सिफलिस के दोबारा होने की आशंका

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Feb 28, 2011
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Quick Bites

  • सिफलिस यौन संचारित रोग है।
  • सही समय पर इलाज करवाना जरूरी।
  • टॉयलेट सीट या साथ खाने से नहीं फैलता सिफलिस।
  • कई बार चुंबन या शारीरिक संपर्क से भी होता है सिफलिस।

सिफलिए गभीर संक्रामक बीमारी है। यह आमतौर पर यौन संबंधों द्वारा फैलती है। इसमें ओरल और गुदा सेक्‍स शामिल है। कभी कभी यह बीमारी एक व्‍‍यक्ति से दूसरे व्‍यक्ति को लंबे समय तक किस करने या नजदीकी शारीरिक संबंधों के जरिये भी फैल सकती है। इस बीमारी से पीड़ित व्‍यक्ति अनभिज्ञ रहता है। इससे उसका साथी भी इस बीमारी से संक्रमित हो सकता है।

गर्भवती मां से यह बीमारी उसके होने वाले शिशु को हो सकती है। इस बीमारी को कोंन्‍जेनिटल सिफलिस कहा जाता है। इससे बच्‍चे को कुछ परेशानियां हो सकती हैं। यहां त‍क कि उसकी मौत भी हो सकती है।

syphlis in hindi

सिफलिस टॉयलेट सीट, दरवाजे के नॉब, स्विमिंग पूल, हॉट टब, बाथ टब, एक दूसरे के कपड़े पहनने या एक ही बर्तन में भोजन करने से नहीं होता।

कैसे होता है सिफलिस

सिफलिस बैक्‍टीरिया के जरिये फैलने वाली बीमारी है। इस बैक्‍टीरिया का नाम ट्रूपोनेमा पैलिडम होता है।

कितना सामान्‍य है सिफलिस

एक दौर में सिफलिस बड़ी व चिंताजनक स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍या था। इससे शरीर पर दीर्घकालिक प्रभाव, जैसे अर्थराइटिस, ब्रेन डैमेज और अंधापन आदि भी हो सकते थे। 1940 के अंत तक इस बीमारी का कोई असरदार इलाज भी नहीं था। इसके बाद पेनसिलिन एंटीबॉयोटिक के आने के बाद इस बीमारी को काबू किया जा सका है ।

वैज्ञानिक आंकड़ों के मुताबिक 1990 के बाद सिफलिस के मरीजों की दर कम हुई है। और वर्ष 2000 में यह 1941, जबसे इसका रिकॉर्ड रखा जाना शुरू हुआ है, के बाद सबसे निचले स्‍तर पर पहुंच गयी थी। हालांकि, उसके बाद इसमें एक बार फिर धीमी बढ़ोत्‍तरी हुई है।


कैसे होता है सिफलिस का निदान

सि‍फलिस का निदान आसान है। यह किफायती भी है। रक्‍तजांच के जरिये डॉक्‍टर पता लगा सकता है कि क्‍या आपको सिफलिस है।

 

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क्‍या दोबारा हो सकता है सिफलिस

पेनिसिलिन की दवा का डोज इस बीमारी का स्‍थायी इलाज कर सकता है। सिफलिस के हर चरण पर पेनिसिलिन काफी मददगार साबित होती है। लेकिन, यह एंटीबॉयोटिक बीमारी की वजह से किसी भी अंग को हुए नुकसान को दूर नहीं कर सकती। अगर इस बीमारी का इलाज न किया जाए तो इससे व्‍यक्ति को स्‍थायी और दीर्घकालिक नुकसान हो सकते हैं। और यहां तक कि इससे मरीज की जान भी जा सकती है।

 

 

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