जानें क्‍या हैं एंडोमेट्रियोसिस के लक्षण, कारण और उपचार

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jul 07, 2016
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Quick Bites

  • एंडोमेट्रियोसिस गर्भाशय में होने वाली समस्‍या हैं।
  • गर्भधारण न कर पाने की यह मुख्य वजह है।
  • पीरियड्स में ज्‍यादा ब्‍लीडिंग और दर्द का कारण है।
  • शरीर के अन्य भागों में फैलने का कारण हो सकता हैं।

आज दुनिया भर में काफी संख्‍या में युवतियां एंडोमेट्रियोसिस की समस्या से जूझ रही हैं। और 25-30 आयुवर्ग की महिलाओं में पेट दर्द और गर्भधारण न कर पाने की यही मुख्य वजह भी है। इस समस्‍या के होने पर गर्भ (एंडोमेट्रियम) को ढकने वाली टिश्यूज ओवरीज या गर्भाशय के आसपास जैसी असामान्य जगहों पर विकसित होने लगती हैं। पीरियड्स के दौरान खून के गहरे थक्के ओवरीज में जमा होने लगते हैं और पेल्विक और आस-पास खून के धब्बे जमा हो जाते हैं, जिससे आंतें, ट्यूब्स और ओवरीज आपस में चिपक जाती हैं। यह खतरनाक हो सकता है क्योंकि इससे ट्यूब्स और ओवरीज को नुकसान पहुंचता है, जो इंफर्टिलिटी का कारण बन सकता है। समय पर इलाज के अभाव में पेल्विक में सूजन आ जाती है।

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क्‍या है एंडोमेट्रियोसिस

एंडोमेट्रियोसिस गर्भाशय में होने वाली समस्‍या हैं। जिसमें एंडोमेट्रियम टिश्यू से गर्भाशय के अंदर की परत बनती है। गर्भाशय की आंतरिक परत बनाने वाला एंडोमेट्रियम ऊतक में असामान्य बढ़ोत्तरी होने लगती है और वह गर्भाशय से बाहर फैलने लगता है। कभी-कभी तो एंडोमेट्रियम की परत गर्भाशय की बाहरी परत के अलावा अंडाशय, आंतो और अन्य प्रजनन अंगो तक भी फ़ैल जाती है। जिसे एंडोमेट्रियोसिस कहा जाता है। बढ़ी एंडोमेट्रियम परत की वजह से प्रजनन अंगो जैसे फेलोपियन ट्यूब, अंडाशय की क्षमता पर असर पड़ने लगता है। एंडोमेट्रियोसिस महिलाओं में पीरियड्स के दौरान अधिक ब्‍लीडिंग और दर्द का भी कारण होता है। इसके कारण महिलाओं को भारी परेशानी उठानी पड़ती है, वहीं दूसरी और यह इंफर्टिलिटी का कारण भी बन सकता है। यह समस्‍या किसी बाहरी संक्रमण के कारण न होकर शरीर की आंतरिक प्रणाली में कमी के कारण होता है।


एंडोमेट्रियोसिस की समस्‍या पीरियड्स से जुड़ी होता है। असामान्य रूप से बढ़ा एंडोमेट्रियल टिश्‍यु अपना कार्य सामान्य तौर पर ही करता है और हर पीरियड के बाद इन टिश्‍यु की परत टूट जाती है। इन्हीं परतों के टूटने से ब्‍लीडिंग होती है। क्योंकि गर्भाशय के अलावा अन्य अंगो में इस परत के टूटने से निकला ब्‍लड बाहर नहीं निकल पाता इसलिए उस स्थान पर घाव के साथ-साथ परत के कारण अंग जुड़ने लगते है। यह स्थिति बहुत दर्द कारक होती है और इसमें ब्‍लीडिंग बहुत ज्‍यादा होती है। इसके अलावा एंडोमेट्रियोसिस के अंडाशय तक फैलने से उस हिस्‍से पर सिस्ट भी बन जाते हैं।


एंडोमेट्रियोसिस के लक्षण  

  • इसके प्राथमिक लक्षणों में पीरियड्स के दौरान तेज पेल्विक दर्द शामिल है। कुछ महिलाओं में मांसपेशियों में खिचाव की परेशानी आती है। जिससे यह दर्द पीरियड्स में होने वाले दर्द से अधिक होता है और समय के साथ दर्द और भी तेज होने लगता है। इसके अलावा एंडोमेट्रियोसिस के लक्षण में यह सब भी शामिल है।
  • पीरियड्स से पहले मांसपेशियों में खिचाव और दर्द शुरू हो सकता है, जो पीरियड्स के बाद भी बना रहता है और शरीर के निचले हिस्से को पूरी तरह जकड़ लेता है। ऐसी स्थिति में, मल या मूत्र त्याग में भी समस्या आती है।
  • इंफर्टिलिटी की जांच के दौरान, कई महिलाओं में एंडोमेट्रियोसिस का पता चलता है।
  • सेक्स संबंध बनाने के दौरान, या बाद में दर्द होना एंडोमेट्रियोसिस में आम बात है।
  • बहुत अधिक ब्‍लीडिंग वाले पीरियड्स या 2 पीरियड्स के बीच ब्‍लीडिंग होना।
  • इसके अलावा थकान, कब्ज़, चक्कर आना और मितली खासकर पीरियड्स के दौरान, इस समस्‍या के अन्य लक्षण हैं।

शरीर के प्रजनन अंगो के दर्द को ही एंडोमेट्रियोसिस का लक्षण नहीं मानना चाहिए। इस समस्‍या के शुरुआती चरण में कुछ महिलाओं ने तेज दर्द महसूस किया जबकि समस्‍या के गंभीर चरण पर आने के बावजूद भी एंडोमेट्रियोसिस से ग्रस्त महिलाओं को कम दर्द हुआ। कभी-कभी एंडोमेट्रियोसिस को प्रजनन अंगो की अन्य बीमारियां जैसे पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिसीज, ओवेरियन सिस्ट या इर्रिटेबल बॉउल सिंड्रोम मान लिया जाता है, इसलिए किसी निष्कर्ष से पहले डॉक्टर से जांच जरूर करवायें।


एंडोमेट्रियोसिस के कारण

  • प्रजनन अंगों और केविटीज की परत एम्ब्रोनिक कोशिकाओं से बनती है। जब उस परत का छोटा हिस्सा एंडोमेट्रियल टिश्यू में बदल जाता है तो एंडोमेट्रियोसिस की समस्‍या होती है।  
  • पीरियड्स के दौरान होने वाली ब्‍लीडिंग, एंडोमेट्रियल टिश्‍यु की परत के टूटने से होती है। लेकिन अगर यहीं ब्‍लड शरीर से बाहर निकलने के बजाए डिम्ब नली से पेल्विक केविटी में जमा होने लगता है, तो उस स्थिति को रेट्रोग्रेड मेंस्ट्रुएशन कहते है।
  • हिस्टेरेक्टॉमी, सी-सेक्शन जैसी सर्जरी के बाद हुए घाव में एंडोमेट्रियल कोशिकाएं जुड़ सकती हैं।
  • ब्‍लड सेल्‍स या टिश्यू के तरल, एंडोमेट्रियल कोशिकाओं के शरीर के अन्य भागों में फैलने के कारण भी बन सकते हैं।
  • इम्‍यून सिस्‍टम में समस्या आने से, शरीर गर्भाशय से बाहर बढ़ने वाले एंडोमेट्रियल टिश्यू को बाहरी तत्व मानकर नष्ट करने लगते है।

इन कारणों के अलावा कभी-कभी एंडोमेट्रियल कोशिकाएं पेल्विक परत से चिपक कर बढ़ने लगती हैं। परत को गहरा करते हुए यह हर बार पीरियड्स के दौरान टूटकर ब्‍लीडिंग का कारण बनती है।

  • किसी अन्य बीमारी के लिए ली जा रही दवाएं, जो पीरियड में रुकावट करें या पहले हुए पेल्विक संक्रमण, अनुवांशिक कारणों और यूटेराइन समस्याओं से भी एंडोमेट्रियोसिस होने का खतरा बढ़ जाता है।
  • गर्भधारण के समय, अस्थाई रूप से और मेनोपॉज के बाद हमेशा के लिए एंडोमेट्रियोसिस की समस्या खत्म हो जाती है। मेनोपॉज के बाद अगर आप एस्ट्रोजन या किसी अन्य प्रकार की हॉर्मोन थेरेपी लेती हैं तो भी एंडोमेट्रियोसिस की समस्‍या होने की संभावना रहती है।

 

एंडोमेट्रियोसिस का उपचार

केस हिस्ट्री, टेस्‍ट और सोनोग्राफी से एंडोमेट्रियोसिस की समस्‍या का पता लगाया जा सकता है। कई बार लैप्रोस्कोपी की मदद से भी इस बीमारी का पता लगाने के साथ ही एक ही समय पर इसका इलाज भी कर दिया जाता है। इसके लिए पेट पर 2-3 छोटे कट लगाकर कैमरा और अन्य उपकरण की मदद से पेल्विक के अंदर एंडोमेट्रियॉटिक हिस्सों को हटा या लेजर की मदद से इसे जला दिया जाता है। हालांकि सर्जरी के बाद इसके फिर से उभरने की आशंका बनी रहती है और कुछ मरीजों को मल्टीपल सर्जरी की जरूरत पड़ती है।

मेडिकल ट्रीटमेंट से आर्टिफिशियल मेनोपॉज के जरिये एंडोमेट्रियॉसिस को रोका जा सकता है। इसके लिए हार्मोंनल दवाएं या महीने में एक इंजेक्शन काफी होता है। हालांकि यह पक्का इलाज नहीं है और इसके साइड इफेक्ट हो सकते हैं। इसके अलावा एंडोमेट्रियॉसिस की समस्‍या से ग्रस्‍त युवा मरीज बच्चा चाहता हैं, तो इसके लिए आईयूआई और आईवीएफ जैसी स्पेशल ट्रीटमेंट मौजूद हैं। अगर मरीज की उम्र ज्यादा है और कई सर्जरी हो चुकी हैं, तो गर्भाशय और ओवरीज निकालकर हिस्टेरेक्टॉमी ही इसका सबसे बेहतर इलाज है।

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Image Source : natural-fertility-info.com

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