थायराइड कैंसर के मरीजों को लेनी होगी कम क्षमता की दवा

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Oct 04, 2014
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thyroid medicine in hindiथॉयरायड कैंसर की सर्जरी कराने के बाद मरीजों को अब कम क्षमता की आयोडीन युक्त दवाएं लेनी होंगी। इस बारे मे अमेरिकन थॉयरायड एसोसिएसन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों को अब भारतीय डॉंक्टरों ने भी सहमति दे दी है।

 

इस गाइडलाइन के बाद रेडियोधर्मी दवाओं का असर सामान्य सेल्स पर कम पड़ेगा। इससे मरीजों को दोबारा कैंसर होने की आशंका को कम किया जा सकेगा।

 

थॉयरायड कैंसर की सर्जरी के बाद अब तक मरीजों को अधिक मात्रा की रेडियोधर्मी दवाइयां दी जाती थीं। इसका असर सामान्‍य कोशिकाओं को भी कमजोर बना देता था।थॉयरायड ग्रंथि क्योंकि शरीर में थॉयरायड हार्मोन का स्त्राव करती हैं, इसलिए सर्जरी के बाद ऐसी दवाएं दी जाती हैं जो आयोडीन की कमी को पूरा कर सकें।

 

कैंसर युक्त थॉयरायड की सर्जरी के बाद आयोडीन के साथ ही मरीज को ऐसा इलाज दिया जाता है जिससे कैंसर दोबारा न पनप सके, इसके लिए अधिक मात्रा की रेडियोधर्मी आयोडीन की खुराक लंबे समय तक दी जाती है।

हाल ही में अमेरिकन थॉयरायड एसोसिएशन ने इलाज के लिए नई गाइडलाइन जारी की है। इसमें मरीजों को दी जानेवाली 100-150 मिलीग्राम दवा की खुराक कम कर 30 मिलीग्राम तक कर दी गई है।

 

गाइडलाइन के तहत यह भी कहा गया है कि मरीज का रेडियोधर्मी आयोडीन इलाज करने से पहले अल्ट्रासाउंड और फाइन नीडल एस्परेशन (एफएनएसी) जांच भी जरूर की जानी चाहिए।

मालूम हो कि दवा की खुराक का सीधा फायदा मरीजों को होगा। कम खुराक की वजह से सामान्य सेल्स पर रेडियोधर्मी दवाओं का असर नहीं पड़ेगा। इंडियन थॉयरायड सोसाइटी के अनुसार, देश में इस समय 4.2 करोड़ लोग थॉयरायड से पीडित हैं। इसमें से थॉयरायड के तीन प्रतिशत मामले थॉयरायड कैंसर के होते है। वहीं, प्रति वर्ष थॉयरायड कैंसर के 10 हजार नये मरीज सामने आते हैं।

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