सूनी गोद में भी गूंजेगी किलकारी

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Feb 04, 2013
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संतान की इच्छुक महिला पति के साथ शारीरिक संपर्क के बावजूद यदि लंबे समय तक गर्भधारण नहीं कर पाती तो घबराने की जरूरत नही क्‍योंकि अब सूनी गोद में भी किलकारी गूंजने की उम्‍मीद बढ़ गई है।

suni goud me bhi gunjegi kilkariभारतीय मूल की डॉक्‍टर गीता नारगुड की टीम को मिल सफलता से सूनी गोद में भी किलकारी गूंजने की उम्‍मीद बढ़ गई है। सेंट जॉर्ज हॉस्पिटल के वैज्ञानिकों को पहली बार एमिनियोटिक सैक अर्थात गर्भस्‍थ शिशु के चारों ओर मौजूद पदार्थ की कोशिकाओं से अंडाणु विकसित करने में सफलता हासिल की है।

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डॉक्‍टर गीता ने कहा कि इससे भविष्‍य के लिए अनंत संभावनाओं के रास्‍ते खुलेंगे। खासतौर पर उन महिलाओं के लिए जिनके अंडाणु प्रजनन के लायक नहीं हैं। प्रमुख शोधकर्ता और ह्याइफा स्थित ऑफ टेक्‍नीयॉन इजराइल इंस्‍टीट्यूट ऑफ टेक्‍नोलॉजी के प्रोफेसर एलियेजर शेलेव ने कहा कि डॉक्‍टर लंबे समय से अंडाणु दान का विकल्‍प तलाश रहे थे। इस खोज से उम्‍मीद की जा सकती है कि जल्‍द ही जरूरत के अनुसार अंडाणुओं का उत्‍पादन किया जा सकेगा।

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उन्‍होंने बताया, एमिनियोटिक कोशिकाएं भ्रूण की शुरुआती कोशिकाएं होती हैं। इनसे ही बाद में अन्‍य प्रकार की कोशिकाओं का निर्माण होता है। शेलेव ने  कहा, एमिनियोटिक सैक से वि‍कसित अंडाणु अविकसित अवस्‍था में हैं। इसे विकसित करने के लिए हार्मोन थेरेपी का इस्‍तेमाल किया जा रहा है। शोध को जर्नल रिप्रोडक्टिव बायोलॉजी एंड इंडोक्राइलोलॉजी के हालिया अंक में छापा गया है। हालांकि कई विशेषज्ञों ने इस शोध को नैतिकता के खिलाफ बताया है।

 

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