सॉफ्ट ड्रिंक से बढ़ता है डिप्रेशन

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jan 10, 2013
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अवसाद यानी डिप्रेशन आज की जीवनशैली की देन कही जाती है। हाल ही में वैज्ञानिकों ने इसके नए कारण तलाशे हैं। अमेरिकी शोधकर्ताओं ने ढाई लाख से ज्‍यादा लोगों पर अध्‍ययन करने के बाद कोल्‍ड ड्रिंक के सेवन से अवसाद बढ़ने का दावा किया है।

अमेरिकी अध्‍ययन में कहा गया है कि एक दिन में सॉफ्ट ड्रिंक के चार कैन पीने वालों में यह खतरा तीस फीसदी तक बढ़ जाता है।

बाजार में विभिन्‍न कंपनियों के कई तरह के शीतल पेय मौजूद हैं। और बीते कुछ सालों से इनकी खपत में भी इजाफा हो रहा है। हालांकि समय-समय पर सेहत को इनकी वजह से होने वाले नुकसानों के बारे में भी रिपोर्ट आती रहती हैं।

हाल ही में अमेरिकी शोधकर्ताओं ने शीतल पेय के स्‍वास्‍थ्‍य पर पड़ने वाले नए दुष्‍प्रभावों के बारे में जानकारी दी है। शोधकर्ताओं ने 50 से 71 साल की उम्र वाले 2 लाख 65 हजार पुरुष व महिलाओं पर अध्‍ययन करने के बाद अवसाद और कोल्‍ड ड्रिंक के संबंधों के बारे में यह नतीजा निकाला है। दस साल के अध्‍ययन के दौरान उनके द्वारा पिए जाने वाले पेय पदार्थों के सेवन पर  निगाह रखी गयी। साथ ही इस बात पर भी निगाह रखी गयी कि उनमें से कोई अवसाद का शिकार हुआ या नहीं।

शोधकर्ताओं ने पाया कि जो लोग एक दिन में चार कैन से ज्‍यादा सॉफ्ट ड्रिंक पीते रहे उनमं अवसाद का खतरा उन लोगों की तुलना में तीस फीसदी तक अधिक रहा जो सॉफ्ट ड्रिंक का सेवन नहीं करते थे। शोधकर्ताओं के मुताबिक इसके पीछे यह कारण यह है कि इस प्रकार के शीतल पेय में कृत्रिम स्‍वीटनर एसपार्टम का प्रयोग किया जाता है, जो सेहत के लिए नुकसानदेह साबित होते हैं।

अमेरिकन एकेडमी ऑफ न्‍यूरोलॉजी के सदस्‍य और शोधकर्ता होंगलेई चेन के मुताबिक सॉफ्ट ड्रिंक से शरीर में कौन सी जैविक क्रियाएं होती हैं जिनके चिलते अवसाद पनपता है, इस बार में अभी पूरी जानकारी नहीं है लेकिन इस संबंध में लगातार ही पुख्‍ता संकेत मिल हरे हैं कि कृत्रिम स्‍वीटनर स्‍वास्‍थ्‍य को कई प्रकार से नुकसान पहुंचाते हैं।

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