सिफलिस के उपचार में कारगर है पेनिसिलिन का इंजेक्‍शन

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Nov 20, 2013
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Quick Bites

  • सिफलिस रोग का कोई भी घरेलू उपचार नहीं है।
  • पहले व दूसरे चरण की चिकित्‍सा होती है आसान।
  • रोगी के कूल्‍हे में लगता है पेनिसिलिन का इंजेक्‍शन।
  • पेनिसिलिन के विकल्‍प के तौर पर है टेट्रासाइक्‍लीन।

सिफलिस तीन चरणों में फैलने वाला संक्रामक रोग है। इसका कोई भी घरेलू उपचार नहीं है। सिफलिस के पहले और दूसरे चरण का उपचार आसान होता है, लेकिन तीसरे चरण के उपचार में लंबा समय लग सकता है।

treatment of syphilis
इस रोग का उपचार शुरू करने से पहले व्‍यक्ति के रक्‍त की जांच जरूरी होती है, जिससे यह पता चलता है कि यह बीमारी कौन से चरण में पहुंच चुकी है। इसके पहले और दूसरे चरण का उपचार लगभग एक जैसा होता है, लेकिन तीसरे या अंतिम चरण की चिकित्‍सा अलग होती है।

चिकित्‍सा

आमतौर पर सिफलिस के लक्षणों का देर से पता चलता है, इसलिए इसका उपचार भी देर से हो पाता है। यदि स‍िफलिस की पहचान जल्‍द हो जाती है, तो इसका इलाज एंटीबायोटिक से किया जा सकता है। शुरुआती अवस्‍था में पेनिसिलिन की एक खुराक से ही इसका उपचार किया जा सकता है। जब यह रोग शुरुआती चरण को पार करके तीसरे चरण में पहुंच जाता है, तो एंटीबायोटिक की अधिक खुराक उपचार में कारगर होती है।

पहले व दूसरे चरण का इलाज

किसी व्‍यक्ति में रक्‍त जांच के बाद यदि यह पता चलता है कि उसके शरीर में सिफलिस के वायरस पहले या दूसरे चरण में हैं, तो उपचार के लिए पेनिसिलिन की एक खुराक काफी होती है। पेनिसिलिन की खुराक रोगी के कूल्‍हे में इंजेक्‍शन से दी जाती है। कुछ लोगों को पेनिसिलिन से एलर्जी भी हो जाती है, यदि आपको भी ऐसी कोई समस्‍या है, तो डॉक्‍टर से परामर्श करें।

तीसरे चरण का उपचार

तीसरे चरण में पहुंचने पर सिफलिस रोगी के हार्ट व नर्वस सिस्‍टम पर भी विपरीत असर डाल सकता है। इसके तीसरे चरण का उपचार पहले या दूसरे चरण से ज्‍यादा समय तक चलता है। रक्‍त जांच में तीसरे चरण की पुष्टि होने पर यह कहना मुश्किल होता है कि इलाज में कितना समय लगेगा। इसमें उपचार के लिए पेनिसिलिन के ज्‍यादा इंजेक्‍शन लगाए जाते हैं। तीसरे चरण के उपचार बाद भी रोगी को प्रत्‍येक वर्ष अपनी रक्‍त जांच करानी चाहिए।

उपचार में ध्‍यान रखने वाली बातें

यदि आपको पेनिसिलिन से एलर्जी है, तो इसकी जानकारी डॉक्‍टर को दें। पेनिसिलिन की बजाय टेट्रासाइक्‍लीन या डॉक्सिसाइक्‍लीन का इस्‍तेमाल भी उपचार के लिए किया जा सकता है। उपचार के दौरान घाव सूखने तक नए पार्टनर से शारीरिक संबंध बनाने से बचना चाहिए। नए पार्टनर से सेक्‍स करने से पहले आपको यह ध्‍यान देना चाहिए कि उसको इन्‍फेक्‍शन तो नहीं है। यदि आपको जरूरी लगे तो आप जांच भी करा सकते हैं। ध्‍यान देने वाली बात यह है कि सिफलिस का कोई भी घरेलू उपचार नहीं है।

सिफलिस से बचाव

शारीरिक संबंध बनाने के लिए हमेशा कंडोम का यूज करना चाहिए। हालांकि कंडोम पूरी तरफ से सिफलिस के इन्‍फेक्‍शन से बचाव में कारगर नहीं है, कयोंकि इसके घाव कई बार ऐसे हिस्‍से में होते हैं, जिन्‍हें कंडोम से कवर नहीं किया जा सकता। फिर भी कंडोम काफी हद तक सिफलिस से बचाव करता है।

पेनिसिलिन का इंजेक्‍शन लगने के बाद रोगी का शरीर एंटीबॉडीज से लड़ने में मदद करता है। ये एंटीबॉडीज इंजेक्‍शन लगने बाद शरीर में कुछ महीनों या साल तक भी रह सकते हैं। इसलिए समय-समय पर रक्‍त की जांच करानी जरूरी होती है। हर गर्भवती महिला को अपने रक्‍त की जांच करानी चाहिए।

 

 

 

 

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