बच्चों में त्वचा संबंधी समस्या के लक्षण व कारण

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Aug 02, 2013
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Quick Bites

 

  • बच्‍चों के लिए कोई भी उत्‍पाद खरीदने से पहले अच्‍छी तरह देख कर लें।
  • ज्‍यादा देर तक गीले नैपकीन में रहने से छोटे बच्‍चों को डर्मेटाइटिस की समस्या हो जाती है।
  • स्कैबीज में बच्‍चे के शरीर में मवाद व मवाद भरे दाने खुजली के साथ होने लगते है। 
  • चिकेन पॉक्‍स, वातावरण में मौजूद वैरीसेला जॉस्टर नामक वायरस से बच्चों में होता है।

बहुत कोमल होती है आपके बच्‍चे की त्‍वचा। उस नाजुक त्‍वचा को चाहिए आपकी खास देखभाल। बच्‍चों की संवदेनशील त्‍वचा जल्‍दी ही किसी चीज से प्रभावित हो सकती है। इसलिए आपके लिए कुछ बातों का खयाल रखना जरूरी हो जाता है। बच्चों को अक्‍सर त्वचा संबंधी परेशानियां होती रहती हैं। इसके पीछे अनेक कारण हो सकते हैं। त्वचा संबंधी कुछ रोग तो अपने आप ही ठीक हो जाते हैं, लेकिन कई बार डॉक्‍टर से सलाह लेना बहुत जरूरी हो जाता है।


कई बार कोई खास प्रकार का उत्‍पाद बच्‍चों की त्‍वचा के मुफीद नहीं होता। इसलिए बच्‍चों के लिए कोई भी उत्‍पाद खरीदने से पहले अच्‍छी तरह ठोक-बजा लें। कई बार धूल-मिट्टी व धूप में खेलने के कारण बच्चों की त्वचा पर कई समस्याएं हो जाती हैं। समस्‍या बड़ा रूप धारण करे, अगर इससे पहले ही उसके शुरुआती लक्षणों को पकड़कर उसका इलाज करवा लिया जाए, तो बच्‍चों को होने वाली तकलीफ से बचाया जा सकता है।


डायपर डर्मेटाइटिस

छोटे बच्चों में अक्सर डायपर डर्मेटाइटिस की समस्या हो जाती है। ज्‍यादा देर तक गीले नैपकीन में रहने से बच्‍चों को यह परेशानी होती है। अधिक देर तक गीलेपन में रहने के कारण बच्‍चों की त्वचा में लाल रैशेज हो जाते हैं। शिशुओं को इससे बचाने का सबसे आसान तरीका है कि प्रयोग में लायी जा चुके नैपकिन का प्रयोग दोबारा न किया जाए। 'डायपर' जब भी गीला हो, उसे तुरन्त बदल देने से इससे शिशुओं को बचाया जा सकता है। शिशु जब भी मल-मूत्र त्यागे तो बिना देर किए शिशु का डायपर अथवा नैपकिन बदल दें, क्योंकि एक बार डर्मेटाइटिस विकसित हो गयी तो इसके इलाज में डायपर का प्रयोग न करना भी शामिल हो जाता है। बच्चा बार-बार डायपर गीला करता है तो हर घंटे इसे बदल देना चाहिए। हल्का डर्मेटाइटिस होने पर डायपर के लगातार बदलने के साथ-साथ साधारण क्रीम (चिकित्सक के परामर्शानुसार) का प्रयोग पर्याप्त होता है, लेकिन इसका प्रकोप अधिक होने पर शिशु रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें।

 


रिंगवर्म

रिंगवर्म किसी कीड़े के काटने से नहीं होता है। यह एक प्रकार का फंगस है जो मृत त्वचा, बाल व नाखूनों में होता है। इसके कारण त्वचा में उभार व लाल चकत्ते दिखाई देने लगते हैं साथ ही इसमें खुजली भी होती है। रिंगवर्म संक्रमित व्यक्ति या जानवर के संपंर्क में आने से होता है। बच्चों में यह समस्या संक्रमित व्यक्ति का सामान प्रयोग करने से होता है। ऐसे में डॉक्टर को जरूर दिखाएं।

 

अर्टीकेरिया

अर्टीकेरिया में त्वचा पर बहुत अधिक खुजली होती है। जगह-जगह लाल रंग के छोटे-छोटे गोले बन जाते हैं, जो पिछले कुछ घंटों से दिखाई देते हैं। छोटे बच्चों में वील (सूजन के चकत्ते) के साथ बुखार और पेट में दर्द हो सकता है। कभी-कभी ऐसे समय में सांस से संबंधित परेशानी भी उत्पन्न हो सकती है। अधिकांश मामलों में बच्चों में हुई 'एक्यूट अर्टीकेरिया' स्वत: कम हो जाती है। यह बीमारी ठीक होने में 6 सप्ताह तक लग सकते हैं। यदि बार-बार यह परेशानी उत्पन्न होती है तो यह असामान्य है तथा बच्चे को सांस व उदर संबंधी संक्रमण की आशंका हो सकती है।


स्कैबीज


स्कैबीज होने की आशंका तब ज्यादा दिखाई देती है, जब बच्चा पूरे शरीर में खुजली करता हो। बच्‍चे को रात के समय अधिक परेशानी होती है। उसके शरीर पर बिना मवाद व मवाद भरे दाने, होने लगते हैं। इस बीमारी से अंगुलियों के बीच का स्थान, कलाई, अंडर आर्मस और पैर विशेष तौर पर प्रभावित होते हैं। शिशुओं में चेहरा, हथेली तथा तलवा भी प्रभावित होता है। कभी-कभी इन जगहों पर 'बर्रोज' भी दिखाई देते हैं। ऐसे में बहुत घबराने की बात नहीं होती है। शिशु को शिशु रोग विशेषज्ञ के पास ले जाना चाहिए। सामान्यत: खाज 10-14 दिनों के अंदर ठीक हो जाती है।

 

चिकेन पॉक्स

बच्चों में यह स्किन एलर्जी सबसे ज्यादा देखने को मिलती है। कमजोर इम्यून सिस्टम वाले बच्चों के लिए जानलेवा भी साबित हो सकती है। वातावरण में मौजूद वैरीसेला जॉस्टर नामक वायरस की वजह से बच्चों में यह स्किन एलर्जी होती है। शरीर में दर्द, बुखार, गले में खराश लाल रंग के दाने निकलना, जिनकी शुरुआत आमतौर पर चेहरे से होती है और फिर ये दाने पूरे शरीर में फैल जाते हैं। त्वचा में खुजली और जलन महसूस होना, पांच दिनों के बाद दाने सूखने लगते हैं और पंद्रह दिनों के बाद ये दाने सूखकर झड़ने लगते हैं। इस एलर्जी का बचाव सिर्फ पहले से टीके लगवा कर ही किया जा सकता है। दो वर्ष की उम्र के पहले बच्चे को इससे संबंधित टीके जरूर लगवा लेने चाहिए।


स्कार्लेट फीवर

यह एलर्जी ज्यादातर स्कूल जाने वाले बच्चों में देखने को मिलती है। गले में जकड़न, पेट में गड़बड़ी, बुखार, हथेलियों, तलवों और गालों पर लाल रंग के चकत्ते, गले में सूजन, यूरिन डिस्चार्ज के दौरान दर्द। अगर बच्चों में इस तरह के लक्षण दिखाई दें तो बिना देर किए बाल रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें। डॉक्टर द्वारा बताई गई एंटीबायोटिक्स की खुराक बच्चे को नियमित रूप से दें और वह आराम महसूस करने लगे तो भी बीच में दवा बंद न करें, इससे उसे दोबारा एलर्जी हो सकती है। दवा का कोर्स जरूर कंप्लीट कराएं।

बच्चों में त्वचा संबंधी रोगों में एक्जिमा रोग भी शामिल है, अक्सर गर्मी व उमस बढ़ने से त्वचा से पसीने का स्राव बढ़ जाता है। जिससे त्वचा के श्वसन लेने के क्रम में परिवर्तन आता है। इस वजह से खुजली और संक्रमण होने के अलावा रेशेज बन जाते हैं, जो कई बार घाव में भी बदल जाते हैं।

 

Image Source - Getty Images

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