गर्भावस्था के दौरान ज्‍यादा दर्द और अधिक रक्‍तस्राव को न करें नजरअंदाज

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jul 30, 2013
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Quick Bites

  • योनि से अधिक स्राव, गंध, बुखार, ठंड लगना, पेशाब करते समय दर्द।
  • सिर दर्द, दृष्टि में परिवर्तन या धुंधलापन हो तो चिकित्सक से मिलें।
  • दौरान पैरों, हाथों और चेहरे पर ज्‍यादा सूजन को न करें नजरअंदाज।
  • लेकिन यदि पेशाब में जलन हो तो इसे बिलकुल नजरअंदाज न करें।

गर्भधारण बनने के बाद मां की राहें और भी कठिन होती जाती हैं। भ्रूण के विकास के साथ अतिरिक्‍त देखभाल की जरूरत पड़ती है। क्‍योंकि गर्भावस्‍था के बाद महिला के शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं। ये बदलाव हार्मोंस में परिवर्ततन के कारण होते हैं।

पीठ दर्द से परेशान गर्भवती महिला गर्भावस्‍था में तीन तिमाही होती हैं - पहली, दूसरी और तीसरी। गर्भावस्‍था की पहली तिमाही के शुरूआत में ज्‍यादा दिक्‍कतें नही आती हैं, दूसरी और तीसरी तिमाही में भ्रूण का विकास हो जाता है जिससे कई प्रकार की जटिलतायें पैदा होती हैं। गर्भावस्‍था के दौरान पेट में गैस बनना, कब्‍ज होना, बेचैनी, घबराहट, थकान, सूजन, बुखार, सिरदर्द, मॉर्निंग सिकनेस, मिचली, शरीर के रंग में बदलाव होना, वजन बढ़ना आदि समस्‍यायें सामान्‍यतया होती हैं। लेकिन इस दौरान कुछ लक्षण ऐसे भी हैं जिनको नजरअंदाज करना मां और बच्‍चे दोनों के लिए नुकसानदेह हो सकता है। आइए हम आपको उन लक्षणों के बारे में बताते हैं।

गर्भावस्‍था की तिमाही में होने वाली जटिलतायें

पहली तिमाही

गर्भधारण करने के बाद उल्‍टी, बेचैनी और घबराहट हो सकती है, यह गर्भावस्‍था का शुरूआती लक्षण हैं। ऐसी स्थितियां गर्भधारण करने के पहले सप्‍ताह में होती हैं। गर्भधारण करने के दूसरे सप्‍ताह में मां का व्‍यवहार बदलने लगता है। थकान, बुखार, मॉर्निंग सिकनेस और बुखार ज्‍यादा हो तो चिकत्‍सक से अवश्‍य संपर्क कीजिए। हालांकि ये गर्भावस्‍था के लक्षण हैं और कुछ दिन बाद अपने आप ठीक हो जायेंगे, लेकिन इनके कारण आपको परेशानी हो सकती है।

अस्‍थानिक गर्भावस्‍था या गर्भपात की संभावना भी पहली तिमाही में दिखती है। यदि पहली तिमाही में ज्‍यादा ब्‍लीडिंग हो रही है तो मिसकैरैज की संभावना होती है। अस्‍थानिक गर्भावस्‍था में निषेचन के बाद गर्भ गुहा के बाहर निषेचित हो जाता है। इसका पता आमतौर पर गर्भधारण करने के 8वें सप्‍ताह बाद चलता है।

दूसरी तिमाही

गर्भावस्‍था के सेकेंड ट्राइमेस्‍टर में सिरदर्द, बार-बार पेशाब आना, ब्‍लीडिंग, खाने की ज्‍यादा इच्‍छा होना जैसी समस्‍यायें होती हैं। गर्भावस्‍था की दूसरी तिमाही में खाने की ज्‍यादा इच्‍छा होती है, महिला की भूख बढ़ जाती है। बार-बार पेशाब लगता है, लेकिन यदि पेशाब में जलन हो तो इसे बिलकुल नजरअंदाज न करें।

पहली तिमाही की तुलना में दूसरी तिमाही में ब्‍लीडिंग ज्‍यादा होती है। कभी-कभी सामान्‍य ब्‍लीडिंग होती है लेकिन कई बार यौन संबंध बनाने के बाद ज्‍यादा ब्‍लीडिंग होती है। यदि ज्‍यादा ब्‍लीडिंग हो रही है तो इससे प्रीमेच्‍योर डिलीवरी की संभावना बढ़ जाती है।

गर्भावस्‍था की दूसरी तिमाही में फीटल किकिंग भी होती है, यह आपके लिए अलग एहसास होता है। फीटल किक की गिनती की‍जिए, यदि सामान्‍य से कम या ज्‍यादा बार फीटल किकिंग हो रही है तो उसे बिलकुल भी नजरअंदाज मत कीजिए। दूसरे ट्राइमेस्‍टर के अंत तक सामान्‍य बच्‍चे का वजन 900 ग्राम और लंबाई 11 से 14 इंच तक हो जाता है।

 

तीसरी तिमाही

यह गर्भावस्‍था की आखिरी तिमाही होती है। प्रेग्‍नेंसी के थर्ड ट्राइमेस्‍टर यानी 7वें से 9वें माह तक शिशु का विकास पूर्ण रूप से हो जाता है। यह बढ़कर मां की पसलियों तक आ जाता है और तब उसका हिलना-डुलना कम हो जाता है।

जैसे-जैसे प्रसव की तिथि नजदीक आती है मां की तकलीफें बढ़ने लगती हैं। इस दौरान पैरों, हाथों और चेहरे पर ज्‍यादा सूजन आये तो उसे नजरअंदाज न करें। इस दौरान झूठा प्रसव दर्द (फॉल्स पेन) हो सकता है।

अगर योनि से अधिक स्राव, गंध, बुखार, ठंड लगना, पेशाब करते समय दर्द, सिर दर्द, दृष्टि में परिवर्तन या नियमित रूप में धुंधलापन जैसी समस्या हो रही है तो चिकित्सक से संपर्क कीजिए।



गर्भावस्‍था की जटिलताओं से बचने के लिए प्रेग्‍नेंसी के दौरान धूम्रपान, एल्‍कोहल या अन्‍य नशीले खाद्य-पदार्थ का सेवन न करें। खाली पेट न रहें, उपवास न करें, ज्‍यादा झुकें नहीं, आराम कीजिए, हो सके तो लंबी दूरी की यात्रा से बचें। हमेशा चिकित्‍सक से सलाह लेते रहें।

 

 

 

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