नसों में खून के जमने से हो सकता है जानलेवा रोग डीवीटी, जानें इसके लक्षण और बचाव

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Apr 16, 2018
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Quick Bites

  • डीवीटी, डीप वेन थ्रोंबोसिस नसों की बीमारी है।
  • ये नसों में खून के थक्के जम जाने के कारण होता है।
  • हमारा खून कई तरह के सेल्स से मिलकर बना होता है।

डीवीटी यानि डीप वेन थ्रोंबोसिस एक ऐसी बीमारी है जो नसों में खून के थक्के जम जाने के कारण होती है। कई बार ये बीमारी जानलेवा भी हो सकती है क्योंकि इसके लक्षण आमतौर पर दिखाई नहीं देते हैं। कई बार अंगों में सूजन, दर्द और लाली जैसे बहुत सामान्य लक्षण दिखाई देते हैं जिन्हें लोग आसानी से नजरअंदाज कर देते हैं। इसके कारण शरीर को लकवा भी मार सकता है। प्रेगनेंसी के दौरान इस बीमारी का ज्यादा खतरा होता है। आइये आपको बताते हैं क्या है ये बीमारी और क्या हैं इससे खतरे।

क्या है डीवीटी

हमारा खून कई तरह के सेल्स से मिलकर बना होता है। ये तरल होता है लेकिन इसकी तरलता तभी तक है जब तक ये सामान्य गति से नसों में दौड़ रहा है। अगर रक्त का प्रवाह धीमा हो जाए, तो रक्त जमने लगता है और नसों के बीच ब्लड के थक्के जमना शुरू हो जाते हैं। इसी को डीप वेन थ्रोंबोसिस कहते हैं। वैसे तो ये शरीर के किसी भी हिस्से को प्रभावित कर सकता है मगर आमतौर पर ये रोग पैरों और पेड़ू में होता है। कुछ मामलों में डीवीटी जानलेवा हो सकता है।

क्या हैं डीवीटी के लक्षण

  • हाथ और पैरों में अचानक सूजन आना
  • चलने और खड़े होने में पैरों में दर्द महसूस होना
  • दर्द वाली जगह पर जलन महसूस होना
  • नसों का फूल आना या बाहर दिखाई देना
  • त्वचा का लाल या नीला हो जाना

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पल्मोनरी इम्बॉलिज्म का खतरा

पल्मोनरी इम्बॉलिज्म एक जानलेवा और खतरनाक रोग है। इसमें अचानक से रोगी की तबीयत बिगड़ती है और कुछ समय बाद ही उसकी मौत हो जाती है। कई बार नसों में रक्त का थक्का जमता है मगर रक्त प्रवाह के कारण नसों की दीवारों से अलग होकर रक्त के साथ ही शरीर में बहने लगता है। ये थक्का जब फेफड़ों में पहुंचता है तो यही पल्मोनरी इम्बॉलिज्म का कारण बनता है।

पल्मोनरी इम्बॉलिज्म के लक्षण

 

  • सांस अचानक से तेज हो जाना और रुक रुक कर चलने लगना
  • सीने में तेज दर्द और सांस लेने में परेशानी होना
  • तेज खांसी के साथ खून आना
  • अचानक से दिल की धड़कन बढ़ जाना

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वैरिकोज वेन्स से मिलते हैं लक्षण

वैरिकोज वेन्स तब होता है जब नसें ठीक से काम नहीं कर पाती हैं। पैरों से ब्लड को नीचे से ऊपर हार्ट तक ले जाने के लिए पैरों की नसों में वाल्‍व होते हैं, इन्हीं की सहायता से ब्लड ग्रेविटेशन के बावजूद हार्ट तक पहुंच पाता है। लेकिन अगर ये वाल्व खराब हो जाए या पैरों में कोई समस्या आ जाए, तो ब्लड ठीक से ऊपर चढ़ नहीं पाता और पैरों में ही जमने लगता है। ब्लड के जमने की वजह से पैरों की नसें कमजोर हो जाती हैं और फैलने लगती हैं। कभी-कभी नसें अपनी जगह से हट जाती हैं और मुड़ने लगती हैं। इसी समस्या को वैरिकोज वेन्स कहते हैं।

क्यों दिखती हैं नसें नीली

दरअसल हमारे ब्लड में हीमोग्लोबिन नाम का तत्व पाया जाता है, जिसके कारण इसका रंग लाल दिखता है। हीमोग्लोबिन की विशेषता ये है कि ये कार्बन डाइऑक्साइड और ऑक्सीजन दोनों ही इसके साथ अच्छे से घुल-मिल जाते हैं। अगर हमारे टिशूज में कार्बन डाइऑक्साइड आ जाए, तो ये हीमोग्लोबिन के साथ रिएक्शन करके कार्बोक्सी हीमोग्लोबिन बना लेता है। कार्बोक्सी हीमोग्लोबिन वाले खून को ही हम खराब खून या अशुद्ध खून कहते हैं। इस अशुद्ध खून का रंग नीला या बैंगनी हो जाता है। हमारी नसों के ऊपर की स्किन बेहद पतली होती है इसी लिए नसें ऊपर से दिखाई देती हैं। अगर इन्हीं नसों में ये अशुद्ध खून भर जाता है, तो हमें बाहर से नसें गहरे नीले रंग की दिखने लगती हैं।

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