लीवर की बीमारी का कारण बन सकता है स्लिप डिस्ऑर्डर

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Aug 09, 2016
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व्यस्त होती लाइफ और ऑफिस वर्क ने लोगों को सबसे ज्यादा स्लीप डिसऑर्डर से पीड़ित किया है। जिसके कारण लिवर डैमेज होने की संभावना भी बढ़ गई है। हाल ही में भारतीय मूल के शिखा सुंदरम ने एक शोध किया है जिसमें निष्कर्ष निकला है कि प्रतिरोधी स्लीप एपनिया (ओएसए) और रात में कम आक्सीजन कम लेने वाले वयस्कों में गैर-अल्कोहल वाले वसा अम्ल (एनएएफएलडी) के कारण लीवर से जुड़ी बीमारियां होती हैं।  

यह शोध पत्रिका ‘हिपेटोलॉजी’ में प्रकाशित की गई है जिसके अनुसार, प्रतिरोधक स्लीप एपनिया और रात में कम ऑक्सीजन लेने के कारण शरीर में  एनएएफएलडी का स्राव बढ़ जाता है। इससे शराब ना पीने वाले स्टियोहिपेटिटिस (एनएएसएच) एक प्रकार का वसा जिगर का रोग, जिसमें जिगर में वसा संचय हो जाने पर संक्रमित हो जाता है।



ऐसे व्यक्ति जो शराब कम पीते हैं या नहीं पीते हैं, उनकी जिगर कोशिकाओं में अतिरिक्त वसा के संचय की वजह से गैर-अल्कोहल वाली वसा की बीमारियां होने की संभावना अधिक होती है। भले ही अलग तरह के यकृत स्टिीटोसिस को एनएएफएलडी से कम खतरनाक माना जाता है लेकिन एनएएसएच वाले मरीज आगे चल कर हिपेटोसेलुलर कार्सिनोमा मतलब गंभीर तरह के फाइब्रोसिस और सिरोसिस का शिकार होते हैं।

इस शोध में 36 एनएएफएलडी से ग्रस्त किशोरों को शामिल किया गया जिसमें 14 लोग पतले रहे। इन किशोरों में ऑक्सीकरण तनाव को समझने के लिए प्रतिरोधक स्लीप एपनिया शुरू कराया गया और कम आक्सीजन की मात्रा दी गई, जिससे बाल चिकित्सा के एनएएफएलडी को समझा जा सके।

सुदंरम ने कहा, “ये आकड़े दिखाते हैं कि निद्रा में श्वसन में विकृति से ऑक्सीकरण तनाव में इजाफा होता, जिससे बाल एनएएफएलडी से एनएएसएच की तरफ बढ़ता है। हम देखते हैं कि मोटापे वाले लोगों में एनएएफएलडी के साथ कम ऑक्सीजन की वजह से जिगर वाले ऊत्तकों पर निशान दिखने लगते हैं।”

 

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