कार्यस्थल पर तानें, गुस्सा और समान रूप से व्यंग्यात्मक मुंहतोड़ जवाब के लिए खोज का कारण होते है। इस विषय पर किये गये नए अध्ययन अब यह सुझाव दे रहे हैं कि तानों का सामना करना पड़ने से आप अपना सर्वश्रेष्ठ कार्यप्रदर्शन दे सकते हैं। इन अध्ययनों में यह पाया गया है, कि जिन कर्मचारियों को व्यंग्यात्मक सहयोगियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ डाल दिया जाता है, वह ऐसी स्थितियों का सामना नही कर रहे कर्मचारीयों की तुलना में अधिक रचनात्मक रुप से कार्य करते हैं।
कार्यालय के अधिक तनावमुक्त और परवाह करने वाले वातावरण की तुलना में, एक मालिक या सहकर्मी से व्यंग्यात्मक टिप्पणी, एक व्यक्ति को कठोर मेहनत करने, और काम को तेजी से अधिक से अधिक रचनात्मकता से काम करने को बाध्य कर देती हैं।
शोधकर्ताओं ने कहा कि तानें सुनने पडने पर, अधिक 'संज्ञानात्मक जटिलता' की या चीजों को एक से अधिक कोण से देखने की क्षमता होने की जरुरी होती हैं।
जिस मर्यादा तक एक व्यक्ति या संगठन एक घटना पर भेद–भाव और एकीकरण करते हैं, उस हद को संज्ञानात्मक जटिलता संदर्भित करती हैं। जिन व्यक्तियों की संज्ञानात्मक जटिलता उच्च होती हैं, वह एक स्थिति का उसके घटक तत्वों में विश्लेषण करने में सक्षम होते हैं और उनकी सोच बहुआयामी होती है और वह किसी एक समाधान पर अधिक तेजी से पहुँचते हैं। संज्ञानात्मक जटिलता कम होने वालें लोगों को एक विशिष्ट संदर्भ के लिए इन लाइनों में सोचने को सिखाया जा सकता है, लेकिन उच्च जटिलता वाले लोग नई स्थितियों में नाविन्यपूर्ण समाधान ढूँढने में सक्षम होते हैं।
प्रबंधकों को कार्यस्थल पर लोगों से अपेक्षित काम करवाने के लिए उपयोगी हो सकने वाले जटिलता के अध्ययन, निम्नलिखित निष्कर्ष तक पहुँच चुके हैं:
ताने के अभिप्रेरण प्रभाव के प्रभाव को विस्तृत करने के लिए, इस्राएल के बॅन इलान विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने इंजीनियरिंग के 350 छात्रों से कहाँ कि वह कल्पना करे कि वे ग्राहक सेवा प्रतिनिधि हैं। उनको क्रोधित व्यंग्यात्मक फोन कॉल आये। छात्रों की, आगे कि आपत्ती से बचने के लिए उनके गुस्से को शांत करके उनकी तत्काल चिंताओं को कम करने की प्रतिक्रिया थी।
ताने के प्रभाव से उच्च स्तर की सोच को और दो वास्तविकताओं पर एक साथ प्रक्रिया करने की क्षमता को प्रोत्साहित किया था, तानों के स्तर जितने उच्च थे, उतनी प्रेरणा उच्च थी। एप्लाइड मनोविज्ञान के जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार गुस्से और ताना के उच्च स्तर पर रचनात्मकता बहुत उन्नत थी।

