भारत में क्षय रोग का हमला

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jan 12, 2012
Comment

हेल्‍थ संबंधी जानकारी के लिए सब्‍सक्राइब करें

Like onlymyhealth on Facebook!

भारत में क्षय(टीबी) का उपद्रव एक नए विषाणु के घातक रुप के साथ बढ़ने की संभावना मुंबई में पायी गयी हैं। मुंबई में माहिम के हिंदुजा अस्पताल में टीबी के 12  रोगी रोगियों में एक विषाणु पाया गया है, जो पूरी तरह से औषध प्रतिरोधी (टीडीआर) कहा गया है। रोगियों के तरल पदार्थ के नमूनों में विषाणु अलग पाये गये थे।

इस विषाणु का बहु-दवा प्रतिरोधी(एमडीआर - टीबी), और अत्याधिक दवा प्रतिरोधी(EDR-टीबी) किस्मों के बाद टीबी के अत्याधुनिक और सबसे गंभीर दवा के प्रतिरोधी होने का निदान हुआ है। TDRTB का पहले ईरान में भी निदान हुआ था और भारत दूसरा देश हैं,जहाँ इसकी सूचना मिली हैं। भारत में हर साल करीब 4 लाख लोग इस रोग से मरने का अनुमान हैं, नये तौर पर विकसित दवा का प्रतिरोध मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में विशेष रूप से स्वास्थ्य अधिकारियों की समस्याओं को जटिल कर सकता हैं।

टीडीआर-टीबी का निदान हुए 12  रोगियों में से, 10 मुंबई से हैं, और अन्य दो में से एक रत्नागिरी और उत्तर प्रदेश से हैं। इन रोगियों में से एक की पहले ही मृत्यू हो गयी हैं। मुंबई के हिंदुजा अस्पताल की प्रयोगशाला को टीबी रोगियों में विषाणु के, दवा प्रतिरोध के परीक्षण के लिए डब्ल्यूएचओ द्वारा प्रमाणित किया गया है। अस्पताल के डॉ. झारीर उडावाला ने कहा है, कि विषाणु के उत्परिवर्तन का सार्वजनिक स्वास्थ्य पर बहुत गंभीर प्रभाव पड़ता है। उन्होंने फुफ्फुसीय टीबी से पीड़ित रोगियों में टीडीआर-टीबी के मामलों को अलग करने का काम शुरू कर दिया हैं।

मुंबई के नगर निगम, बीएमसी के एक वरिष्ठ सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारी के मुताबिक, रोगियों में दवा का प्रतिरोध विकसित होने का कारण, रोगियों द्वारा टीबी के वायरस से संक्रमित होने के बाद दवा उपचार के 6 से 9 महीने का कार्यकाल को पूरा नहीं किया जाना हैं। टीबी के विषाणु का प्रभाव 2 महीने के भीतर कम होता हैं और उस के बाद रोगी दवा लेने बंद कर देते हैं। इसके परिणामस्वरुप कुछ टीबी के कीटाणु स्थायी रहते है और गुणाकार में बढ़ना शुरू करते हैं।
 
साल 2009 में 1.7 लाख लोगों की टीबी से मरने की सूचना मिली, और नवीनतम दवा प्रतिरोध से इस संख्या में इजाफा होने की संभावना को उच्च कर दिया हैं। 1992 में खोजे गये MDR-टीबी से लेकर EDR-टीबी की तरह कुछ साल पहले पाये गये टीबी तक, टीडीआर-टीबी, विषाणू विरोधी उपचार के विकल्पों से टीबी का एक पूरा चक्र पूरा हुआ लगता है। डाँ.उडावाला के अनुसार, विषाणू के नवीनतम रूप से पीड़ित रोगियों को राहत के लिए केवल कठोर शल्य चिकित्सा और दवाओं से प्रदान किया जा सकता है। उनकी टीम के निष्कर्ष को संयुक्त राज्य अमेरिका के एक सहकर्मी की समीक्षा की पत्रिका में प्रकाशित किया गया है।

 

Write a Review
Is it Helpful Article?YES3 Votes 13245 Views 0 Comment
प्रतिक्रिया दें
disclaimer

इस जानकारी की सटिकता, समयबद्धता और वास्‍तविकता सुनिश्‍चित करने का हर सम्‍भव प्रयास किया गया है । इसकी नैतिक जि़म्‍मेदारी ओन्‍लीमाईहैल्‍थ की नहीं है । डिस्‍क्‍लेमर:ओन्‍लीमाईहैल्‍थ पर उपलब्‍ध सभी साम्रगी केवल पाठकों की जानकारी और ज्ञानवर्धन के लिए दी गई है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्‍सक से अवश्‍य संपर्क करें। हमारा उद्देश्‍य आपको रोचक और ज्ञानवर्धक जानकारी मुहैया कराना मात्र है। आपका चिकित्‍सक आपकी सेहत के बारे में बेहतर जानता है और उसकी सलाह का कोई विकल्‍प नहीं है।

संबंधित जानकारी
  • सभी
  • लेख
  • स्लाइडशो
  • वीडियो
  • प्रश्नोत्तर