थायराइड द्विध्रुवी विकार को कैसे प्रभावित करता है

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Nov 16, 2012
Comment

हेल्‍थ संबंधी जानकारी के लिए सब्‍सक्राइब करें

Like onlymyhealth on Facebook!

thyroid didhruvi vikar ko kaise parbhavit karta hai

द्विध्रुवी विकार को गंभीर मानसिक बीमारी माना जाता है। यह बीमारी रिश्ते, करियर की संभावनाओं, अकादमिक प्रदर्शन को नुकसान पहुंचा सकती है, और यहां तक ​​कि यह थायराइड रोग के कारण आत्महत्या की प्रवृत्ति की संभावना को भी बढ़ावा देती है। द्विध्रुवी विकार असामान्य मूड परिवर्तन, ऊर्जा में उतार चढ़ाव, गतिविधि के स्तर और दैनिक कार्यों को पूरा करने की क्षमता को भी प्रभावित करती है।

[इसे भी पढ़े : थायराइड अल्‍सर से जुड़ी पांच बातें जानें]

 

द्विध्रुवी विकार
थायराइड की समस्याओं और मानसिक विकार के बीच सम्‍बन्‍धों के बारे में पहले से जानकारी थी। लेकिन हाल ही में हुए शोधों ने इसे और आसान बना दिया है। हालांकि, अभी इस क्षेत्र में काफी काम होना बाकी है। इसलिए, द्विध्रुवी विकार के कारण अब तक स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन शोधकर्ताओं और डॉक्टरों द्वारा अनुमान लगाया गया है कि यह अतिरिक्त न्यूरोट्रांसमीटर है जो रसायनों से भरपूर मस्तिष्क के कारण हो सकता है, और जो सोच, स्मृति और भावना में एक निर्णायक भूमिका निभाते हैं।

द्विध्रुवी विकार दो भागों में बांटा हुआ है, द्विध्रुवी प्रथम और द्विध्रुवी द्वितीय। मूड चेंज में द्विध्रुवी प्रथम चरम पर होता है जो कि समय पर एक प्रकार का पागलपन सदृश करता है, मूड चेंज में द्विध्रुवी द्वितीय विकार कम चरम में होता हैं, और जिसका अक्सर दवा से इलाज किया जा सकता है।

 

[इसे भी पढ़े : अतिसक्रिय थायराइड का इलाज कैसे करें]

 
द्विध्रुवी विकार में थायराइड की भूमिका

थायराइड ग्रंथि गर्दन में स्थित होती है और जो थायराइड हार्मोन, अर्थात्, T3 और T4 हार्मोन के स्राव के लिए जिम्मेदार होती है। ये हार्मोन न्यूरोट्रांसमीटर अधिनियम के रूप में आपके शरीर के चयापचय के लिए जिम्मेदार होता हैं। इसलिए, इसका एक व्यक्ति के मूड पर गहरा प्रभाव पड़ता है। यह भी पाया जाता है कि T3 थायराइड हार्मोन सिरोटोनिन के स्तर को प्रभावित करता है और डिप्रेशन का कारण बन सकता है जो  न्यूरोट्रांसमीटर के साथ जुडे हंसमुख मूड, T3 के निम्न स्तर हाइपोथायरायडिज्म के रूप में जाना जाता है। एक तरफ, अगर थायरायड T3 का अतिरिक्त उत्पादन करता है तो मरीज की दिल की दर, थकान, और उन्मत्त अवसादग्रस्तता व्यवहार में वृद्धि का अनुभव हो सकता है। जबकि दूसरी ओर अगर किसी का द्विध्रुवी विकार के लिए इलाज किया जा रहा है तो उसको थायराइड रोग की संभावना हो सकती है। लिथियम को हाइपोथायरायडिज्म का कारण जाना जाता है, और लिथियम को द्विध्रुवी विकार के उपचार का एक विकल्प माना जाता है। यही कारण है कि लिथियम उपचार के दौरान थायराइड परीक्षण की नियमित रूप से सिफारिश की जाती है।

द्विध्रुवी विकार का कोई निश्चित इलाज नहीं है, इसके उपचार के लिए सिर्फ लक्षण प्रबंधन और मूड स्थिरीकरण हैं। दवाओं और मनोचिकित्सा का एक संयोजन भी इसमें सबसे प्रभावी है।

 

Read More Article on Thyroid in hindi.

Write a Review Feedback
Is it Helpful Article?YES5 Votes 13997 Views 0 Comment
प्रतिक्रिया दें
disclaimer

इस जानकारी की सटिकता, समयबद्धता और वास्‍तविकता सुनिश्‍चित करने का हर सम्‍भव प्रयास किया गया है । इसकी नैतिक जि़म्‍मेदारी ओन्‍लीमाईहैल्‍थ की नहीं है । डिस्‍क्‍लेमर:ओन्‍लीमाईहैल्‍थ पर उपलब्‍ध सभी साम्रगी केवल पाठकों की जानकारी और ज्ञानवर्धन के लिए दी गई है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्‍सक से अवश्‍य संपर्क करें। हमारा उद्देश्‍य आपको रोचक और ज्ञानवर्धक जानकारी मुहैया कराना मात्र है। आपका चिकित्‍सक आपकी सेहत के बारे में बेहतर जानता है और उसकी सलाह का कोई विकल्‍प नहीं है।

संबंधित जानकारी
  • सभी
  • लेख
  • स्लाइडशो
  • वीडियो
  • प्रश्नोत्तर