कहीं ये ओब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर के लक्षण तो नहीं!

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jul 28, 2014
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Quick Bites

  • ओब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर एक प्रकार का गंभीर मानसिक रोग है।
  • इसमें पीड़ित व्यक्ति के दिमाग में बार-बार अनचाहे ख्याल आते हैं।
  • ऐसे लोगों का किसी अन्य इंसान को नुकसान पहुंचने का डर रहता है।
  • दवाइयों, बिहेवियर थैरेपी तथा फैमिली सपोर्ट से होता है इसका इलाज।

कुछ लोगों को किसी काम की सनक लग जाती है। जरा-जरा सी बात उन्‍हें परेशान करने लगती है। हमेशा कुछ संशय बने रहते हैं। वे सोचते रहते हैं कि घर से निकते वक्त दरवाजा ठीक से बंद किया या नहीं?, लाइट और पंखे के स्विच बंद किए या नहीं? आदि अक्सर हममे से कई लोगों को होती हैं। ठीक इसी तरह ज्यादा रुपये गिनते समय हम कई बार गिनते हैं, ताकि रकम की गिनती में कोई गलती न हो जाए। अगर कोई गंदी चीज हमसे छू जाए तो हम अच्छी तरह उस हिस्से को साबुन से धोते हैं... और फिर सब कुछ पहले की तरह सामान्य हो जाता है।

 

लेकिन कुछ लोग इतने के बाद भी सामान्य नहीं हो पाते। वे बार-बार इन प्रक्रियाओं को दोहराते हैं और इस तरह  की शंकाएं उन्हें बार-बार और लंबे समय तक परेशान करती रहती हैं। इस तरह बार-बार विचारों या क्रियाओं की पुनरावृत्ति से वे विचलित हो जाते हैं। और इस बेचैनी और परेशानी के चलते वे अपने रोजमर्रा के कार्यों पर एकाग्र नहीं हो पाते और उनका सामान्य जीवन अव्यवस्थित हो जाता है। दूसरे शब्दों में कहें तो उन्हें इस तरह के काम की लत पड़ जाती है। इस विचलित मनोदशा को ऑब्सेसिव कम्पलसिव डिसऑर्डर या ओसीडी कहा जाता है। जो कि एक गंभीर मानसिक रोग है।

 

Obsessive Compulsive Disorder in Hindi

 

ओसीडी से पीड़ित व्यक्ति के दिमाग में बार-बार अनचाहे खयाल आते हैं। वह एक ही काम को बार-बार कर सकता है। मसलन, हाथ धोना, चीजों को गिनना, किसी चीज को बार-बार चेक करना आदि। रोगी के मन में किसी बात को लेकर डर, शक या असमंजस का भाव रहता है। समस्या तो यह कि इससे पीड़ित ज्यादातर लोग यह मानने को राजी नहीं होते कि उन्हें ऐसी कोई समस्या है। हालांकि अगर वे वास्तविकता को स्वीकार कर लें, तो इलाज काफी आसान हो सकता है। इसके लक्षणों को सही समय पर पहचानना भी इलाज में काफी सहायक हो सकता है।

ओब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर के लक्षण

 

  • ऐसा कोई अनचाहा आवेश या भीतरी प्रेरणा जो बिना खुद की इच्छा के दिमाग से शुरू होती है और व्यक्ति खुद ही इसे व्यर्थ मसझता है।
  • बार-बार सफार्इ करना और गंदगी से डरना। ओसीडी के कारण पीड़ित में आमतौर पर सफार्इ और बार-बार हाथ धोने का कंपल्शन होता है।
  • शंकालु और पाप से डरने वाले लोग सोचते हैं कि यदि सब कुछ ठीक ढंग से नहीं हुआ तो कुछ बुरा हो जाएगा या वे सजा के भागी बन जाएंगे।
  • गिनती करने वाले और चीजों को व्यवस्थित करने की जॉब वाले लोग इस समस्या के होने पर ऑब्सेस्ड रहते हैं। उनमें से कुछ निश्चित संख्याओं, रंगों और अरेंजमेंट को लेकर अंधविश्वास हो सकता है।
  • कीटाणुओं और गंदगी आदि के संपर्क में आने या दूसरों को दूषित कर देने का डर रहता है।
  • डर से जुड़ी चीजों को को महसूस करना जैसे, घर में कोई बाहरी व्यक्ति घुस आया है।
  • ऐसे लोगों को किसी और को नुकसान पहुंचने का डर भी रहता है।
  • धर्म या नैतिक विचारों पर पागलपन की हद तक ध्यान देना।
  • किसी चीज को भाग्यशाली या दुर्भाग्यशाली मानने का अंधविश्वास।
  • चीजों को बेवजह बार-बार जांचना, जैसे कि ताले, उपकरण और स्विच आदि।
  • बेकार की चीजें इकट्ठा करना जैसे कि पुराने न्यूजपेपर, खाने के खाली डिब्बे, टूटी हुई चीजें आदि।

 

Obsessive Compulsive Disorder in Hindi

 

होर्डिंग व दूसरे डिसॉर्डर में होती है चीजें बचाकर रखने की सनक

जर्नल ऑफ सायकाट्रिक रिसर्च के मुताबिक ऐसी चीजों को जमा करना या संभालकर रखना, जो खास जरूरत की न हों या बेकार हों, ओसीडी के मरीजों में देखा जाने वाला एक आम लक्षण है। खासकर बीमारी के गंभीर होने के पहले की स्टेज में। होर्डिंग लक्षणों वाले मरीजों में दूसरी बीमारियां होने की आशंका भी अधिक होती है, जैसे कि डिप्रेशन, पीटीएसडी (एक खास तरह का फोबिया), अटेंशन डेफिसिट हाइपर एक्टिव डिसॉर्डर (ADHD), टिक्स डिसॉर्डर या बेवजह की खरीदारी का डिसॉर्डर।

यह भी हो सकता है लक्षण

लड़कियों का पीछा करना और उन्हें तरह-तरह से तंग करना कई बार लोगों के ओब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर को उजागर करता है। मनोचिकित्सकों का मानना है कि कई बार लोग ओब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर के शिकार होने के कारण इस तरह की हरकत करते हैं और इन्हें अपनी अस्वीकृति गवारा नहीं होती। ऐसी स्थिति में ये खतरनाक भी साबित हो सकते हैं।

ये शर्म की बात नहीं क्योंकि डार्विन को भी था ओसीडी!

देखिये ये काई छुपाने वाली या शर्म की बात नहीं है। कई बड़े बुद्धीजीवियों को भी इस समस्या से दो-चार होना पड़ा है। आंकड़ों पर गौर करें  तो लगभग 50 में से एक व्यक्ति को अपने जीवनकाल में ओसीडी हो सकता है। पुरुषों और महिलाओं में इसका अनुपात लगभग समान है। यूके में लगभग 10 लाख लोग ओसीडी से पीड़ित हैं। जीव वैज्ञानिक चाल्र्स डार्विन, फ्लोरेंस नाइटिंगेल, पिल्ग्रिम प्रोग्रेस के लेखक जॉन बनियन आदि ओसीडी ग्रसित हस्तियों में से हैं। लेकिन यदि आपका बार-बार दोहराने वाला व्यवहार आनंद देने वाला है तो यह ओसीडी नहीं होता जैसे, जुआ खेलने की आदत, शराब पीना या ड्रग्स आदि लेना आदि ओसीडी नहीं होते हैं।

क्या हैं उपचार

ऐसी दवाइयां मौजूद हैं जो दिमाग की कोशिकाओं में सेरोटोनिन की मात्रा बढ़ाती हैं। डॉक्टर कई बार इलाज के लिए इन दवाओं को लेने की सलाह देते हैं, जिन्हें लंबे समय तक लेना होता है। कभी-कभी चिंताओं औक तनाव को दूर करने वाली दवाएं भी इनके साथ दी जाती हैं। इसके साथ बिहेवियर थैरेपी की मदद भी ली जाती है। जिसके अंतर्गत रोगी को शांत रहने वाले व्यायाम सिखाए जाते हैं। बिहेवियर थैरेपी के तहत उसे इन विचारों से मुक्त होने के लिए कुछ तकनीकें भी सिखाई जाती हैं। हालांकि गंदगी संबंधी विचारों के मामले में इलाज के तौर पर रोगी को कुछ समय तक गंदगी में रखा जाता है और उससे कहा जाता है कि वह ज्यादा से ज्यादा समय तक हाथ धोने से बचे। जिस तह वह धीरे-धीरे इन विचारों से मुक्ति पाना सीख जाता है।



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