इमोशनल ईटिंग से कैसे बचें

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
May 22, 2014
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Quick Bites

  • सबसे पहले भोजन के लिए उकसाने वाले कारणों को पहचानें।
  • खुद पर विश्वास रखें कि आप इस आदत से लड़ सकते हैं।
  • स्वस्थ जीवनशैली अपनाने से भी होगा फायदा।
  • यह आदत एक दिन में ही नहीं जाएगी, इस बात को स्वीकारें।

भोजन के पीछे हर बार हमारी भूख नहीं होती। कई बार, सुकून, तनाव से मुक्ति और ईनाम भी हमें खाने को मजबूर करता है। अब यह बात दीगर है कि जज्बाती  होकर खाने से हमारी भावनात्मक समस्याओं का हल नहीं होता। आमतौर पर इससे परेशानी में इजाफा ही होता है। न केवल दिक्कत ज्यों की त्यों बनी रहती है, बल्कि हमें ओवरईटिंग को लेकर ग्लानि भी होती है। तो इमोशनल ईटिंग को पहचानना इससे मुक्ति पाने का पहला रास्ता है। आपको यह जानना होगा कि आख‍िर किन बातों से आपकी भूख अचानक बढ़ने लगती है।

emotional eating

इमोशनल ईटिंग को समझें

पेट भरा होने पर भी आप खुद को खाने से रोक नहीं पाते। भले ही पेट में जरा भी जगह न हो, लेकिन आइसक्रीम तो गपागप खा ही लेते हैं। इसका अर्थ है कि आप इमोशनल ईटिंग के श‍िकार हैं। इस दौरान आप अपनी पेट की भूख को नहीं, बल्कि उमड़ती भावनाओं को शांत करने के लिए खाते हैं। जश्न के तौर पर कभी-कभार पार्टी मनाने में कोई बुराई नहीं। इतना तो चलता है। लेकिन, हर बर गम, खुशी, गुस्सा, अकेलापन, थकान या ऊब होने पर फ्रिज की ओर लपकना, अच्छी आदत नहीं। इससे न केवल आपकी सेहत को नुकसान पहुंचता है, बल्कि साथ ही असल समस्या अनदेखी रह जाती है।


भावनात्मक भूख को भोजन नहीं मिटा सकता। बेशक, उस वक्त कुछ खाकर आपको सुखद अहसास हो जाएगा। लेकिन, खाने के लिए उकसाने वाली उन मानसिक संवेदनाओं का क्या। वे तो वहीं मौजूद हैं। और इसके बाद आप अनावश्यक कैलोरी उपभोग को लेकर ग्लानि से भर जाते हैं। आपको खुद पर गुस्सा आता है। आप पराजित महसूस करते हैं। आपको आभास होता है कि आपमें आत्मबल की कमी है। मूल कारण को समझे बिना यह समस्या खत्म नहीं हो सकती। वजन काबू करने के आपके तमाम प्रयास चंद मिनटों की जज्बाती कमजोरी से धरे के धरे रह जाते हैं।


इमोशनल ईटिंग को कैसे करें काबू


टिप-1 :  कारणों को जानें

लोग कई कारण से इमोशनल ईटिंग करते हैं। तो, सबसे पहले उन चीजों को पहचानें, जो आपको ईमोशनल ईटिंग के लिए उकसाती हैं। किन हालात, जगह अथवा भावनाओं के वशीभूत होकर हम खाने की ओर दौड़ते हैं। आमतौर पर नकारात्मक भावनाओं को नियंत्रित करने के लिए ही हम भोजन को इलाज मानते हैं, वहीं कई बार खुशी भी इसका कारण हो सकती है। लक्ष्य हासिल करने की खुशी में आप खुद को पार्टी देते हैं। और इन्हीं भावनाओं में बहकर आप चूक कर जाते हैं। तनाव, डर, अवसाद, खुशी, बोर होना, उत्तेजना या अन्य कई भावनाओं को शांत कराने के लिए आप भोजन का सहारा लेते हैं। कई बार सामाजिक दबाव में भी पेट भरा होने के बाद भी आप कुछ न कुछ खा लेते हैं।

 

एक डायरी बनायें

अपनी मनोदशा और उसके भोजन पर पड़ने वाले प्रभाव के लिए एक डायरी बनायें। जब कभी आपको लगे कि भावनायें आपको भोजन के लिए उकसा रही हैं, तो थोड़ा रुकिये और उन भावनाओं को लिख लीजिए। लिखिये कि आप क्या खाना चाहते थे और आपने क्या खाया। किस बात ने आपको दुखी या परेशान किया। खाने से पहले या बाद में आपने कैसा महसूस किया। खाते समय आपको कैसा अहसास हुआ। थोड़े दिनों में आप उन सब आदतों से रूबरू होंगे जिनके कारण आप अनावश्यक भोजन करते हैं। एक बार ये आदतें आपको पता चल जाएं, तो अगला कदम उनसे निपटने का है।


टिप -2 : भावनाओं को काबू करने का वैकल्पिक तरीका

अपनी भावनाओं को काबू करने का दूसरा तरीका खोजें। आपको यदि लगता है कि बिना भोजन के आप अपनी भावनाओं को शांत नहीं कर सकते, तो आगे का रास्ता बहुत मुश्क‍िल भरा होने वाला है। आमतौर पर आहार योजनायें इसलिए नाकाम होती हैं कि उनमें केवल पौष्ट‍िक तत्वों की बात की जाती है। भावनात्मक पक्ष अकसर अनदेखा रह जाता है। लेकिन, आपको अवचेतन में अपनी खाद्य आदतों को काबू करने का प्रयास करना होगा। यदि जज्बातों के उभार पर आप खुद को खाने से नहीं रोक पाते हैं, तो सारी पढ़ी-पढ़ाई जानकारी पानी में चली जाएगी। तो, अपनी भावनाओं को काबू करने के लिए आपको भोजन के विकल्प तलाशने होंगे।


क्या हैं विकल्प

यदि आप अवसादग्रस्त अथवा अकेले हैं, तो भोजन की बजाय अपने किसी दोस्त को याद करें। किसी ऐसे दोस्त को फोन करें जिससे बात करके आपको सुखद अहसास होता है। अपने पालतू जानवर के साथ खेलें। पुरानी तस्वीरें देखें।
यदि आप चिंतित हैं, तो अपनी नकारात्मक ऊर्जा को नाच या गाकर दूर करें। या फिर थोड़ी देर कहीं टहलने निकल जाएं।
यदि आप थके हुए हैं तो एक कप चाय का पियें। नहायें और आराम करें।
और यदि आप बोर हो रहे हैं, तो किताब पढ़ें या अपनी पसंदीदा कॉमेडी धारावाहिक देखें। ख‍िड़की खोलकर आसमान को देखें। कई रातों से आपने आकाश की ओर नहीं निहारा होगा। या फिर अपना पसंदीदा काम करें। जैसे गिटार बजायें, संगीत सुनें या फिर योग व ध्यान का सहारा लें।

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टिप 3- थोड़ा रुकें

ज्यादातर लोगों के भूख को काबू करना नामुमकिन होता है। वे स्वयं को असहाय महसूस करते हैं। जब खाने की लालसा होती है, तो सिवाय भोजन के कुछ नजर नहीं आता। आप नाकाबिले बर्दाश्त हालत में होते हैं। ऐसा लगता है कि सिर्फ भोजन ही आपको बचा सकता है। क्योंकि आपको अपने आत्मबल पर विश्वास नहीं होता, तो आपको लगता है कि आप यह जंग पहले ही हार चुके हैं। लेकिन, हकीकत इससे अलग है। कहानी अभी खत्म नहीं हुई है।


पांच मिनट का इंतजार

जब भी आपकी खाने की लालसा हावी होने लगे, तो थोड़ा रुकें। भोजन पर टूटने से पहले जरा इंतजार करें। इससे आपको थोड़ा वक्त मिलेगा। अपनी भूख से लड़ने के बारे में आप दूसरा रास्ता सोच पाएंगे। आप पांच मिनट रुकिये। यदि पांच मिनट ज्यादा लग रहे हों, तो एक मिनट से शुरुआत कीजिए। यह कतई मत सोचिये कि आप इस भूख को नहीं हरा सकते। मना करना बहुत मुश्‍किल होता है। लेकिन, थोड़ा इंतजार आपके लिए बहुत जरूरी है। इंतजार के बाद आप अपनी भावनात्मक परिस्थिति का आकलन करें। यदि इसके बाद भी खा लेते हैं, तो भी आपको अपनी आदत के बारे में बेहतर जानकारी होगी। और अगली बार आप इसका अच्छे से सामना कर पायेंगे।


टिप 4 : अच्छी आदतें अपनायें

शारीरिक रूप से स्वस्थ होने पर आपके लिए इन हालात से लड़ना आसान होता है। तो बेहतर है कि आप खुद को इस दिशा में आगे बढ़ायें। स्वस्थ जीवनशैली अपनाने से आप मानसिक रूप से भी स्वस्थ, शांत और एकाग्रचित्त रहते हैं। कहा जाता है कि स्वस्थ तन में ही स्वस्थ मन का वास होता है। यदि आप पहले से ही थके हुए और उदास रहेंगे, तो इमोशनल ईटिंग की आशंका अपने आप बढ़ जाएगी। तो, व्यायाम कीजिए, बेहतर नींद लीजिए और योग-ध्यान को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाइये।


जीने का अंदाज बदलें

व्यायाम और शारीरिक गतिविध‍ियों के लिए समय निकालें।  इससे आपको काफी फायदा होगा। इससे तनाव में भी कमी आती है। अपने लिए रोजाना 30 मिनट निकालें। इससे आप खुद को रिचार्ज महसूस करेंगे। दोस्तों और रिश्तेदारों से मिलें। थोड़े सामाजिक हो जाएं। सकारात्मक लोगों से मिलना आपका जीवनस्तर सुधारता है। और आप तनाव जैसी नकारात्मक भावनाओं से दूर रहते हैं। अच्छी नींद लें।  

इमोशनल ईटिंग को लेकर ग्लानि महसूस न करें। इसे समझें। जानें कि आखिर कौन सी बातें आपको ज्यादा खाने को मजबूर करती हैं। उनसे लड़ें। लगातार लड़ें। दृढ़ इच्छाशक्त‍ि के दम पर जीत आप ही की होगी।

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