स्‍वस्‍थ गर्भावस्‍था के लिए जरूरी है विटामिन युक्‍त आहार का सेवन

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Apr 28, 2011
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Quick Bites

  • आंखों को स्वस्थ रखने के लिए जरूरी विटामिन है विटामिन-ए।  
  • विटामिन-बी6 गर्भवती महिलाओं में रक्त की कमी को दूर करता है।
  • फोलिक एसिड बच्चे के शरीर और नसों के विकास में सहायक।  
  • मछली, दूध, अण्डे में अधिक मात्रा में पाया जाता है विटामिन डी।

आमतौर पर महिलाओं को परिवार का पोषक माना जाता है लेकिन जब महिलाएं गर्भवती होती हैं, तो इन्हें पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। अकसर महिलाएं परिवार की देखभाल करते-करते खुद के प्रति उदासीन हो जाती है, नतीजन वे बीमार पड़ने लगती है।


essential vitamins for pregnant women
गर्भावस्था में पौष्टिक आहार के साथ-साथ कई और पोषक तत्वों की आवश्यकता पड़ती है, जिनमें से एक है विटामिन। आइए जानते है गर्भावस्था में आवश्यक विटामिन कौन-कौन से हैं और गर्भावस्था आहार में कौन-कौन से विटामिन की आपूर्ति, कैसे की जा सकती है।

 

गर्भावस्था में आवश्यक विटामिन

'विटामिन ए'

विटामिन ए गर्भवती महिला एवं गर्भस्थ शिशु की आंखों को स्वस्थ रखने के लिए जरूरी विटामिन है। यह विटामिन शरीर को न सिर्फ रोगों से बचाता है, बल्कि यह गर्भ में पल रहे बच्चे के शरीर के विकास के साथ-साथ उसकी ग्रन्थियों के निर्माण में भी सहायक है। यह मुख्यतः फल, संतरा, गाजर, हरी सब्जियों, मांस-मछली, दूध, मक्खन अण्डा इत्यादि में पाया जाता है।

'विटामिन बी'

विटामिन बी कई रूपों में उपलब्ध है। मसलन, विटामिन बी गर्भावस्था में भोजन पचाने, भ्रूण का विकास करने, गर्भवती महिला के स्तनों में दूध बनाने और प्रतिरोधक क्षमता इत्यादि को बढ़ाता है। यह आमतौर पर अनाज, गेहूं, चने की दाल, मीट में अधिक पाया जाता है।

 

'विटामिन बी2'

विटामिन बी2 यानी राइयोफलेविन गर्भावस्था में दिमाग का विकास करने और इम्यून सिस्टम बढ़ाने में मदद करता है। विटामिन बी अनाज, अण्डे, गेहूं, हरी सब्जी, दूध और मीट में अधिक मात्रा में होता है।

 

'विटामिन बी6'

विटामिन-बी6 गर्भवती महिलाओं में रक्त की कमी को दूर करता है। यह सामान्यतः गेहूं, पनीर, बीज वाली सब्जियों, अनाज, मीट और अंडे में पाया जाता है।

 

'विटामिन बी12'

विटामिन बी12 गर्भवती महिला के शरीर के रक्त में लाल कणों को जुटाने में मदद करता है व नए कण भी बनाता है। यह न सिर्फ शरीर को स्वस्‍थ रखता है, बल्कि बच्चे की नसों के विकास में भी सहायक है। यह विटामिन अण्डे, दूध, पनीर, और मीट-मछली में अधिक मात्रा में उपलब्ध है।

 

'फोलिक एसिड'

फोलिक एसिड गर्भावस्था में बच्चे के शरीर और नसों का विकास करता है। गर्भवती महिलाएं यदि फोलिक एसिड का सेवन नहीं करती तो उन्हें रीढ़ की हडि्डयों के रोग और दिमागी संतुलन संबंधित रोग उत्पन्न होने का खतरा बना रहता है। फोलिक एसिड हरी पत्तेदार सब्जियों और बीजदार सब्जियों में पाया जाता है।

 

'विटामिन डी'

शरीर में कैल्शियम की मात्रा बढ़ाने के लिए विटामिन डी की आवश्यकता होती है। विटामिन डी धूप से मिलता है। वैसे तो गर्भवती महिलाएं भोजन के माध्यम से भी विटामिन डी की पूर्ति कर सकती हैं लेकिन धूप से विटामिन डी लेना अधिक फायदेमंद रहता है। विटामिन डी शरीर में बैक्टीरिया को मारने वाले स्वस्थ कणों का निर्माण करता है। मुख्यतः विटामिन डी मछली, दूध, अण्डे आदि में अधिक मात्रा में पाया जाता है।

 

'विटामिन के'

विटामिन-के से बहते खून को रोका जा सकता है। यदि कभी गर्भवती स्त्री को कोई घाव या चोट लग जाती है तो विटामिन-के से रक्त स्राव रक्त को रोका जा सकता है। विटामिन-के हरी पत्तेदार सब्जियों में अधिक मात्रा में पाया जाता है।

 

'विटामिन सी'

यह विटामिन शरीर को रोगों से लड़ने की क्षमता प्रदान करता है यानी इम्यून सिस्टम को शक्तिशाली बनाने में मदद करता है। विटामिन सी खट्टे फलों, आंवला, रसभरी, हरी सब्जी, आलू तथा टमाटर आदि में अधिक मात्रा में पाया जाता है, लेकिन पिछले कुछ शोधों में पाया गया है कि विटामिन सी की अधिक मात्रा में सेवन करने पर होने वाले बच्चे के भविष्य को खतरा हो सकता है। इसीलिए विटासिन सी से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन डॉक्टर की सलाह से करना चाहिए।

 

'विटामिन ई'

विटामिन ई शरीर की कार्यक्षमता को बढ़ाता है। लेकिन विटामिन ई की अधिकतम मात्रा न सिर्फ गर्भवती मां को बल्कि गर्भस्थ शिशु को भी नुकसान पहुंचा सकती है। इसीलिए डॉक्टर की सलाह के बिना विटामिन ई का सेवन करने से बचना चाहिए। 'विटामिन-ई' गेहूं, चना, हरी सब्जियों, मछली का तेल तथा दालों आदि में अधिक मात्रा में पाया जाता है।


इस तरह से गर्भवती महिला गर्भावस्था आहार में विटामिन, कैल्शियम और प्रोटीन को सही-सही मात्रा में लेकर न सिर्फ अपना बल्कि अपने होने वाले बच्चे की देखभाल भी कर सकती है।



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