प्‍यार को न लगे चिंता की नजर

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jun 21, 2013
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प्यार हो और फिक्र न हो, ऐसा कभी हुआ है? प्यार अगर एक दरिया है तो चिंता उसकी धारा। अब इस चिंता के आयाम अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन बिना चिंता किये प्यार है, शायद नहीं।

 

चिंता में नाखून चबाती लड़की

प्रेम के  खेल में ही बाजी दिल की लगती हो, लेकिन विचारों की ऊहापोह तो दिमाग में ही चलती रहती है। लेकिन, इस चिंता को इतना न बढ़ने दें कि यह आपके रिश्‍ते पर हावी होने लगे। अपने साथी को लेकर अगर आप किसी दुविधा में हैं तो इसका रास्ता बातचीत के जरिये निकलता है। आप चिंतित होकर कुछ नहीं कर पायेंगे।

हर किसी की ख्वाहिश होती है कि उसका प्यार उसके करीब रहे, लेकिन इस ख्वाहिश को डर में तब्दील कर लेना जायज नहीं। इससे बचना चाहिये। अगर आप भी इस राह पर चल निकले हैं, तो अब भी ठहर जाइए। इससे पहले कि बहुत देर हो जाए, जरा रुकिये और इन टिप्स को पढि़ये, जो आपको रिश्ते में मौजूद चिंता और फिक्र का सामना करने का रास्ता सुझाने में मदद करेंगी। हो सकता है कि इनमें से कोई सलाह आपके काम आ जाए और आप इस रोशनी की डोर थामे चिंता की इस अंधेरी गुफा से बाहर आ जायें।

 

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कारण पहचानें
आखिर आप चिंता में डूबे क्यों हैं। जरा सोचिये... दरअसल, कई बार हम बेवजह ही चिंता में डूबे रहते हैं। तलाशने पर भी कोई वजह नजर नहीं आती। लेकिन, किसी बात को लेकर आप दुविधा में हैं, तो बेहतर है कि अपने साथी से इस बाबत बात कर लें। उससे जानने की कोशिश करें कि क्या उसे भी इस तरह की चिंता ने घेर रखा है। और आखिर इस परेशानी से निकला कैसे जा सकता है। अगर आप ध्यान से एक-दूसरे की बात सुनेंगे और समझने का प्रयास करेंगे, तो बहुत सम्भव है कि रास्ता जरूर निकल आयेगा। चिंता के बादल छंट जाएंगे और प्यार का सूरज एक बार फिर अपनी रोशनी बिखेरने लगेगा।

किसी की सलाह लें

अगर आप सहज हों, तो किसी तीसरे व्यक्ति की मदद भी ली जा सकती है। ऐसे किसी इनसान की सलाह आपके बहुत काम आ सकती है, जो आपकी तरह किसी चिंता में नहीं है। वह आपकी मनोस्थिति के बारे में समझकर आपको सही राह दिखा सकता है। हो सकता है कि वो आपके हाथ में वो अनछुआ सिरा थमा दे जिस पर आपकी नजर ही न गयी हो। लेकिन, किसी को भी अपने रिश्ते में शामिल करने से पहले इस बात की पूरी तस्दीक कर लें कि वह शख्स काबिले ऐतबार हो।

खुद को तैयार रखें

करण पता लगने के बाद खुद को बुरी से बुरी परिस्थिति का सामना करने के लिए मानसिक रूप से तैयार रखें। सोचिये, उस परिस्थिति में आप कैसा बर्ताव करेंगे। इससे आपको हल तलाशने में मदद मिलेगी। एक बार अगर आप खुद को उन बुरे हालातों के लिए तैयार कर लेंगे, तो फिर कोई भी चीज आपको परेशान नहीं करेगी। वह परिस्थिति कोई भी हो सकती है। हो सकता है कि आपका ब्रेक-अप हो जाए। लेकिन, उस समय भावना का यह प्रलय आपको बहाकर ले जाए उससे पहले जरूरी है आप खुद को इसका सामना करने के लिए तैयार कर लें।

 

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दुनिया खत्म नहीं हुई है
चिंता का सामना करने के लिए ड्रग्स और अल्कोहल आदि का सहारा न लें। इससे आपकी समस्यायें सुलझने के बजाय और उलझ जाएंगी। इससे आपकी मानसिक शांति भी खत्म हो जाएगी। तो, अगर आप किसी भी परिस्थिति का सामना करना चाहते हैं, तो उसके लिए आपको मानसिक और शारीरिक रूप से फिट होना चाहिए। तो, खुद को कष्‍ट देकर किसी की सांत्वना पाना कोई समाधान नहीं। जनाब, वैरागी बनकर देवदास स्टाइल में जीना आपकी मुश्किलें आसान नहीं करेगा।

चिंता को दूर करें

कहना आसान है और करना बेहद मुश्किल। लेकिन, इस अंधेरी गुफा से बाहर निकलने का रास्ता आपको ही निकालना होगा। हर इनसान का चिंता से बाहर निकलने का अपना एक फॉर्मूला होता है। कुछ लोग योग और ध्यान के जरिये इस परेशानी से निकलते हैं, तो कुछ खुद को किसी और काम में व्यस्त रखने की कोशिश करते हैं। आपको भी अपने लिए कोई ऐसा ही वाजिब रास्ता निकालना होगा। दोस्तों के साथ वक्त बिताइये। कहीं घूमने निकल जाइये। कुछ भी ऐसा जो वाजिब हो और आपको सुकून देता हो।

अगर इसके बाद भी चिंता आपका दामन न छोड़े, तो किसी विशेषज्ञ की मदद लेने से हिचकें नहीं। उनकी सहायता से आपकी चिंता का समाधान हो सकता है। खुद को कुछ वक्त दीजिये। जिंदगी में परिवर्तन ही स्थिर है और आपका जीवन भी परिवर्तित हो ही जाएगा।

 

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