महिलाओं में बोन डेंसिटी के मायने

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Oct 10, 2014
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Quick Bites

  • ऑस्ट‍ियोपोरोसिस से ग्रस्त लोगों की अस्थ‍ियां जल्दी टूट जाती हैं।
  • महिलाओं को ऑस्टियोपोरोसिस होने का खतरा अधिक होता है।
  • उम्र का इस बीमारी के होने में अहम किरदार होता है।
  • बोन डेंसिटी का पता लगाने के लिए कई जांच मौजूद हैं।

महिलाओं को यूं ही कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। और यह बात भी जाहिर है कि महिलाओं को ऑस्ट‍ियोपोरोसिस और हड्डियां टूटने की आशंका अधिक होती है। इसके साथ ही उन्हें स्तन कैंसर, यूट्रेराइन कैंसर और ओवेरियन कैंसर होने का खतरा भी होता है। इसके साथ ही कई महिलाओं में कूल्हा टूटने का खतरा भी लगातार बना रहता है।

अलग-अलग उम्र और क्षेत्र की लड़कियों और महिलाओं को अलग प्रकार के ऑस्टियोपोरोसिस और अस्थियों संबंधी अन्य परेशानियां होने का खतरा बना रहता है। उदाहरण के लिए बुजुर्ग महिलाओं और भारोपीय महिलाओं को अन्य महिलाओं की अपेक्षा ऑस्ट‍ियोपोरोसिस होने की आशंका अध‍िक होती है।

Bone Density in Women in Hindi
मैनोपॉज यानी काम करें शुरू

मेनोपॉज के कारण महिलाओं में ऑस्ट्रोजन के स्तर में गिरावट होने लगती है, जिससे अस्थियां कमजोर होने लगती हैं। कुछ महिलाओं में अस्थियों को यह नुकसान दूसरी महिलाओं की तुलना जल्दी होता है। और ऑस्ट‍ियोपोरोसिस होने के दो महत्त्वपूर्ण कारक होते हैं।

मेनोपोज के दौरान बोन डेंसिटी यानी अस्थि घनत्व का कम होना: मेनोपॉज शुरू हो आप उससे पहले ही अपनी हड्डियों  का खयाल रखना शुरू कर दें। इससे आपको ऑस्ट‍ियोपोरोसिस होने की आशंका कम होगी।

मेनोपॉज तक पहुंचने के बाद हड्‍ड‍ियां कमजोर होना : कुछ महिलाओं की अस्थियां दूसरी महिलाओं की अपेक्षा जल्दी कमजोर होने लगती हैं। दरअसल, मेनोपॉज के पहले पांच से सात बरसों में ही महिलाओं का अस्थि घनत्व 20 फीसदी तक कम हो जाता है। जिन महिलाओं में अस्थ‍ि घनत्व तेजी से कम होता है, उन्हें ऑस्ट‍ियोपोरोसिस होने का खतरा अध‍िक होता है।

ऑस्ट्रोजन का सेवन है एक विकल्प

ऑस्ट्रोजन थेरेपी यानी ईटी डॉक्टर उन महिलाओं को करवाने की सलाह देते हैं, जिनमें मेनोपॉज के लक्षण, जैसे हॉट फ्लैशेज नजर आते हैं। कई बार ऑस्ट्रोजन को प्रोगेस्टेरॉन हॉर्मोन थेरेपी यानी एचटी के साथ मिलाकर भी दिया जाता है। ये थेरेपी न केवल आपके मेनोपॉज लक्षणों को न‍ियंत्रित करती हैं, बल्कि हड्ड‍ियों को होने वाले नुकसान से भी बचाती हैं।

ईटी या एचटी हर महिला के लिए उपयोग की जाने वाली पद्धतियां नहीं हैं। इस पद्धतियों से स्तन कैंसर, स्ट्रोक, हार्ट अटैक, रक्त के थक्के जमना और संज्ञानात्मक समझ में कमी आने का खतरा भी होता है। अगर आप ये थेरेपी लेने का विचार कर रही हैं, तो आपको इनकी लंबाई के साथ-साथ नफे नुकसान के बारे में भी अपने डॉक्टर से जरूर बात करनी चाहिये।


किशोरियां नियंत्रित कर सकती हैं अपनी अस्थि घनत्व

 
ऑस्टियोपोरोसिस के कारण हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और आमतौर पर यह समस्या अधिक उम्र की महिलाओं को होती हैं। वह भी महिलाओं में यह समस्या अध‍िक देखने में आती है। लेकिन, जब आपकी उम्र बढ़ रही हो, तो आप इस बीमारी को रोक सकती हैं। जब आप जवान हों, तो आपके पास कई ऐसे रास्ते होते हैं, जिनसे आगे चलकर इस बीमारी के संभावित खतरे को कम किया जा सकता है। इस उम्र में आप अपनी हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए कई ऐसे काम कर सकती हैं, जो अध‍िक उम्र में शायद संभव न हों। इसके लिए आपको पर्याप्त मात्रा में कैल्श‍ियम और विटामिन डी का सेवन करना चाहिये। संतुलित आहार और व्यायाम भी आपके लिए जरूरी है। इसके साथ ही धूम्रपान जैसी आदतों से दूर रहकर भी आप इस समस्या से बचकर रह सकती हैं।

जवानी में ऑस्ट‍ियोपोरोसिस

हालांकि, यह बुजुर्गों की बीमारी मानी जाती है, लेकिन ऐसा नहीं है कि 20-30 या चालीस की उम्र की महिलायें, जिन्हें अभी मेनोपॉज न हुआ हो, को ऑस्ट‍ियोपोरोसिस नहीं हो सकता। हालांकि मेनोपॉज से पहले ऑस्टियोपोरोसिस होने का खतरा कम होता है, लेकिन कुछ जवां महिलाओं में कम अस्थ‍ि घनत्व होने की आशंका होती है, जो आगे चलकर ऑस्ट‍ियोपोरोसिस होने की आशंका को बढ़ा देती है।

कई बार किसी बीमारी  या दवा के दुष्प्रभाव के कारण भी अस्थ‍ि घनत्व कम हो सकता है। जिससे जवान महिलाओं को भी ऑस्ट‍ियोपोरोसिस हो सकता है। इस प्रकार के ऑस्ट‍ियोपोरोसिस को सेकेण्डरी ऑस्ट‍ियोपोरोसिस कहा जाता है। कई बार अनजान कारणों से भी जवान महिलाओं को ऑस्ट‍ियोपोरोसिस हो जाता है। इसे इडियोपेथिक ऑस्ट‍ियोपोरोसिस कहा जाता है।

जवान महिलाओं में अस्थि घनत्व का निदान

  • ऑस्ट‍ियोपोरोसिस और अस्थि घनत्व को बनाये रखने के लिए कई बातों का ध्यान रखा जाता है- जैसे
  • आपका चिकित्सीय इतिहास
  • शारीरिक जांच
  • बोन मिनरल डेंसिटी की जांच
  • प्रयोगशाला जांच
  • एक्स-रे

Understanding Bone Density in Hindi

बोन डेंसिटी टेस्टिंग

कूल्हे, रीढ़ और अन्य हड्ड‍ियों में मौजूद अस्थ‍ि ही वास्तव में अस्थ‍ि घनत्व के बारे में पता लगाने में मदद करती है। नियमित तौर पर देखा जाए, तो मेनोपॉज हासिल कर चुकी महिलाओं और 50 वर्ष की आयु से अध‍िक के पुरुषों को जांच करवाकर इस बात का पता लगवाना चाहिये कि कहीं उन्हें ऑस्टियोपोरोसिस तो नहीं। जवान महिलाओं को यह जांच करवाने की सलाह तग दी जाती है, जब उनकी हड्ड‍ियां आसानी से टूटने लगें। इसके साथ ही इस बात का भी खयाल रखा जाता है कि कहीं जवां महिला किसी ऐसी दवा का सेवन तो नहीं कर रही, जिसके दुष्प्रभाव से उसकी अस्थ‍ियां कमजोर हो रही हों।

बोन डेंसिटी टेस्ट डीएक्सए मशीन पर किया जाता है। डीएक्सए का अर्थ है ड्युअल एक्स-रे एबसोरपटियोमेट्री। इसकी जांच के नतीजों में एक जेड स्कोर आता है और एक टी स्कोर। टी स्कोर मेनोपॉज हासिल कर चुकी महिलाओं और 50 वर्ष से अधिक आयु के पुरुषों के निदान के बारे में जानकारी देता है। लेकिन इसमें मेनोपॉज से पहले की महिलाओं के बारे में कोई जानकारी नहीं होती। वहीं जेड स्कोर आपकी उम्र में सामान्य बोन डेंसिटी क्या होनी चाहिये के बारे में जानकारी देता है।

जवां महिलाओं में ऑस्ट‍ियोपोरोसिस का निदान

जिन महिलाओं को अभी मेनोपॉज नहीं हुआ होता, उन्हें ऑस्ट‍ियोपोरोसिस की दवायें आमतौर पर नहीं दी जातीं। ऐसे में डॉक्टर अन्य संभावित कारणों की तलाश करता है, जिनके कारण किसी महिला को यह समस्या हुई हो सकती है।

आखिरी बात: महिलाओं और पुरुषों में ऑस्ट‍ियोपोरोसिस के लक्षण अलग होते हैं, लेकिन यह बीमारी दोनों के लिए ही घातक है। समय रहते आप अपने डॉक्टर से बात कर इस बीमारी के ईलाज के बारे में बात जरूर करें। साथ ही नियमित जांच भी करवाते रहें। स्वस्थ जीवनशैली इस बीमारी के खतरे को कम करने में सहायक होती है।

 

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