ये मॉन्क क्यों है दुनिया का सबसे खुश इंसान? जानिए वजह

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Feb 02, 2016
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Quick Bites

  • बुद्धिष्ट मॉक मैथ्यू रिचर्ड को मिला वर्ड हेप्पिएस्ट मैन का तमागा।
  • विस्कॉन्सिन यूनिवर्सिटा के न्यूरोसाइंटिस्ट, रिचर्ड डेविसन ने किया शोध।
  • डेविडसन ने 256 सेंसरों को रिचर्ड के सिर को जोड़कर पाए परिणाम।

आपने दुनिया के सबसे लंबे इंसान, सबसे नाटे इंसान और सबसे ताकतवर इंसान के बारे में शायद सुना हो, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन दुनिया में एक सबसे खुश इंसान भी है। जी हां, मैथ्यू रिचर्ड (Matthieu Ricard) इस दुनिया के सबसे खुश व्यक्ति हैं। यकीन नहीं आता तो गूगल करके देख लीजिए। वैज्ञानिकों के अनुसार 69 वर्ष के मैथ्यू रिचर्ड (वर्ड हेप्पिएस्ट मैन) जो कि एक बुद्धिष्ट मॉक है, दुनिया के सबसे खुशहाल व्यक्ति हैं। 

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World's Happiest Man in Hindi

न्यूरोसाइंटिस्ट, रिचर्ड डेविसन का अध्ययन

मैथ्यू रिचर्ड ने विस्कॉन्सिन विश्वविद्यालय के न्यूरोसाइंटिस्ट, रिचर्ड डेविसन द्वारा ध्यान (मेडिटेशन) व क्षमा पर आधारित एक 12 साल के मस्तिष्क अध्ययन में भाग लिया। डेविडसन ने 256 सेंसरों को रिचर्ड के सिर को जोड़ा तो पाया कि जब रिचर्ड ध्यान कर रहे थे तो उनके दिमाग में असामान्य रूप से प्रकाश मौजूद था। स्कैन से पता चला कि करुणा के साथ ध्यान (मेडिटेशन) किया जाता है, तो रिचर्ड का दिमाग गामा तरंगों के एक स्तर का उत्पादन करता है, जोकि चेतना, ध्यान, सीखने की क्षमता और स्मृति से जुड़ी होती हैं। डेविडसन के अनुसार इस तरह की कोई सूचना तंत्रिका विज्ञान साहित्य में पहले कभी नहीं दी गई।

स्कैन से यह भी पता चला कि उनके मस्तिष्क के बाएं प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स (prefrontal cortex) में दाएं प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स की चुना में अत्यधिक गतिविधि थी, जोकि मैथ्यू रिचर्ड को खुशी के लिए एक असामान्य रूप से क्षमता प्रदान करता है और नकारात्मकता की ओर जाने कि प्रवृत्ति को कम करता है। रिचर्ड ने दावोस, स्विट्ज़रलैंड में हुए वर्ल्ड इकनोमिक फोरम (World Economic Forum) के दौरान लोगों को खुश रहने के लिये निम्न टिप्स दिये -

मैं, मैं और सिर्फ मैं से बाहर आएं

रिचर्ड के लिए, इस सवाल का जवाब परोपकारिता से निचले पायदान पर आता है। इसका कारण यह है कि केवल खुद के बारे में सोचना और मैं में रहना  थकाऊ व तनावपूर्ण है और अंत में दुख की ओर ले जाता है। जब हम केवल खुद के ही बारे में सोचते और कल के लिये चिंतित रहते हैं तो हमें पूरा समाज एक खतरे जैसा लगता है। रिचर्ड के अनुसार, यदि आप खुश रहना चाहते हैं तो आपको "उदार" बनने का प्रयास करना चाहिए, जो न केवल आपको  बेहतर महसूस कराएगा बल्कि आप जैसे बाकी लोगों को भी उदार बनने में मदद करेगा। 

(रिचर्ड चेताते हैं कि, इसके ये मतलब कतई नहीं है कि आप दूसरे लोगों को खुद का फायदा अठाने या शोषण करने दें, लेकिन आपको रोजमर्रा के व्यवहार में दयालु होना चाहिये।)

सुनने में ये सब बहुत अच्छा लगता है, लेकिन वास्तव में कोई व्यक्ति परोपकारी और उदार कैसे बन सकता है, और स्वार्थी विचारों को दिमाग से कैसे दूर कर सकता है?

दिमाग को किसी खिलाड़ी की तरह करें तैयार

रिर्चड का मानना है कि हर किसी के पास एक बेहतर इंसान बनने और मन को प्रकाशित करने की क्षमता होती है, बशर्ते वो कोई सीरियल किलर या खतरनाक मुजरिम ना हो। किसी मैराथन में दौड़ने के लिये जैसे पहले तैयारी करनी होती है, ठीक इसी तरह जो लोग खुश रहना चाहते हैं, उन्हें भी अपने दिमाग को ट्रेनिंग देनी होती है। रिचर्ड के लिये अपने दिमाग को ट्रेन करने का सबसे अच्छा तरीका ध्यान (मेडिटेट) करना है।

कैसे कोई खुश रहने के लिए उनके मन को प्रशिक्षित करता है?

रिचर्ड के अनुसार इसकी शुरुआत बस खुशी भरे विचारों को प्रतिदिन 15 मिनट के लिये सोच कर करें। जब हम खुशी और प्यार की भावनाओं का अनुभव करते हैं तो यह क्षणभंगुर (बस कुछ ही पलों के लिये) होता है और फिर कुछ और घट जाता है। लेकिन रिचर्ड कहते हैं कि अपने ध्यान को विचलित होने के उस वक्त सकारात्मक भावनाओं पर ध्यान केंद्रित रखने का प्रयास करें। अगर आप ये ट्रेनिंग रोज़ करते हैं तो आप अगले दो हफ्तों के भीतर ही सकारात्मक मानसिक परिणाम महसूस कर सकते हैं। और अगर आप रिचर्ड की तरह पचास वर्षों के लिए इस अभ्यास को करते हैं तो आप भी रिचर्ड जैसे खुशहाल बन सकते हैं।

डेविडसन ने पाया कि केवल बीस मिनट रोज़ इस अभ्यास करने से मनुष्य के पूरे शारीरिक स्वास्थ्य व मानसिक स्वास्थ्य में कमाल का सुधार आता है और वे काफी खुशहाल बन पाते हैं। हालांकि खुशी की परिभाषा सबके लिये अलग होती है और इसे किस आधार पर मापा जाए, यह थोड़ा जटिल विषय होगा।  

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Image Source - Wikimedia Commons
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