घबराहट दूर करने के लिये करें आसान ब्रीदिंग एक्सरसाइज

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Apr 09, 2015
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Quick Bites

  • तनाव व घबराहट से छुटकारा दिलाता है ब्रीदिंग एक्सरसाइज।
  • सिरदर्द, गर्दन में अकड़न, कमर का दर्द को भी करती है।
  • ब्रीदिंग एक्सरसाइज फेफड़ों की मांसपेशीयां मजबूत बनती है।
  • टॉक्सिंस को डी-टॉक्सिफाई कर देती हैं ब्रीदिंग एक्सरसाइज।

आज का दौर बदलाव का दौर है, हर तरफ दौड़ लगी है। और इस तेज दौड़ती जिंदगी में हम अकसर तनाव और घबराहट के शिकार बन जाते हैं। सोते-जागते, खाते-पीते हर समय दिमाग में कोई न कोई उधेड़बुन चलती ही रहती है। जिसके चलते सिरदर्द, गर्दन में अकड़न, कमर का दर्द, मोटापा और थकान जैसी समस्याएं अक्सर हो जाती हैं। तनाव व उधेड़बुन से लोगों को बेचैनी और घबराहट की समस्या भी होने लगती है। ऐसे में ब्रीदिंग एक्सरसाइज की मदद से तनाव व घबराहट से छुटकारा पाया जा सकता है।

 

Breathing Exercises in Hindi

 

दरअसल जब हम सांस लेते हैं तो सांस के साथ-साथ हमारे शरीर में पहुंचने वाली ऑक्सीजन खून के माध्यम से शरीर की कोशिकाओं को पोषण देती है। और जब हम सही ढ़ग से ब्रीदिंग करते हैं तो शरीर स्वस्थ रहता है। यही कारण है कि का ब्रीदिंग एक्सरसाइज का महत्व सालों पहले से प्राणायाम के रूप में जाना व अपनाया गया है। यही नहीं केवल गहरी सांस लेने और छोड़ने से ही सेहत को कई लाभ होते हैं। ब्रींदिग के महत्व के चलते ही ध्यान के वक्त डीप ब्रीदिंग को महुत अहम स्थान दिया जाता है।

 

Breathing Exercises in Hindi

 

डीप ब्रीदिंग करना बेहद आसान है, इसे करने के लिए सबसे पहले सीधे बैठ जाएं और एक हाथ को छाती पर रखें और दूसरे हाथ को पेट पर रख लें। बस इसके बाद आपको गहरी सांस लेनी और फिर धीरे-धीरे छोड़नी होती है। गहरी सांस लेने और छोड़ने से श्वसन क्षेत्र पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है, इससे फेफड़ों की मांसपेशीयां मजबूत बनती है। बिगड़े खान-पान और आलसी जीवन से शरीर में कई प्रकार के टॉक्सिन पैदा हो जाते हैं। ब्रीदिंग एक्सरसाइज से शरीर को मिलने वाली शुद्ध आक्सीजन इन टाक्सिंस को डी-टॉक्सिफाई कर देती हैं। ब्रीदिंग एक्सरसाइज करने से हायपरटेंशन, थकान, सिरदर्द, घबराहट, नींद न आने जैसी कई समस्याओं से मुक्ति मिलती है।


रोडज़ा सुबह उठने के बाद बिस्तर छोड़ने से पहले करीब दस मिनट तक खूब सारी सांस भरें और फिर धीरे-धीरे इसे छोड़ें। सांस लेने और छोड़ने दोनों में बराबर समय लगायें। शुरुआत में यह करना थोड़ा मुश्किल लग सकता है, लेकिन एक बार नियम बन जाने व लाभ महसूस होने पर आप इस क्रिया को रोज़ बहुत आसानी से कर पायेंगे।


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