अनिद्रा क्या है और इससे कैसे बचें

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Dec 26, 2012
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Quick Bites

  • पूरी नींद आए बिना न सोने जाएं।
  • अपना सोने का कमरा साफ रखें।
  • व्‍यायाम करें इससे मिलेगी मदद।
  • अपना व्‍यवहार बदलने से होगा लाभ।

 

नींद न आना भी कई बीमारियों की जड़ है, यदि ठीक प्रकार से नींद न आए तो दिनभर सिर भारी रहना, उबासियां आना, जी न लगना आदि चीजें होती रहती हैं। रात को नींद समय से और ठीक प्रकार से आए व सोते समय किसी प्रकार का मानसिक तनाव न रहे, इस बात का विशेष ध्‍यान रखना चाहिए।


अनिद्रा, इन्‍सोमिनया या उन्‍िनद्र रोग कोई मामूली बीमारी नहीं है। ऐसी समस्‍या किसी के भी जीवनकाल में कभी भी हो सकती है। फिज़िशियन और साइकालाजिस्ट के अनुसार अनिद्रा आज बहुत ही आम बीमारी है। विशेषज्ञों की मानें तो यह अपने आप में कोई बीमारी नहीं है बल्कि अंतनिर्हित व्यवहार समस्या का एक उदाहरण है। शोधों के अनुसार इस तरह की व्यवहारिक समस्याओं का कारण शहरों में बदलती जीवनशैली भी है। इनसोमनिया की बीमारी बहुत सी साइकोसोमैटिक परेशानियां जैसे डीप्रेशन, घबराहट, आत्मबल की कमी जैसी परेशानियों को जन्म देता है।

 

इनसोमनिया को समझना बहुत ही ज़रूरी है क्योंकि ठीक तरीके से नींद ना आने से बहुत सी दूसरी बीमारियां भी हो जाती हैं। अनिद्रा इस बात पर भी निर्भर करता है कि एक फेज़ कितने समय तक रहता है।

prevention of insomania

अनिद्रा के प्रकार


टांजिएण्ट इनसोमनिया

यह कुछ दिनों से कुछ हफ्तों तक रहता है और 3 हफ्तों से ज़्यादा समय तक नहीं रहता।


क्रानिक इनसोमनिया 

यह तब होता है जब व्यक्ति में कुछ परेशानियां पायी जाती हैं जैसे सोने में परेशानी होना। कई रातों तक जागने के बाद सोना। मरीज़ यह सोच कर परेशान रहता है कि उसकी नींद पूरी नहीं हुई है।

 

टांजिएण्ट इनसोमनिया के कारण

तनाव या किसी प्रकार का बदलाव होना। टेम्पररी इन्सोमनिया कई दूसरे कारणों से भी हो सकता है जैसे बहुत काम करना ,बहुत घूमना ,वातावरण में बदलाव। इन स्थितियों मे व्यक्ति को किसी चिकित्सा की ज़रूरत नहीं होती।

 

क्रानिक इनसोमनिया के कारण

  • ऐसी स्थिति में मरीज़ को नींद बिलकुल नहीं आती। सोते वक्त व्यक्ति को नींद नहीं आती। ऐसा लम्बे समय तक होता है। ऐसी स्थिति में दवाएं लेना ज़रूरी हो जाता है।
  • बहुत सी दूसरी समस्याएं जैसे एलर्जी, आर्थराइटिस ,हृदय से जुड़ी बीमारियां ,हाइपरटेंशन और बहुत सी अन्य बीमारियां भी इस बीमारी का कारण हो सकती हैं।
  • एण्टी डिप्रेसेंट और कार्डियक ड्रग्स इस बीमारी में साइड एफेक्ट उत्पन्न कर सकते हैं।

 

इनसोमनिया से बचने के तरीके


बिहेवियर अप्रोच

अनिद्रा से बचाव मरी पर भी निर्भर करता है कि वह किस प्रकार से अपने आप को आराम दे सकता है। इस तरह के बदलाव हर उम्र के मरीज़ों के लिए दवा से ज्‍यादा प्रभावी होते हैं।

insomania

स्टिमुलस पर नियंत्रण

सोने तभी जायें जब आपको पूरी तरह से नींद आ जाये।

 

रिलैक्सेशन थेरेपी

इस तकनीक से शारीरिक तनाव और परेशानी से आराम मिलता है।


काग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी

इस चिकित्सा के अनुसार व्यक्ति को किसी भी निगेटिव सोच से बचाया जाता है और उसे स्वस्थ्य नींद लेने के कुछ तरीके बताये जाते हैं।


व्यायाम

इनसोमनिया से बचने के लिए व्यायाम भी एक अच्छा उपाय है।


लाइट थेरेपी

तेज़ रोशनी से आप तंद्रा से बचते हैं और इससे आपको दिन में नींद नहीं आती।


साइकोथेरेपी

साइकालाजिस्ट की मदद से इन्सोमनिया के भावुक कारणों पर नियंत्रण पाया जा सकता है।

 

कुछ स्थितियों में मरीज़ के लिए दवाएं लेना भी ज़रूरी हो जाता है लेकिन दवाएं भी सावधानी से लेनी चाहिए।

 

 

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