ब्रेस्ट कैंसर के कारण

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
May 27, 2015
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Quick Bites

  • महिलाओं में होने वाले कैंसर में सबसे सामान्‍य है स्‍तन कैंसर।
  • स्‍तनों की नियमित जांच करते रहना है जरूरी।
  • कोई भी गांठ या आसामान्‍यता दिखने पर डॉक्‍टर से मिलें।
  • सही समय पर इलाज से इस बीमारी का इलाज है संभव।


यह माना जाता है कि  फेफड़ों के कैंसर के अलावा एक और भयावह रोग है जो एक हद से ज्यादा बढ़ जाने के बाद  औरतों  के लिए जानलेवा भी हो सकता है वह है स्तन का कैंसर। (हालांकि यह मर्दों को भी अपना शिकार बना सकता है) लेकिन अगर आप बच भी गए  तो भी इसकी कीमत आपको चुकानी पड़सकती है और वह  है कैंसर से ग्रस्त स्तन की बलि देकर, जिससे कि आपके आकर्षक व्यक्तित्व पर असर पड़ सकता है। 


स्तन का कैंसर क्या होता है?


जब स्तन के किसी एक दायरे में  कोशाणु की अनियंत्रित बढ़ोतरी होती है तो उसका नतीजा होता है स्तन का कैंसर।  आम तौर से आपका शरीर एक रोज़मर्रा की दिनचर्या के हिसाब से कार्य  करता है, जिससे कि सुन्न पड़े और पुराने कोशाणुओं को अलग करके और नष्ट करके नए कोशाणुओं को जन्म देता है ताकि आपका शरीर सुचारू रूप से चलता रहे। लेकिन हालांकि कैंसर के रोगियों के शरीर में नए कोशाणुओं को जन्म देने की क्षमता तो होती है, लेकिन पुरानी कोशाणुओं को नष्ट करने की शक्ति बाकी नहीं रहती।  और कोशाणुओं का इस तरह असाधारण रूप से बढ़ने से उस ग्रस्त दायरे मेंएक सूजन या फोड़े की रचना होती है। इसे ट्यूमर भी कहते हैं।


क्या स्तन कैंसर घातक हो सकता है?


यह एक गलत धारणा है की स्तन का कैंसर जानलेवा नहीं हो सकता है। यह बेशक जानलेवा होता है अगर सही समय पर इसे पहचानकर इसका इलाज नहीं किया  गया या  फिर कैंसरयुक्त कोशाणुओं  को को असीमित रूप से बढ़ने से रोका नहीं गया। प्रारंभीक अवस्था में फोड़ा यानी कि ट्यूमर  काफी सीमा तक सौम्य यानी कि बीनाइन  होता है मतलब कि हानि पहुँचाने वाला नहीं होता। सच पूछा जाए तो यह कैंसरयुक्त भी नहीं होता। ऐसे फोड़े यानि कि ट्यूमर हानि रहित दिखते हैं और काफी धीमी गति से बढ़ते हैं और अपनी बढ़ोतरी उसी दायरे तक सीमित रखते हैं जहाँ से यह प्रारंभ हुए थे, मतलब कि यह फैलते नहीं हैं जिससे कि इनका इलाज करना आसान  होता है। कुछ फोड़े यानि कि ट्यूमर, असाध्य यानि कि मलाईनेन्ट  साबित होते हैं मतलब की ऐसे फोड़े जो आपके शरीर के लिए  हानिकारक साबित होते हैं और कैंसरयुक्त भी होते हैं।    ऐसे फोड़े यानि कि ट्यूमर द्रुतगति से बढ़ते हैं और इनके अन्दर शरीर में फैलने की प्रबल क्षमता होती है।  जब कैंसर अपने प्रारंभिक यानि कि मौलिक  दायरे से दूर शरीर के अन्य हिस्सों फैलने लगते हैं तो उसे मेंटास्टिक ब्रेस्ट कैंसर  कहते हैं। अगर इसका सही समय पर सही इलाज नहीं किया गया तो यह जानलेवा साबित हो सकता है, वर्ना ऐसे भी कई लोग हैं जो इसके नुकसान से बच गए हैं।


स्तन कैंसर होने के कारण


लेकिन जैसा कि पहले बताया गया है, कि न सिर्फ औरतें बल्कि मर्द भी स्तन कैंसर का शिकार हो सकते हैं, लेकिन ऐसे उदहारण या केसस  कुछ ज्यादा नज़र नहीं आते। यह कैंसर ज़्यादातर औरतों में ही पाया जाता है और इसी वजह से आपकी लैंगिकता इस मर्ज़ का मुख्य कारण होती है। और फिर उम्र भी एक वजह होती है इस बीमारी की; बढती उम्र के साथ साथ इस कैंसर के होने का खतरा भी बढ़ जाता है

इसके अलावा अगर आपके मासिक धर्म यानी कि पिरिअड्स समय से पहले ही शुरू हो गए थे, या या देरी से बंद हुए थे तो भी आपमें इस रोग के होने का खतरा कुछ हद तक बढ़ जाता है।  और यह भी देखा गया है कि आपकी जींस  भी इस कैंसर के होने की अहम् वजह बन सकते हैं। जो लोग म्यूटेशन ऑफ बीआरसीऐ 1 और बीआरसीऐ 2 जींस के बदलाव के रोग से ग्रसित होते हैं उनमे इस कैंसर के होने का ख़तरा 80 प्रतिशत बढ़ जाता है।  


 
स्तन के कैंसर के प्रकार



दक्टल कारसिनोमा एक आम प्रकार का स्तन कैंसर है जो कि  80 प्रतिशत महिलायों में पाया जाता है। ये कैंसर उन नलिकाओं में शुरू होता है जो कि माँ के दूध को दूध पैदा करने वाली ग्रंथियों से माँ के स्त्नग्र यानि कि निप्पल्स  की तरफ ले जाते हैं। इसका आगे का विभाजन डकटल कार्सिनोमा इन सीतू  में होता है, मतलब कि यह कैंसर या तो नलिकाओं तक ही सीमित  रहता है या फिर आक्रामक भी हो सकता है जिससे कि कैंसर शरीर के अन्य हिस्सों में फ़ैल जाता है।  
लोब्यूलर कारसिनोमा दूसरा आम तरह का कैंसर होता है जो कि उन लोबेस यानी कि परलिकाओं में जन्म लेता  है जहाँ माँ का दूध बनता है। ये कैंसर स्तन कैंसर से पीड़ित 10 प्रतिशत महिलायों में पाया जाता है। इसका आगे भी  विभाजन होता है लोब्यूलर कारसिनोमा इन सीतू में जहाँ ऐसा कैंसर उन  लोब्स यानि कि परलिकाओं तक ही सिमित रहता है।  असल में इन सीतू अवस्था कैंसर से पूर्व की प्रारम्भिक अवस्था होती है जिसकी समय पर पहचान और  चिकित्सा होने से इस रोग से ग्रसित रोगी के बचने के संयोग बहुत ज्यादा होते हैं। इनवेसिव लोब्यूलर कारसिनोमा दूसरी तरह का लोब्यूलर  कारसिनोमा होता है जिसमे कैंसर लोब्यूल्स से परे आसपास के ढांचों और अंगों को प्रभावित करता है।


इनफ्लैमेटरी ब्रेस्ट कैंसर कुछ अन्य  विरले क़िस्म के स्तन के कैंसर होते हैं,  और ये बहुत ही आक्रामक किस्म का कैंसर होता है जो कि द्रुतगति से शरीर के अन्य हिस्सों में फैलता है। इस प्रकार के  कैंसर में फोड़े यानि कि ट्यूमर वगैरह जैसे आम लक्षण नहीं  नज़र आते, बल्कि त्वचा शुष्क, लाल, जाड़ी और पपडीदार  ज़रूर हो जाती है।
पैगेट डिज़ीज़ ऑफ़ निप्पल एक और किस्म का स्तन कैंसर है जिसमे त्वचा शुष्क यानि कि खुजलीवाली हो जाती है।
इस रोग की समय पर पहचान और समय पर चिकित्सा आपका जीवन बचा सकता है।ॉ

 

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Image Source - Getty Images

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