं संभाल पाना

जब शरीर प्रोटीन को सही प्रकार नहीं संभाल पाता है, तो इससे शरीर में इन प्रोटीनों की असामान्‍य मात्रा जमा हो जाती है। इससे नर्व कोशिकाओं की मौत हो जाती है।

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बचने के उपाय

दुर्भाग्‍य की बात यह है कि क्‍योंकि इस बीमारी के बारे में बहुत अधिक जानकारी नहीं है, इसलिए अभी तक इससे बचने के उपायों के बारे में भी अधिक जानकारी नहीं है।

 

जोखिम कारक

अनुवांशिकता

पांच से दस फीसदी लोगों को यह बीमारी विरासत में मिलती है। जिन लोगों को एएलएस होता है उनके बच्‍चों को यही बीमारी होने का खतरा 50 से 55 फीसदी होता है।

उम्र

एएलएस आमतौर पर 40 से 60 बरस के लोगों को प्रभावित करती है।

सेक्‍स

65 वर्ष की आयु से पहले पुरुषों को यह बीमारी होने का खतरा महिलाओं की अपेक्षा थोड़ा ज्‍यादा होता है। 70 की उम्र के बाद यह अंतर समाप्‍त हो जाता है।

कुछ लोगों को यह बीमारी कई अन्‍य पारिस्थितिजन्‍य कारणों से भी हो सकती है।

स्‍मोकिंग

सिगरेट पीने से एएलएस होने का खतरा धूम्रपान न करने वालों के मुकाबले दो गुना होता है। आप जितने ज्‍यादा बरस सिगरेट पीने में लगाते हैं यह बीमारी होने का खतरा आपको उतना ही अधिक होता है। धूम्रपान छोड़ने के बाद आपको यह बीमारी होने की आशंका कम हो जाती है।


लैड के संपर्क में आना

कुछ ऐसे प्रमाण भी आए हैं जिसमें बताया गया है कि कार्यस्‍थल पर सीसे यानी लैड की मात्रा अधिक होने पर एएलएस होने की आशंका भी बढ़ जाती है।

सैनिक सेवायें

एक हालिया शोध में यह बताया गया है कि सेना में काम करने वाले लोगों को एएलएस होने की आशंक अधिक होती है। हालांकि इसके पीछे की क्‍या वजह है यह अभी साफ नहीं है। लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि खास धातुओं और चीजों के संपर्क में आने के कारण यह हो सकता है।


आइस बकेट चैलेंज

सोशल मीडिया पर इन दिनो आइस बकेट चैलेंज काफी चलन में है। दुनिया भर की नामी हस्तियां इन दिनों इस चैलेंज का ले रही हैं। वे अपने ऊपर बर्फ का ठंडा पानी डालकर यह चैलेंज ले रहे हैं। आप इंटरनेट पर ऐसी तमाम हस्तियों के वीडियो देख सकते हैं। एएलएस आइस बकेट चैलेंज वास्‍तव में एक ऐसा कार्यक्रम है जिसमें एएलएस एसोसिएशन की ओर से इस बीमारी के प्रति सोशल मीडिया के जरिये अमेरिका में जागरुकता फैलाने का काम किया जा रहा है। और फिलहाल सोशल मीडिया के जरिये यह सारी दुनिया में वायरल हो रहा है।

यह चैलेंज इस प्रकार है कि जिस व्‍यक्ति को चैलेंज मिला होता है उसे 24 घंटे के भीतर आइस बकेट अपने ऊपर उढ़लेते हुए दिखाने का वीडियो सोशल मीडिया पर डालना पड़ता है। यह सब करने से पहले उन्‍हें चैलेंज स्‍वीकार करने के बारे में बताना पड़ता है। जो व्‍यक्ति चैलेंज स्‍वीकार कर लेता है उसे एएलएस एसोसिएशन के दस डॉलर दान करने होते हैं और इस चैलेंज से इनकार करने वाले को 100 डॉलर का हर्जाना देना होता है।

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