50 वर्ष से अधिक उम्र के पुरूषों की जांच

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Aug 12, 2011
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Quick Bites

  • 50 साल के बाद व्‍यक्ति को कई बीमारियां हो सकती हैं।
  • इस समय ब्‍लड कोलेस्‍ट्रॉल की जांच अवश्‍य कराना चाहिए।
  • दांतों और आंखों की जांच 50 साल के बाद अवश्‍य करायें।
  • डिप्रेशन स्‍क्रीनिंग और पीएसए टेस्‍ट भी बहुत जरूरी है।

परहेज हमेशा इलाज से बेहतर होता है। ये बात हम सभी अच्छी तरह जानते हैं, लेकिन हम में से कितने लोग ऐसे हैं जो इन बातों पर अमल करते है ? जैसे ही व्यक्ति की उम्र बढने लगती है उसके शरीर में बहुत सारी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं सामने आने लगती हैं।

इससे बचने का सबसे बेहतर तरीका है कि साल में कम से कम एक बार अपने पूरे शरीर का मेडिकल स्क्रीनिंग और शारीरिक जांच करवानी चाहिए। शरीर का वार्षिक जांच कराने का मतलब सिर्फ यह नही होता है कि इससे बीमारियों की पहचान कर उसका इलाज किया जाए बलकि इससे शरीर के सभी अंग ठीक ढंग से काम कर रहे हैं या नहीं इसका पता लगाया जाता है।

नियमित वार्षिक जांच को प्रीवेंटिव केयर भी कहते हैं और लाक्षणिक चिकित्‍सा करने में सहायता मिलती है। शरीर के अंदर होने वाले किसी भी खराबी के बाद शरीर बहुत सारे संकेत देता है जिसे समय पर पहचान कर उसका निदान करने में आसानी होती है। फिर भी कुछ जांच हैं जिनको 50 की उम्र के बाद कराना चाहिए।

Tests For Men

ब्लड कोलेस्‍ट्रॉल की जांच

एक साधारण से टेस्ट और प्रीवेंटिव उपाय आपको होने वाले किसी भी तरह के हृदय रोगों की अवस्था का मूलयांकन करता है। इस टेस्ट से रक्त में कोलेस्टेरॉल और टरीगलाइसीराइड के स्तर का पता चलता है। रक्त में कोलेस्टरॉल और टरीगलाइसराइड का स्तर असामान्य होने से हृदयघात और अन्य तरह के हृदय रोग के होने के खतरे कई गुणा अधिक बढ जाते है।

वर्तमान में तनाव और आपाधापी भरी जिंदगी में 30 साल के बाद ही व्यक्ति में हृदयघात के खतरे होना सामान्य होता जा रहा है। इसलिए 30 के बाद से ही साल में कम से कम एक बार ब्लड कोलेस्टेरॉल की जांच करवाना चाहिए। खासकर उन लोगों के लिए यह टेस्‍ट कराना और भी जरूरी हो जाता जो धूम्रपान करते हों, जिन्‍हें डायबिटीज की शिकायत हो या जिनके घर में पहले से किसी को हृदय रोग रहा हो या कभी हृदय रोग का दौरा पड़ चुका हो।

आंतों और स्‍टूल की जांच

पचास की उम्र सीमा पार करने के बाद व्यक्ति को साल में एक बार अपने आतों और स्टूल की जांच करानी चाहिए। यह प्रोस्टेट या कॉलेन कैंसर को रोकने का सबसे अच्छा तरीका है। इस जांच से रेक्‍टल में प्रोलेस (बाहर आना) और आंत के अंदर होने वाले किसी भी प्रकार के रक्तस्राव का पता आसानी से चल जाता है। किसी भी व्यक्ति के पारीवारिक इतिहास में किसी को अगर कॉलेन और प्रोस्टेट का कैंसर हुआ हो तो उसमें इस बीमारी को हाने का खतरा बढ जाता है।

दातों की जांच

जो लोग धुम्रपान करते हैं। तम्बाकू का सेवन करते हैं और दांतों की हाइजिन के प्रति लापरवाह होते हैं वैसे लोगों में ओरल कैंसर और अल्सर होने का खतरा अधिक होता है। बहुत से अध्ययन और शोध में हृदय रोगो और दांत रोगों के बीच संबंध दिखाया गया है और दंत रोग होने पर हृदय रोगों के होने के खतरे के प्रति आगाह किया गया है। प्रत्‍येक छह माह पर दांतों का चेक अप कराते रहने से न र्सिफ दांतों में होने वाली बहुत सी बीमारियों से आपको निजात मिलता है बल्कि इससे आपके हृदय को भी स्वस्थ्य रखने में मदद मिलती है।

Tests For Men Over Fifty

डिप्रेशन स्क्रीनिंग

संपूर्ण स्वास्थ्य अच्छा रखने के लिए शारीरिक और मानसिक रूप दोनों से ठीक होना महत्वपूर्ण होता है। तनाव एक मानसिक अवस्था है जो उम्र बढने के साथ बढता है। व्यक्ति अपने स्वभाव के कारण तनाव से ग्रस्त हो जाता है जिसका उसके मन और मस्तिष्‍क पर कुप्रभाव पड़ता है। ऐसा इसलिए होता है कि व्यक्ति उम्र बढने के साथ अपने आप में रिजर्व हो जाता है और अपनी भावनाओं और संवंदनाओं को प्रकट करने से बचने की कोशिश करता है।

अगर आप बिना किसी खास कारण के लम्बे समय तक स्वयं को लाचार और उपेक्षित महसूस करते रहते हैं तो ऐसे में आपमें निराशा और तनाव की स्थिति उत्‍पन्न होने की प्रबल संभावना रहती है। ऐसी स्थिति उत्‍पन्न होने पर तुरंत अपने डॉक्टर या किसी मनोवैज्ञानिक से सलाह लें।

आखों की जांच

उम्र बढने के साथ आखों में होने वाली आम समस्याओं और इसको भविष्य में बढने से रोकने के लिए नियमित रूप से आंखों की जांच कराना आवश्यक होता है। ग्‍लूकोमा और बढती आयु से संबंधित आखों के रोग का समय पर उपचार करने से इसे रोका जा सकता है। आंखों की जांच से उच्च रक्त चाप और डायबिटीज जैसे बीमारियों का भी समय पर पता चल जाता है।

पीएसए जांच

इसे प्रोस्टेट स्पेसिफिक एनटीजन टेस्‍ट कहते हैं। उम्र बढने के साथ पुरूषों में प्रोस्टेट ग्रंथी में कैंसर होने की संभावना बढ जाती है। पीएसए जांच के द्वारा समय पर इस बीमारी की पहचान और उपचार शुरू करके बहुत से मरीजों की जान बचाई जा सकती है।

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