हृदय रोग के ये इशारे बच सकते हैं डॉक्‍टर की नजर से

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Mar 07, 2014
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Quick Bites

  • अनियमित जीवनशैली और खानपान है दिल की बीमारियों की बड़ी वजह।
  • कई बार सामान्‍य जांच से नहीं लग पाता बीमारियों का समय रहते पता।
  • विशेष जांच से अन्‍य रोगों और दिल की बीमारियों के संबंध का पता चलता है।
  • अच्‍छी सेहत के लिए समय-समय पर अपनी स्‍वास्‍थ्‍य जांच करवाते रहना चाहिए।

सेहत के प्रति सजग लोग निय‍मित रूप से अपना रक्‍तचाप, दिल की धड़कन, ब्‍लड शुगर और यहां तक कि विटामिन डी की भी जांच करवाते हैं। इसके साथ ही आपका डॉक्‍टर कुछ अन्‍य जांच भी करता है ताकि सेहत के प्रति होने वाले किसी संभावित खतरे से बचा जा सके। इन जांचों के परिणाम सकारात्‍मक आने का अर्थ यह लगाया जाता है कि हमें दिल की बीमारियां होने का खतरा नहीं है। लेकिन, ऐसा नहीं है। इनके अलावा भी कई ऐसे जोखिम कारक हैं, जो हमारे दिल को बीमार कर सकते हैं। और आमतौर पर सामान्‍य जांच में इनके बारे में पता नहीं चलता और लोग यहां तक कि डॉक्‍टर भी इन्‍हें मिस कर जाते हैं।

यहां हम कुछ ऐसी जांच के बारे में बात करेंगे जो इनसुलिन प्रतिरोधकता, मेटाबॉलिक सिंड्रोम और भविष्‍य में होने हृदय रोग होने के बारे में समय रहते जानकारी दे सकती हैं।

फास्टिंग इनसुलिन स्‍तर

आमतौर पर हम वर्ष में एक बार ब्‍लड शुगर की जांच करवाते हैं। इससे हमें डायबिटीज होने के संभावित खतरे के बारे में पता चलता है। यदि हमारा फास्टिंग इनसुलिन स्‍तर यानी बिना कुछ खाये सुबह के समय की गई ब्‍लड शुगर की जांच का स्‍तर 80 से अधिक होता है तो इसका अर्थ यह है कि हमें डायबिटीज होने का खतरा हो सकता है।

 

heart doctor

हाई सेंसिटिविटी प्रोटीन

हाई सेंसिटिविटी सीआरपी टेस्‍ट इसलिए किया जाता है, ताकि इस बात की जांच की जा सके कि कहीं आपको हृदयाघात का खतरा तो नहीं। सूजन के कारण धमनियां क्षतिग्रस्‍त हो सकती हैं और इससे हृदयाघात होने का खतरा और बढ़ जाता है। हालांकि सीआरपी और हृदयाघात के संबंधों को अभी पूरी तरह समझा जाना बाकी है।

मैग्‍नीशियम का स्‍तर

शरीर में मैग्‍नीशियम के स्‍तर की जांच के लिए लाल रक्‍त कोशिकाओं में मैग्‍नीशियम की स्‍तर की जांच  सबसे अच्‍छा तरीका है। मैग्‍नीशियम की कमी के सामान्‍य लक्षणों में थकान, कमजोरी, मांसपेशियों में अकड़न, हाथ-पैर सुन्‍न होना और उनमें झुनझुनी होना। मूड और नींद को लेकर समस्‍यायें होना और साथ ही दिल की धड़कनों को अनियमित होना भी शामिल है। इतना ही नहीं यह स्‍तर अगर अधिक कम हो जाए, तो धमनियों में अकड़न हो सकती है, जिससे हृदयाघात का खतरा काफी बढ़ जाता है। मैग्‍नीशियम सप्‍लीमेंट हार्ट अटैक के खतरे को कम कर सकते हैं। तो जरूरी है कि आप इसके स्‍तर की जांच करवाते रहें।

होमोसाइस्‍टेइन स्‍तर

होमोसाइस्‍टेइन एक टॉक्सिक एमीनो एसिड होता है जो दिल की बीमारियों और स्‍ट्रोक के खतरे को बढ़ा देता है। इसके स्‍तर में बढ़ोत्‍तरी गुड कोलेस्‍ट्रॉल के स्‍तर को कम कर देती है। यह ऑक्‍सीकरण को बढ़ाती है, जिससे धमनियों में प्‍लार्क जमने का खतरा बढ़ जाता है। यह एसिड मीट के अधिक सेवन से बनता है। इसके स्‍तर में बढ़ोत्‍तरी को विटामिन बी6 और विटामिन बी12 की कमी से भी जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, यह बात भी सामने आयी है कि होमोसाइस्‍टे‍इन के स्‍तर में कमी करने और विटामिन का स्‍त्‍र बढ़ाने से हृदय रोग का खतरा कम नहीं होता।


फेरिटिन स्‍तर

फेरिटिन लिवर में पाया जाने वाला प्रोटीन है, जिसमें 20 फीसदी आयरन होता है। फेरिटिन सूजन की निशानी भी हो सकता है। इसके स्‍तर में थोड़ी सी बढ़ोत्‍तरी भी डायबिटीज के खतरे को दो से तीन गुना तक बढ़ा देती है। इसका सामान्‍य स्‍तर पुरुषों में 12-150 एनजी/एमएल और पुरुषों में 12-300 एनजी/एमएल होता है। शोध में साबित हो चुका है कि फेरिटिन के स्‍तर में बढ़ोत्‍तरी कार्डियोवस्‍कुलर डिजीज के खतरे को बढ़ा देती है। इसके स्‍तर में कमी करके दिल की बीमारियों और हृदयाघात अथवा स्‍ट्रोक के खतरे को कम किया जा सकता है। हालांकि इसका स्‍तर 50 एनजी/एमएल से कम नहीं होना चाहिए।


heart attack

टेस्टोस्टेरोन स्तर

इसकी जांच केवल पुरुषों में की जाती है। महिलाओं में हृदय रोग के साथ इसका कोई संबंध नहीं पाया गया है। पुरुषों में टेस्‍टोस्‍टेरोन में अनि‍यमितता का कार्डियोवस्‍कुलर डिजीज के साथ गहरा संबंध होता है। अधिक उम्र के पुरुषों में कार्डियोवस्‍कुलर बीमारियां होने का अंदेशा अधिक होता है। अगर आपका कुल और फ्री टेस्‍टोस्‍टेरोन स्‍तर कम है तो इसके बारे में अपने डॉक्‍टर से बात करें। इसके पीछे के संभावित कारणों को जानने का प्रयास करें। टेस्‍टोस्‍टोरोन को निकलवाना एकमात्र विकल्‍प नहीं है।

पुरुषों के लिए जरूरी है कि वे अपने टेस्‍टोस्‍टेरोन का स्‍तर 350-600एनजी/डीए के बीच रखें। इसका स्‍तर अधिक होने पर थैरेपी के जरिये इलाज किया जा सकता है, लेकिन कम होना हमेशा खतरनाक होता है।

गंभीर संक्रमणों की जांच

रोग और संक्रमण उत्‍पन्‍न करने वाले कई जीवाणुओं का संबंध हृदय रोग से पाया गया है। इतना ही नहीं इनके कारण हृदयाघात भी हो सकता है। हरपस सिम्‍प्‍लैक्‍स वायरस, कायटोमेगालोवायरस और एच. पायलोरी वायरस कुछ ऐसे ही वायरस हैं जो गंभीर संक्रमण के साथ-साथ दिल को भी बीमार कर सकते हैं। आप अपने डॉक्‍टर से एंटीबॉडीज की जांच के लिए कह सकते हैं, ताकि समय रहते आपके दिल को किसी गंभीर खतरे से बचाया जा सके।

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