फिटनेस के हिट फॉर्मूले

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jan 20, 2011
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Quick Bites

  • तेजी से भागती जिंदगी में सुबह-शाम का पता नहीं चलता।
  • दिन भर की थकान के कारण शारीरिक मेहनत नहीं हो पाती।
  • ऐसे में शरीर को फिट रखना नामुमकिन सा काम हो जाता है।
  • ऐसे में इन हिट फार्मुलों को अपनाएं और खुद को रखें फिट।

आज की तेज रफ्तार जिंदगी में कब सुबह हो जाती है और कब शाम, पता ही नहीं चलता। दिन भर की थकान के बाद घर पहुंचकर खाना बनाना और खाकर सो जाना ही दिनचर्या बन जाती है। घर-बाहर दोनों जिम्मेदारियां निभाते हुए खुद पर ध्यान देना बहुत मुश्किल होता है। लेकिन जीवन सिर्फ जिम्मेदारी निभाने का नाम नहीं है। रिश्तों और जिम्मेदारियों को समझने की समझ आप में है तो अपने शरीर और मन की जरूरतों को भी समझिए। तब आपको महसूस होगा कि आप अपनी मूलभूत जरूरतों को कितना अनदेखा कर लापरवाही बरत रही थीं। थोड़े से बदलाव और कोशिशों से आप नई स्फूर्ति से भर उठेंगी। ज्यादा नहीं केवल एक सप्ताह हमारे कहे अनुसार चल कर देखिए उसका परिणाम। साथ ही यह हमेशा याद रखिए कि स्वस्थ रहना ही खुश रहने का आधारभूत सिद्धांत है।

 

स्वस्थ तन स्वस्थ मन 

स्वस्थ रहने के लिए बहुत पैसा और समय खर्च करने की जरूरत होती है, जो ऐसी धारणा रखते हैं उनकी सोच गलत है। कहीं आपकी धारणा भी तो ऐसी नहीं? यदि आपका जवाब 'हां' है तो बदलिए अपनी सोच। सिर्फ कुछ अच्छी आदतें अपनाकर समय का सही इस्तेमाल करें तो जिंदगी आसान हो जाएगी। दिन 24 घंटे का ही है यह याद रखें। समय किसी के लिए नहीं ठहरता। अनावश्यक रूप से खाना बनाने में व्यस्त रहकर या घंटों जिम में जाकर अमूल्य समय को व्यर्थ न गवाएं। कहने का अर्थ केवल इतना ही है कि दिनचर्या में कुछ बदलाव लाकर आप तरोताजा और स्वस्थ तो महसूस करेंगी ही, सौंदर्य में भी निखार आएगा। उचित आहार, त्वचा की सही देखभाल, थोड़ी-सी कसरत या व्यायाम शरीर को चुस्त-दुरुस्त रखने के साथ-साथ आपको प्रसन्न और तनावमुक्त भी रखेगा। लेकिन रातोंरात किसी जादुई करिश्मे की कामना न कर इस यथार्थ को अपनाना चाहिए कि थोड़ी सी मेहनत और जागरूकता के बाद एक नया आत्मविश्वास आपके स्वास्थ्य और सौंदर्य को नया निखार देगा।

 morning walk

 

 

 

 

 

स्वस्थ रहने का सबसे मुख्य सिद्धांत है बहुत देर तक न सोकर सही समय पर सही तरीके से जागना। सुबह छह से साढ़े छह बजे के बीच यानी सूर्योदय से पूर्व हमें बिस्तर छोड़ देना चाहिए। कोशिश करें कि जागने के लिए अलार्म का सहारा न लेना पड़े। रात को जल्दी सोने और सुबह जल्दी उठने की आदत बनाएं। सुबह उठने की शरीर को आदत डालें। कई लोगों को सुबह उठना अच्छा नहीं लगता। अगर आपके साथ भी ऐसा हो तो सुबह उठने की आदत शुरू करने पर झुंझलाने की बजाय धीमी आवाज में शास्त्रीय संगीत या भजन सुनते हुए दिन की शुरुआत करें। प्रतिदिन एक घंटे की सैर शरीर के लिए जरूरी है। सुबह रोज उठने लगें तो सैर के लिए भी जाना शुरू कर दें।

 

इसे रोजमर्रा की आदत बनाइए। मौसम की चिंता किए बगैर एक घंटे के लिए टहलने निकल जाइए। प्रतिदिन पैदल चलना शरीर को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। समय ज्यादा न हो तो थोड़ा टहलिए। 10-15 मिनट का टहलना भी दिमाग को तरोताजा कर ठंडक प्रदान करेगा। धीरे-धीरे टहलिए, तेज चलने से आप जल्दी थकान महसूस करेंगी। फिटनेस एक्सपर्ट डॉक्टर बेनु गुप्ता का कहना है कि टहलने से तनाव कम होता है, यहां तक कि इसको अपनाने से दवाओं (ट्रैंक्वलाइजर) की भी आवश्यकता नहीं रह जाती।

 

मॉर्निग वॉक के अलावा सप्ताह के हर दिन के लिए एक योजना है, उसे जानिए, समझिए और अपनाइए। जरूरी नहीं है कि उनका आप अक्षरक्ष: पालन करें। उसमें सुविधा के अनुसार फेर-बदल कर सकती हैं, जरूरतों के हिसाब से समय घटा-बढ़ा सकती हैं।

 

शुरुआत करने से पहले 

जिस प्रकार कोई भी कार्य आरंभ करने से पहले आप आवश्यक सामग्री एकत्र करके रखती हैं, ठीक उसी प्रकार अपने सप्ताह के कार्यक्रम को आरंभ करने से पहले सभी आवश्यक सामग्री को आप पहले से एकत्र कर लीजिए। यदि आप कामकाजी हैं तो यह और भी जरूरी हो जाता है कि सप्ताह भर के जरूरत की चीजों को आप पहले से इकट्ठा करके रखिए। फिर पूरे सप्ताह के कार्यक्रम को अच्छी तरह बना लीजिए। कौन से दिन आपको क्या करना है, कब आपको कहां जाना है, बच्चों के लिए क्या करना है इन सबसे जुड़ी रास्ते कीसभी बाधाओं को सोच-समझ कर हटाती चलिए। ये अवरोधक आपके मार्ग की बाधा न बनें, इस बात का ध्यान रखिए।

 

शनिवार, आगामी योजना बनाएं

सप्ताह के अंत को आलसियों की तरह न बिताएं। हर व्यक्ति वीकेंड को आराम करके बिताना चाहता है पर इससे सिर भारी हो जाएगा और आप थकावट महसूस करेंगी। पहले से सोचकर रखें कि इस शाम आपको क्या काम करने हैं। पार्लर जाना है, तैरने जाना है, मसाज करानी है, घूमने जाना है या बाजार जाकर खरीदारी करनी है। वे काम करें जिन्हें करने में खुशी तो मिले ही शरीर को भी आराम मिले। वे काम न करें जो मजबूरी लगे। सप्ताह भर की परेशानियों से शरीर को एकदम मुक्त कर लें।

 

तनावमुक्त रहने के लिए

कुछ कसरत करके आप तनावमुक्त रह सकती हैं। इसके लिए-फर्श पर सीधी पीठ के बल लेट जाएं। पैरों के बीच दूरी रखें, हाथ शरीर से थोड़ी दूर रख हथेलियां ऊपर की तरफ करें। गर्दन और सिर सीधा रखें। सोचें कि आपका शरीर धीरे-धीरे तनावरहित होकर आराम पा रहा है, आपको आराम मिल रहा है। इस सोच को पैर, पंजों और घुटनों से होते हुए मन और दिमाग तक ले जाना है। फिर देखिए आपको कितना आराम मिलता है।

 

रविवार

अपने लिए समय निकालें: अपने घर में आपको घुटन नहीं, खुलापन चाहिए। छुट्टी का दिन है इसलिए इसका पूरा फायदा उठाइए। घर की सफाई पर विशेष ध्यान दीजिए। दोपहर तक एक-एक कोना साफ कर डालिए। एक कमरा या एक कोना ऐसा चुनिए जहां आप शांति से संगीत का आनंद उठा सकें। टीवी बंद करके दो घंटे सिर्फ वह काम करें जिसे करने में आपको मजा आए। प्रकृति से प्रेम है तो बागवानी में समय लगाएं, छोटे-छोटे उग आए फालतू पौधों को निकाल फेंकें, घास हटाएं, गुड़ाई करें और खाद डालें। मौसम अच्छा है तो बालकनी या आंगन में जाकर थोड़ी बहुत कसरत कर सकती हैं। शरीर के लिए ताजी हवा और सूरज की रोशनी बहुत जरूरी है। इससे मेलाटोनिन हार्मोन का निर्माण होता है जो मस्तिष्क के लिए बहुत आवश्यक है। मेलाटोनिन सेरोटोनिन हार्मोन से बनता है जो मूड को अच्छा बनाता है।

 

सोमवार

शुरुआत अच्छी हो: दिन की शुरुआत अच्छे नाश्ते से करें। दिनभर के काम की थकान को दूर करने में अच्छा नाश्ता मदद करता है। भागते-दौड़ते, जल्दी-जल्दी पी गई चाय या कॉफी, ठूंस कर मुंह में भरे गए दो-चार ब्रेड के टुकड़े शरीर के लिए नुकसानदेह हैं। ढंग से नाश्ता करने के लिए दस मिनट जरूर निकालें। खाना जीवन की जरूरत है उसे उपेक्षित न करें। नाश्ते में फल, अंकुरित मूंग, दलिया, सूजी, पोहा, सैंडविच जैसी चीजें लें, साथ में एक गिलास टोंड दूध, लस्सी या जूस। विमहांस अस्पताल की डाइटीशियन रश्मि भाटिया का कहना है कि फलों के रस के स्थान पर ताजे फलों का सेवन बेहतर है।

 

पोस्चर पर ध्यान दें

दूसरा ध्यान अपने उठने, बैठने और चलने के तरीके पर दें। गलत तरीके से चलना या बैठना आपके व्यक्तित्व पर विपरीत प्रभाव डालेगा। टेढ़ी-मेढ़ी भद्दी चाल आपके अंदर कुंठा तो बढ़ाएगी, शरीर को भी बेढंगा कर देगी। सीधे तने हुए आनुपातिक शरीर के लिए जरूरी है लंबी गहरी सांस लें, इससे रक्त का बहाव ठीक होगा, पाचन क्रिया दुरुस्त रहेगी। अपना ध्यान इसी पर केंद्रित रखें कि आप कैसे खड़ी होती हैं, कैसे बैठती हैं और किस प्रकार चलती हैं। आपके कंधे नीचे की ओर झुके और तनावपूर्ण न हों। पीठ झुकाकर, कूबड़ या पेट आगे निकालकर न चलें। अपनी गर्दन सीधी और नजर सामने रखें।

 

मंगलवार: जरूरी है शरीर की सफाई

हफ्ते में एक दिन इस ओर ज्यादा ध्यान दें। नहाने से पहले हाथ-पैरों और शरीर पर हलके हाथों से तेल मालिश करें। नारियल का तेल, ऑलिव ऑयल, बादाम रोगन, मछली का तेल, दूध, मलाई या मक्खन किसी का भी प्रयोग कर सकती हैं। एडि़यों और कोहनियों पर खास तौर पर सरसों का तेल रगड़ें। लंबी गहरी सांसें लें जिससे शरीर को चेतना प्राप्त हो।

 

बेहतर होगा अच्छा स्नान

मालिश के बाद स्नान देर तक करें। स्टीम बाथ या सोना बाथ भी ले सकती हैं अन्यथा गर्म तौलिए को पूरे शरीर पर लपेटने से भी काम चलेगा। नहाने के बाद जब शरीर सूख जाए तब कोल्ड क्रीम या मायस्चराइजिंग लोशन हलके हाथों से लगाएं। थोड़ी देर आराम करें।

 

बुधवार: स्ट्रेच करें

सुबह का स्वागत मुस्कराते हुए करें। योग के कुछ आसान आसन करें ताकि शरीर सही अनुपात में रहे। आरंभ में दो या तीन बार करें, बाद में समय बढ़ा सकती हैं।

  1. सीधी खड़ी रहकर, सामने देखें, प्रार्थना की अवस्था में हथेलियां मिलाकर रखें। दोनों पैरों का संतुलन बराबर हो, किसी एक पर ज्यादा दबाव न पड़े। शरीर के किसी भी हिस्से पर तनाव न हो। कुछ लंबी और गहरी सांसें लें। 
  2. गहरी सांस अंदर भरते हुए हाथ ऊपर छत की ओर ले जाएं। हाथ ऊपर किए हुए ही पीछे की ओर झुकाएं। इस आसन को करने में ताकत का प्रयोग न करें। सुविधानुसार आराम से करें। 
  3. वापस सीधी हो जाएं। जब सांस बाहर छोड़ रही हों तो नितंब के सहारे हाथ सीधे रखते हुए स्वयं को झुकाएं। 
  4. अपने हाथों से जमीन छुएं, पैरों को बिलकुल सीधा रखें। यदि यह संभव न हो तो एड़ी पकड़ें और पैरों को पीछे की तरफ (पिंडलियों) से सीधा तानें। 
  5. गहरी सांस लें और बायां घुटना मोड़ें, इसी समय दायां पैर तानें हाथ जमीन पर छुआते हुए छत की ओर देखें। 
  6. सांस बाहर छोड़ें। बायां पैर जमीन पर लाएं, यह आप अपने हाथों और पैरों की सहायता से कर रही हैं और आपका शरीर सीधी लंबी रेखा के समान है। 
  7. सांस लें, अपने घुटने और छाती को जमीन पर धीरे से छोड़ें। अपने नितंब जमीन से उठाकर रखें। 
  8. जब आप सांस लें, तो शरीर का उठा भाग (नितंब) जमीन पर छोड़ें और सांप के आकार में लेटें। शरीर के अधोभाग को दोनों हाथों के बल पर ऊपर की तरफ तानें, पीठ इतनी ऊपर जाए कि आप छत देख सकें। 


गुरुवार, सुगंधित स्नान

कुछ तेलों और खुशबुओं का सेवन हमें राहत देता है। इसका चयन आपकी पसंद पर निर्भर करता है। चंदन, गुलाब, मोगरा आदि कुछ अच्छी खुशबूएं हैं। हफ्ते में एक दिन गुनगुने पानी में आठ-दस बूंदे एसेंशियल ऑयल डालकर नहाएं, हलका संगीत सुनें। इससे आप मानसिक तौर पर आराम महसूस करेंगी। एसेंशियल ऑयल मानसिक तनाव को कम करने में बहुत मदद करते हैं।

 

शुक्रवार, जरूरी काम निबटाएं

हफ्ते में एक दिन वह सारे काम करने की योजना बनाएं जो कई दिनों से अधूरे पड़े थे। ताकि सप्ताहंत में आपको अधिक परिश्रम न करना पड़े। जरूरी काम पहले निबटाएं। चाहें तो काम की एक लिस्ट बना लें और उसी के मुताबिक एक-एक काम निबटाती चलें।

 

घर को सजाएं

शाम को घर की सजावट करें। इस दौरान हलका संगीत सनें ताकि बिलकुल रिलैक्स मूड में आप सजावट कर सकें। रात को जल्दी सो जाएं इससे दूसरे दिन आप स्वयं को तरोताजा महसूस कर सकेंगी।

 

अच्छे स्वास्थ्य के लिए भोजन  

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में समय की कमी का बहाना कई बार हमें जीवन की अनिवार्यताओं से दूर कर देता है। कई बार दुबले दिखने की चाह में हम भोजन से परहेज करने लगते हैं। डाइटीशियन रश्मि भाटिया का कहना है कि भोजन में पौष्टिकता नहीं हो तो वह शरीर को फायदे के स्थान पर नुकसान पहंुचाता है। आप जानिए


भोजन से जुड़े कुछ सिद्धांत

  1. यदि लंबी आरामदायक नींद की चाहत है तो रात का खाना जल्दी और हलका खाएं। 
  2. भोजन खूब चबाकर खाएं। एकाग्रचित्त होकर भोजन करें, टीवी देखते हुए या पढ़ते हुए नहीं। 
  3. आवश्यकता से अधिक भोजन न करें। 
  4. बाहर के खाने से बचें। प्रोसेस्ड भोजन में केमिकल, चीनी और फैट नुकसानदेह होते हैं जबकि घर का बना भोजन ताजा और पौष्टिक होता है। 
  5. तले और मसालेदार भोजन के स्थान पर फल, ताजी हरी सब्जियां, उबली और बेक की हुई चीजें खाएं। 
  6. तेल-घी से बने पदार्थ स्टार्च वाली सब्जियां, आलू, अरबी, ज्यादा चीनी, ज्यादा प्रोटीन से अपने को बचाएं। 
  7. सफेद ब्रेड, सफेद चावल के स्थान पर ब्राउन ब्रेड और ब्राउन चावल का प्रयोग करें। 
  8. मोनोसेचुरेटेड फैट्स (ऑलिव ऑयल, रेप्सीड, नट्स से बने) और पॉली अनसेचुरेटेड फैट्स (नट्स, सीड्स, हरी सब्जियों, सी फूड्स से बने पदार्थ) को प्रमुखता देनी चाहिए न कि सेचुरेटेड फैट्स को। इस बात का ध्यान रखें कि सभी तरह के फैट्स में कैलोरी की अधिकता है जो वजन बढ़ाने का कारण हो सकती है। 
  9. मौसम के अनुसार भोजन करें। मौसमी खाद्य पद्धार्थो में पौष्टिकता और स्वाद अधिक होता है। वे टॉक्सिक केमिकल से मुक्त होते हैं, जो तनाव, याददाश्त कम होने का कारण होते हैं।

 

अंकुरित दालों, फलों और सब्जियों के सलाद, टोंड दूध, दही और पनीर से हमें पौष्टिकता मिलती है।  दिल्ली के गुरु तेग बहादुर अस्पताल की डाइटीशियन जववीर कौर का कहना है कि अच्छे स्वास्थ्य के लिए पौष्टिक खाने के साथ मेडिटेशन और कसरत भी जरूरी है। हंसना एक बहुत अच्छी कसरत है इससे हमारा इम्यून सिस्टम मजबूत होता है।

 

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