स्वाइन फ्लू: कारण, लक्षण और चिकित्‍सा

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Dec 24, 2009
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Quick Bites

  • श्वसन तंत्र से जुड़ी बीमारी है स्वाइन फ्लू।
  • खांसने या छींकने पर फैलते हैं संक्रमण।
  • सिर में भयानक दर्द हैं इसका प्रमुख लक्षण।
  • स्वाइन फ्लु के लिए टीका विकसित किया गया है

स्वाइन फ्लू एक सांस से जुड़ी बीमारी वाला वायरस है जो छीकने या इसके वायरस के संपर्क में आने से फैलती है। किसी व्यक्ति में स्वाइन फ्लू की पहचान करना बेहद जरूरी होता है। क्योंकी इसकी सही समय पर पहचान ना होने पर उसे गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही उसके संपर्क में आकर अन्य व्यक्तियों में भी यह संक्रमण फैल सकता है। स्वाइन फ्लू का उपचार सामान्य फ्लू के जैसे ही किया जाता है, बुखार, कफ, और ठंड के बचाव के लिये दवाए दी जाती हैं, कुछ लोगों को शायद विषाणुरोधक  दवाए (एंटीवायरल) या उपचार की ज़रुरत पड सकती है। चलिये जाने कैसे होता है स्वाइन फ्लू का उपचार।

 

स्वाइन फ्लू होने पर डॉक्टर आपको बुखार व कफ के लिए ‘टेमीफ्लु’ या ‘रेलेंजा’ जैसी एंटीवायरस दवाईयां दे सकता है। इन दवाईयों को रोग शुरू होने के 2 दिन के अंदर ही ले लेना चाहिए क्योंकि जितनी जल्दी ये दवाईयां शुरू होंगी उतना ही लाभ होगा। आमतौर पर ये दवाईयां 5 दिनों के लिए दी जाती हैं। वैसे ये दवाईयां फ्लू को पूरी तरह खत्म नहीं करतीं लेकिन ये बीमारी की अवधि व लक्षणों को कम करने के अलावा न्यूमोनिया जैसी बीमारी के खतरे को भी कम करती हैं।


पेरासिटामोल 

स्वाइन फ्लु के अधिकतर मरीज़ सही इलाज से ठीक हो जाते हैं। उपचार के अंतर्गत पर्याप्त आराम, बुखार और ठंड को ठीक करने के लिए पेरासिटामोल दिया जाता है। कभी कभी बच्चों को अतिरिक्त उपचार भी दिया जाता है। लेकिन यहां पर यह सलाह दी जाती है कि कोई भी उपचार शुरू करने से पहले चिकित्सक की सलाह ले लें ! 16 साल से कम उम्र के बच्चों को ऐस्पिरिन से जुडे हुए दवा उपचार का प्रयोग न करें !

 

 

Treatment of Swine Flu

 

 

विषाणुरोधक  दवाएं (एंटीवायरल) 

वायरल संक्रमण से बचाव के लिए दो दवाईयां ओसेल्टामविर (टेमीफ्लु) और ज़नामिविर (रेलेंज़ा) का उपयोग स्वाइन फ्लु को ठीक करने के लिए दवा उपचार के तौर पर किया जाता है ! विषाणु रोधक दवाएं फ्लु को पूर्ण रूप से ठीक नहीं करती हैं, लेकिन कुछ लक्षणों को कम करने में सहायक होते हैं !  जैसे

 

 

  • लक्षणों और बीमारी की अवधि को एक दिन तक कम करने में सहायता करते हैं !
  • कुछ लक्षणों को कम करते हैं !
  • न्युमोनिया के जैसी गम्भीर बीमारी की जटिलता के खतरे को कम करते हैं !

 

 

अति गम्भीर बीमारी से ग्रस्त मरीज़ों में जैसे ही स्वाइन फ्लु के लक्षण दिखाई देते हैं, वैसे ही जितनी जल्दी सम्भव हो, विषाणु रोधक दवाएं तुरंत शुरू कर देना चाहिए! इस समूह के अंतर्गत निम्नलिखित लोग आते हैं !

 


  • दीर्घकालिक फेफडों या श्वाश प्रश्वाश सम्बन्धी बीमारी
  • दीर्घकालिक दिल की बीमारी (जन्मजात या जन्म के बाद)
  • दीर्घकालिक गुर्दे की की बीमारी (जैसे कि गुर्दा खराब होना)
  • दीर्घकालिक लीवर की बीमारी (सिरोसिस, हेपाटेटिस)
  • दीर्घकालिक दिमाग की बीमारी (जैसे कि पार्किंसन)
  • ईम्यूनोलस्प्रेशन (या तो किसी एक बीमारी के कारण, दवा के कारण, या फिर कोई उपचार के कारण)
  • मधुमेह की बीमारी (टाईप 1 या 2)

 

 

 

Treatment of Swine Flu

 

 

प्रतिजैविक (ऐन्टिबाइआटिक)

किसी भी प्रकार के फ्लू से पैदा होने वाली सबसे साधारण गंभीर स्थिति श्वास प्रश्वास क्षेत्र का दूसरे दर्जे का जीवाणु संक्रमण है, जैसे कि ब्रांगकाइटस (वायुमार्ग का संक्रमण) या न्यूमोनिया । ये संक्रमण अधिकतर लोगों में प्रतिजैविक (ऐन्टिबाइआटिक) द्वारा पूरी तरह से ठीक हो जाते हैं, लेकिन कभी कभी ये संक्रमण जानलेवा भी बन सकते हैं।

 

टीकाकरण

स्वाइन फ्लु के लिए टीका विकसित किया गया है ! यह टीका ब्रिटेन और अमेरिका जैसे देशों में उपलब्ध है, लेकिन अभी तक भारत में उपलब्ध नहीं है! अमेरिका में जिन लोगों को स्वाइन फ्लु का टीका लेने की सलाह दी गई है, वे हैं –

 

 

  • गर्भवती महिलाएं : चूंकि गर्भवती महिलाओं की स्थिति में जटिलता की सम्भावना काफी रहती है, और साथ ही यह भी माना जाता है कि उसे टीका देकर उस गर्भस्थ शिशु तक भी सुरक्षा पहुंचाई जा सकती है, जिसे 6 महीने की उम्र तक टीका नहीं दिया जा सकता है!

 

  • 6 महीने की उम्र से कम उम्र के शिशुओं के पारिवारिक सदस्य या उनको संभालने वाले लोग -  चूंकि गर्भवती महिलाओं को संक्रमण की सम्भावना काफी रहती है, और साथ ही यह भी माना जाता है कि उसे टीका देकर उस गर्भस्थ शिशु तक भी सुरक्षा पहुंचाई जा सकती है, जिसे 6 महीने की उम्र तक टीका नहीं दिया जा सकता है!
  • शिशुओं के पारिवारिक सदस्य या उनको संभालने वाले लोग - चूंकि शिशुओं में संक्रमण की सम्भावना काफी रहती है, और साथ ही उसे 6 महीने की उम्र तक टीका नहीं दिया जा सकता है ! यह माना जाता है कि उस शिशु के आसपास रहनेवाले लोगों को टीका लगाने से संभवत: शिशु को वायरस का खतरा कम हो जाता है !
  • स्वास्थ्य सेवा तथा आपातकालीन सेवा के कर्मचारी गण - स्वास्थ्य सेवा तथा आपातकालीन सेवा के कर्मचारी गणों में संक्रमण की सम्भावना काफी रहती है ! साथ ही वे संक्रमित होने के बाद संभावित मरीज़ों को संक्रमित कर सकते हैं !

 

 

फ्लू से पीड़ित रोगी को नाक, कान, साइनस और छाती का कन्जेशन हो सकता है। ऐसे में इसके कारण दर्द भी हो सकता है। ‘एसिटेमिनोफेन‘ या ‘इबुप्रोफेन’ दर्द को कम करने में मदद कर सकती है लेकिन फिर भी आपके या आपके बच्चे के लिए कुछ भी उपचार लेने से पहले अपने चिकित्सक से संपर्क ज़रूर करें। 4 साल से कम उम्र के बच्चे को कोई कफ या ठंड के लिए दवा ना दें।

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