इस तेल से स्किन पर मसाज करें और बेदाग त्वचा पाएं

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jul 03, 2017
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Quick Bites

नियमित मसाज से शरीर स्वस्थ और निरोग रहता है।
यह स्पा और दूसरी थेरेपी से कहीं अधिक कारगर है।
सुबह के वक्त मसाज करना अधिक फायदेमंद होता है।

मसाज करने से शरीर स्वस्थ रहता है और बीमारियां नहीं होती हैं। दुनिया की सबसे प्राचीन चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद में मसाज का बहुत अधिक महत्‍व है। आयुर्वेद में इसे ‘अभ्यांग’ कहा गया है, जिसका अर्थ है – अभि यानी रगड़ना और अंग यानी शरीर के अंग। वर्तमान में मसाज के कई प्रकार हो गये हैं जो लोगों के बीच बहुत प्रचलित भी हैं – स्पा और थेरेपी भी इसी का एक हिस्सा है। जिसके लिए लोग बहुत पैसे भी खर्च करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं स्पा या दूसरी थैरेपी से कहीं अधिक कारगर खुद से मसाज करना है। बस इसे आपको अपनी दिनचर्या में शामिल करना है, फिर देखिये किस तरह आपकी त्वचा पर उम्र का असर बेअसर हो जायेगा और बीमारियां आपसे कोसो दूर रहेंगी। इसके बारे में यहां विस्तार से जानते हैं।

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खुद से मसाज के फायदे

जब भी हमें चोट लगती है या फिर मांसपेशियों में खिंचाव होता है हम उस अंग को तेल से मालिश करते हैं और जल्द ही फायदा भी मिल जाता है। अगर इस क्रिया को रोज किया जाये तो कितना फायदा मिलेगा, क्या आपने इसके बारे में सोचा है। अगर नहीं तो आज से ही मसाज करना शुरू कर दीजिए, क्योंकि मसाज से शरीर के अंग मजबूत होते हैं, मांसपेशियां लचीली होती हैं जिससे चोट लगने की संभावना कम होती है। और सबसे खास बात यह त्वचा पर उम्र के असर को बेअसर कर देती है। इसके अलावा रोज गरम तेल से मालिश करने से त्वचा संबंधी रोग भी नहीं होते हैं। यह जोड़ों की समस्या और जोड़ों पर होने वाले हड्डी संबंधित बीमारियों को दूर करता है। इससे रक्त संचार बेहतर तरीके से होता है जिससे दिल मजबूत रहता है। पाचन क्रिया भी सुचारु होती है, और आप स्वस्थ रहते हैं।

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किस तेल का प्रयोग करें

इस तरह के तेल का चुनाव करें जो आपके शरीर के अनुरूप हो और आपके शरीर के के दोषों को दूर करे। आयुर्वेद के अनुसार शरीर के तीन प्रमुख प्रकार होते हैं – वात, पित्त और कफ। प्राचीन आयुर्वेद पद्धति में सबसे अधिक हर्बल ऑयल (जैसे – टी ट्री ऑयल, कोकोनट ऑयल आदि) का प्रयोग होता रहा है। लेकिन बीजों (जैसे – सरसों, अलसी आदि का तेल) से निकलने वाला तेल भी फायदेमंद होता है। चूंकि त्वचा के रोमछिद्र तेल को सोखते हैं इसलिए बीजों और नट्स से निकलने वाला तेल अधिक फायदेमंद माना जाता है। यदि आपको इससे एलर्जी है तो इसका प्रयोग न करें।

यहां कुछ सुझाव हैं

वात के लिए – तिल का तेल या बादाम का तेल
पित्त के लिए – नारियल तेल या सूरजमुखी का तेल
कफ के लिए – सूरजमुखी या कुसुम का तेल प्रयोग करें

मसाज को कैसे रोजमर्रा में करें शामिल

इसका फायदा तभी होगा जब इसे आप अपनी दिनचर्या बनायेंगे। इसके लिए अधिक समय भी नहीं लगता, मात्र 15-20 मिनट में आप पूरे शरीर की मसाज खुद से कर सकते हैं। सुबह के वक्त मसाज करने से अधिक फायदा मिलता है। पहले दिन केवल 5 मिनट से शुरूआत करें, धीरे-धीरे 15 से 20 मिनट तक करें। अगर आप रोज व्यायाम करते हैं तो इसे सुबह व्यायाम से ठीक पहले करें। त्वचा की समस्यायें जैसे – रैशेज, एग्जिमा, आदि होने पर तेल से मसाज न करें। त्वचा पर सूजन हो तो भी गरम तेल से मसाज न करें। बुखार हो तो भी मसाज से परहेज करें।

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कैसे मसाज करें

मसाज शांत और खुले वातावरण में ही करें। तेल बहुत अधिक गरम न हो, हल्का गरम हो। शुरूआत पैरों के तलवों से करें। फिर धीरे-धीरे शरीर के ऊपरी हिस्से पर जायें। फिर अपनी पीठ, गले, सीने और पेट के हिस्से पर मसाज करें। अंत में सिर और माथे पर मसाज करें। तेल को नाक और कान के अंदर डालें। आराम से और धीरे-धीरे पूरे शरीर की मसाज करें। इसके बाद व्यायाम और गर्म पानी से स्नान करें। फिर देखिये कैसे आपके दिन की खुशनुमा शुरूआत होती है।

मौसम बदलने के साथ शरीर की स्थितियों में भी बदलाव हो सकता है। ऐसे में अगर मौसम बदलने के दौरान किसी भी तेल से आपको समस्या होने लगे तो उसका प्रयोग करना बंद कर दें और किसी विशेषज्ञ से सलाह जरूर करें।

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