जानें क्या है कान का कैंसर

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jun 19, 2013
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कान में होने वाला कैंसर एक ट्यूमर के रुप में कान के अंदर व बाहर दोनों जगह पर हो सकता है। इन कैंसर की कोशिकाओं को चिकित्सीय भाषा में स्कावमस सेल कार्सीनोमा के नाम से भी जाना जाता है।

रोगी का कान चेक करता डॉक्टरअकसर कान के पास एक गांठ या त्वचा सी बन जाती है जो कि स्किन की समस्या ना होकर कैंसर की शुरुआत होता है। इस तरह की स्किन समस्याओं को बेसल सेल कार्सीनोमा व घातक मेलेनोमा के नाम से जाना जाता है। ये स्किन कैंसर के ही प्रकार होते हैं जो कान की त्वचा के पास होते हैं। कैंसर विशेषज्ञ, सर्जन व फिजिशयन यह पता लगाने में सक्षम होते हैं कि यह कोई आम त्वचा है या कैंसर पैदा करने वाला ट्यूमर है। 

 

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कान के कैंसर के प्रकार

ट्यूमर, कभी भी कान के एक हिस्से तक सीमित नहीं रहता है। यह कान के विभिन्न हिस्सों को प्रभावित कर सकता है लेकिन यह इस बात पर निर्भर करता है कि कैंसर किस प्रकार का है। कान के कैंसर का उपचार व लक्षण उसके प्रकार पर निर्भर करता है-

बाह्य कान का कैंसर -बाह्य कान का कैंसर अल्सर के रुप में विकसित होता है। सामान्यत: इस तरह का कैंसर स्किन कैंसर के रुप में शुरु होता है लेकिन बढ़ते-बढ़ते यह कान तक पहुंच जाता है। कुछ मामलों में तो कान का कैंसर दिमाग तक भी पहुंच जाता है जो कि काफी खतरनाक स्थिति मानी जाती है। कान के बाहरी हिस्सों में फैले हुए कैंसर को सर्जरी के जरिए ठीक किया जा सकता है।    

इअर कैनल कैंसर-
इस तरह का कैंसर कान के कैनल पर देखा जा सकता है खासकर कैनल के बाहरी हिस्सों पर। इअर कैनल कैंसर कान के बाहरी आवरण के साथ अंदर के कैनल पर भी ट्यूमर के रुप में देखा जा सकता है। इअर कैनल कैंसर अगर शुरुआती अवस्था में हो तो सर्जरी के जरिए इसे ठीक किया जा सकता है।   

मिडिल इअर कैंसर-
कान में होने वाला कैंसर कान के बीच वाले हिस्से को भी प्रभावित कर सकता है। इस तरह का कैंसर काफी दर्दभरा होता है साथ ही कभी कभी इसमें कान से ब्लड भी आ सकता है। इस तरह के कैंसर के इलाज के लिए बायोप्सी व सर्जरी का सहारा लिया जाता है।

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लक्षण
कान के कैंसर के लक्षण उसके प्रकार के अनुसार ही दिखाई देते हैं। जानें क्या हैं वे लक्षण

  • अल्सर का बढ़ता रुप या ट्यूमर की शुरुआत
  • सूजन व गले पर गांठ
  • कान में दर्द
  • बालों का झड़ना
  • कान से अकसर ब्लड निकलना
  • कुछ मामलों में चेहरे पर पेरालाइसिस का होना
  • कान बजना
  • चक्कर आना

 

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कान के कैंसर के इलाज के लिए अपनाई जाने वाली चिकित्सा पद्धतियों के बारें में जानें-

सर्जरी

अकसर कान के कैंसर की शुरुआती अवस्था में सर्जरी का इस्तेमाल किया जाता है। सर्जरी के दौरन सर्जन कैंसर की कोशिकाओं व ऊतकों को काट कर निकाल देते हैं।  

रेडिएशन

अगर कैंसर की कोशिकाएं फैल रही हैं तो रेडिएशन का प्रयोग करना प्रभावकारी हो सकता है। रेडिएशन के दौरान निकलने वाली ज्यादा मात्रा में रेडियोएक्टिव किरणों की ऊर्जा कैंसर के सेल्स को खत्म कर देता है।  

कीमोथेरेपी

कीमोथेरेपी एक प्रकार का इलाज है जिसमें दवाओं के जरिए कैंसर की कोशिकाओं को खत्म किया जाता है जिससे कि वे कोशिकाएं शरीर के अन्य हिस्सों में ना फैल सकें। कीमोथेरेपी एक आखिरी विकल्प होता है कैंसर की कोशिकाओं को खत्म करने का।

 

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