शॉक थेरेपी से मिलेगी प्‍लांटर फेसाइटिस से राहत

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jan 08, 2014
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Quick Bites

  • एड़ी में दर्द है प्‍प्‍लांटर फेसाइटिस का सबसे बड़ा लक्षण।
  • कई बार चलने में भी हो जाती है बेहद मुश्किल।
  • शॉक थेरेपी से जरिये बिना सर्जरी के मिलती है राहत।
  • सर्जरी की अपेक्षा अधिक सुरक्षित है शॉक थेरेपी।

हम पूरे दिन जिन पैरों पर चलते हैं उन्हीं पैरों का सबसे कम खयाल रखते हैं। जर्मनी के वैज्ञानिकों ने कहा है कि शाक थेरेपी से एड़ी की गांठ (प्लांटर फेसाइटिस) से निजात पाया जा सकता है।

shock therapy for feetप्‍लांटर फेसाइटिस यानी एड़ी की गांठ एक सामान्‍य समस्‍या है, जिसमें एड़ी की हड्डी के नीचे दर्द होता है। यह बीमारी सख्‍त और मजबूत फिब्रोस टिश्‍यू में जलन के कारण होती है। यह टिशू पैरों के आर्क में आर्क में स्थित होता है। प्‍लांटर फेसाइटिस के मरीज अधिक देर तक पैदल चलने अथवा खड़े रहने से दर्द की शिकायत करते हैं। इस रोग के अधिकतर मरीजों को आसान से उपायों से ठीक किया जा सकता है। इसमें दवायें, बर्फ लगाना, जूतों में बदलाव और स्‍ट्रेचिंग व्‍यायाम आदि शामिल हैं। कुछ मरीजों को लक्षणों में आराम नहीं मिलता। ऐसे मरीजों को अधिक उच्‍च इलाज की आवश्‍यकता होती है।

जब इस रोग पर सामान्‍य तरीके काम नहीं करते, तो प्‍लांटर फेसाइटिस के मरीजों को सर्जरी का सहारा लेना पड़ सकता है। लेकिन, इसके साथ भी एक समस्‍या है। नियमित सर्जरी करवाते रहने के कई साइड इफेक्‍ट्स भी हैं।

 

ईएसडब्‍ल्‍यूटी

एक्‍सट्राकॉर्पोरियल शॉक वेव थेरेपी यानी ईएसडब्‍ल्‍यूटी (ESWT), इस दिशा में एक कारगर उपाय के रूप में सामने आया है। ऐसे मरजी जिनका प्‍लांटर फेसाइटिस गंभीर रूप धारण कर चुका हो, उनके लिए ईएसडब्‍ल्‍यूटी काफी मददगार साबित हुआ है। इसमें मरीज के शरीर में शॉक तरंगें भेजी जाती हैं। ये तरंगे उच्‍च और निम्‍न दोनों प्रकार की क्षमता की होती है। और इनका इस्‍तेमाल प्‍लांटर फेसाइटिस के इलाज के किया जाता है।

 

लो और हाई एनर्जी शॉक वेव ट्रीटमेंट

लो एनर्जी शॉक वेव ट्रीटमेंट में मरीज को तीन अथवा अधिक बार शॉक दिया जाता है। इन तरंगों से नाममात्र का दर्द होता है। वहीं दूसरी ओर उच्‍च एनर्जी शॉक वेव ट्रीटमेंट में एक ही बार उच्‍च तरंगें प्रवाहित की जाती हैं। यह काफी दर्दनाक हो सकता है। इसके लिए मरीज को किसी प्रकार का एनी‍स्‍थिया भी दिया जाता है, ताकि वह इस दर्द को सहन कर सके।


यह थेरेपी उस कोशिका पर लघु आघात (माइक्रोट्रोमा) पहुंचाती है, जो प्‍लांटर फेसाइटिस के कारण प्रभावित हुई होती है। यह लघु आघात कोशिका निर्माण में सहायता करता है, इससे प्रभावित हिस्‍से में पोषक तत्‍व पहुंचने लगते हैं। यह लघु आघात आपके ठीक होने की गति को बढ़ा देता है।

क्‍या हैं लाभ

यह सर्जरी का सबसे अच्‍छा विकल्‍प है। इसके जरिये हड्डियों के डॉक्‍टरों को ऐसे मरीजों के लिए शक्तिशाली और उपयोगी पद्धति मिल गयी है, जिन पर इलाज के परंपरागत तरीके कारगर साबित नहीं होते। पहले जब परंपरागत तरीके काम नहीं करते थे, तो सर्जरी ही एकमात्र विकल्‍प बचती थी। हालांकि, कई लोग सर्जरी कराने से बचना चाहते हैं। इसके साथ ही सर्जरी कराने का सबसे बड़ा नुकसान यह है कि इसके कई विपरीत असर भी देखे जाते हैं। सर्जरी कराने के बाद भी नियमित दर्द, जख्‍म और संक्रमण की परेशानी देखी जाती है। हालांकि ईएसडब्‍ल्‍यूटी के साथ भी यह परेशानी देखी जाती है कि सभी मरीजों के लक्षण पूरी तरह दूर नहीं होते।

नुकसान

इसका सबसे बड़ा नुकसान इसकी कीमत है। एक अनुमान के अनुसार इसे कराने में काफी खर्चा आता है। इसके अलावा इसे भी पूरी तरह कारगर नहीं माना जाता। एक अनुमान के अनुसार यह थेरेपी लेने वाले चालीस फीसदी लोगों को ही पूरा लाभ मिलने की बात सामने आयी है। यानी बाकी लोगों के दर्द में पूरी तरह से राहत नहीं मिलती। यानी इसमें अभी सुधार की गुंजाइश की उम्‍मीद की जा सकती है।

प्‍लांटर फेसाइटिस से कैसे बचें

प्‍लांटर फेसाइटिस से बचने के लिए व्‍यक्ति को अपना वजन काबू रखें। इसके साथ ही किसी भी खेल गति‍विधि में शामिल होने से पहले थोड़ा वॉर्म-अप जरूर कर लें। इसके साथ ही ऐसे जूते पहनें तो पैरों के ऑर्क को सपोर्अ करें। जूतों की एड़ी आरामदेह होनी चाहिए। ऐसे लोग जिन्‍हें प्‍लांटर फेसाइटिस होने का खतरा ज्‍यादा हो, उन्‍हें एड़ी पर स्‍ट्रेच डालने वाले व्‍यायाम करने चाहिए। एथलीट गतिविधि के बाद आपको अपने पैरों पर बर्फ से सिंकाई करनी चाहिए। यह भी संभव है कि डायबिटीज को काबू में रखकर आप प्‍लांटर फेसाइटिस को दूर रख सकते हैं, हालांकि अभी तक इन दोनों के बीच कोई संबंध सामने नहीं आया है।

क्‍या कहते हैं शोध

कील स्थित जर्मन वैज्ञानिकों ने गांठों के दर्द से निजात दिलाने के लिए सुरक्षित शाक थेरेपी खोजी है। प्रमुख शोधकर्ता डा. लूजर गरडेसमेयर के मुताबिक यह शाक वेव थेरेपी प्लांटर फेसाइटिस के कारण होने वाले दर्द को दूर कर सामान्य रूप से रहने में मददगार साबित होगी। प्रयोगों में प्लांटर फेसाइटिस के 245 मरीजों को शामिल किया गया। तीन महीने तक चले इलाज में दर्द में काफी हद तक कमी के अलावा इसकी सफलता की दर 61 फीसदी पाई गई। हालांकि शोधकर्ताओं ने इस बारे में और अध्ययन किए जाने की बात कही है।

एंड़ी अथवा पैर में दर्द होने पर बिना देर किये डॉक्‍टर से संपर्क करें, खासतौर पर जब आपको चलने में भी मुश्किल आ रही हो।  आमतौर पर मरीजों में थोड़ा या बहुत सुधार जरूर आता है। एक अनुमान के अनुसार करीब 90 फीसदी लोगों की हालत छह से आठ हफ्तों में पहले से बेहतर जरूर होती है।

 

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