सामाजिक तनाव डिस्ऑर्डर क्या है, इसके कारण व इलाज को जानें

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Oct 01, 2013
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Quick Bites

  • समाजिक चिंता विकार को शर्माने का नाम नहीं दिया जा सकता है।
  • कुछ खास परिस्थितियों में लोग इस समस्या से ग्रस्त हो जाते हैं।
  • हृदय की धड़कन बढ़ना, सांस में कमी होना इसके लक्षणों में से एक है।
  • इस समस्या से बचने के लिए साइकोथेरेपी या दवाओं की मदद ली जाती है।

सामाजिक चिंता विकार को सोशल फोबिया के नाम से भी जाना जाता है। यह एक प्रकार का डर है जो लोगों से बात करते समय लगता है खासकर तब जब आप उन लोगों को नहीं जानते हैं। यह आपके जीवन को काफी हद तक प्रभावित कर सकता है। कई बार लोग किसी खास परिस्थिति में नर्वस व डरा हुआ सा महसूस करने लगते हैं खासकर जब वे स्पीच देते हैं या जॉब के लिए इंटरव्यू देने जाते हैं।   

Dipressed Manसामाजिक चिंता विकार को शर्माने का नाम नहीं दिया जा सकता है, यह इससे कहीं ज्यादा होता है। जो लोग इस समस्या से ग्रस्त होते हैं वे अकसर यह सोचते रहते हैं कि लोग उनके बारे में क्या सोचते होंगे। जिसके परिणामस्वरुप उन लोगों को सामाजिक परिस्थितियों में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है जिसका असर उनके जीवन पर पड़ता है।


आप किसी अगर आप किसी सामाजिक परिस्थितियों में नर्वस हो जाते हैं इसका मतलब यह नहीं कि आप सामाजिक चिंता विकार या सोशल फोबिया से ग्रस्त हैं। कई लोगों थोड़े शर्माने वाली प्रवृ्ति के होते हैं जिसकी वजह से वे अपनी रोजमर्रा के जीवन में कुछ अलग दिखायी देते हैं। समाजिक चिंता विकार लोगों सामान्य जीवन को भी प्रभावित करता है और तनाव का कारण बनता है।


सामाजिक चिंता विकार के भावनात्मक लक्षण

  • प्रतिदिन किसी भी सामाजिक परिस्थिति का सामना करते समय बहुत अधिक चिंता व व्याकुलता का होना।
  • किसी भी खास सामाजिक स्थिति आने के काफी दिन पहले, हफ्ते या महीनों पहले से चिंता होना।
  • किसी अन्य लोगों के द्वारा खुद को देखने व जज करने पर डर का समाना करना खासकर तब जब वो कोई अनजान व्यक्ति हो।
  • डर के कारण खुद को शर्मिंदा व अपमानित करना।

 

सामाजिक चिंता विकार के शारीरिक लक्षण

  • चेहरे का लाल हो जाना।
  • सांस में कमी ।
  • पेट में समस्या होना
  • आवाज में कंपन होना
  • धड़कनों का तेज होना।
  • अत्यधिक पसीना आना।
  • चक्कर आना या बेहोश हो जाना।


सामाजिक चिंता विकार के व्यवहारिक लक्षण

  • उन सामाजिक स्थितियों से बचना जहां आप खुद को सहज महसूस नहीं करते हैं।
  • उस जगह को छोड़ देना या छिप जाना जिससे आपको कोई नोटिस ना कर सके।
  • जहां भी जा रहें हैं हमेशा किसी साथी को साथ लेकर जाना।
  • ऐसी स्थितियों से पहले ड्रिंक करना जिससे आपकी तंत्रिकाएं ठीक रहें।


कारण

सोशल फोबिया परिवार के अंदर से ही आता है, लेकिन कोई नहीं जानता कि यह समस्या कुछ लोगों के साथ ही क्यों होती है। शोधों के मुताबिक दिमाग के कई हिस्से डर व चिंता के कारणों में शामिल होते हैं। दिमाग में होने वाले डर व चिंता के बारे में ज्यादा अध्ययन के बाद वैज्ञानिकों इस समस्या का इलाज ढूंढ सकते हैं। शोधकर्ताओं के मुताबिक तनाव व वातावरण संबंधी तत्व इसके कारण हो सकते हैं।


इलाज

सोशल फोबिया को साइकोथेरेपी व चिकित्सा दोनों के जरिए ठीक किया जा सकता है।

साइकोथेरेपी- साइकोथेरेपी के प्रकार को कॉग्नेटिव बिहेवियर थेरेपी के नाम से जाना जाता है खासकर तब जब इसका प्रयोग सोशल फोबिया के इलाज के प्रयोग के लिए किया जाता है। इसमें व्यक्ति को सोचने, व्यवहार करने व भावनाएं प्रकट करने के अलग ढंग सिखाए जाते हैं। इस थेरेपी के जरिए व्यक्ति अपने डर व चिंता पर काबू पा सकता है। साथ ही यह लोगों में सामाजिक ज्ञान को भी बढा़ता है।

दवाएं - व्यक्ति की जांच के बाद डॉक्टर उन्हें चिक्तिसीय सलाह देते हैं। सोशल फोबिया के इलाज के लिए दवाएं सामान्य इलाज हैं जो व्यक्ति को चिंता व डर को दूर करने में मदद करता है। इस तरह की दवाएं रोगी के दिमाग को शांत कर चिंता व डर से निजात दिलाती है। इन दवाओं के सेवन से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें और याद रखें इन दवाओं को लंबे समय तक नहीं लेना चाहिए।

 

 

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