सेहत बिगाड़ सकती हैं नींद की गोलियां

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Aug 14, 2012
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sehat bigad sakti hain neend ki goliyaan

नींद न आना आम बीमारी बन चुकी है। और नींद की गोली खाना इस बीमारी का आम इलाज। लेकिन, नींद की गोलियों पर आपकी निर्भरता दरअसल आपकी सेहत बिगाड़ सकती है। निद्रा विशेषज्ञों की मानें तो नींद न आने पर नींद की गोलियां खाना सही मायनों में कोई इलाज नहीं है। नींद की गोलियां फायदेमंद नहीं होतीं।

 

नींद की गोलियां खाने के बाद भी पलकें भारी नहीं होतीं। नींद की गोली खाने के बाद भी उन्‍हें नींद नहीं आती। गोलियों से उन्‍हें कुछ समय के लिए तो आराम मिलता है, लेकिन धीरे-धीरे उनकी इस पर निर्भरता बढ़ने लगती है। ऑस्ट्रेलिया के फ्लिंडर्स विश्वविद्यालय में मनोविज्ञान विभाग से सम्बद्ध प्रोफेसर लियोन ने यह थ्‍योरी पेश की है।

उनका कहना है कि नींद की गोलियां थोड़े समय के लिए आराम पहुंचाती हैं लेकिन जब इसे लेना बंद कर देते हैं, तो रातें तकलीफ में बितानी पड़ती हैं और ऐसा भी लगता है कि बिना दवाई के नींद नहीं आएगी।

उनके अनुसार यह क्रेडिट कार्ड पर कुछ नींद खरीदने जैसा है, जिसकी कीमत मोटे ब्याज के रूप में चुकानी पड़ती है। ऐसे में भविष्य में यह आपके लिए मददगार नहीं होतीं।

उन्होंने कहा, "लोगों को यह समझने की आवश्‍यकता हैं कि नींद एक लम्बी अवचेतन अवस्था नहीं है। हम नींद के अलग-अलग चरण से गुजरते हैं। पहला गहरी नींद का चरण जो 80 से 90 मिनट के बाद हल्की नींद में, कभी स्वप्न देखने वाले चरण में तब्दील होता है और हम रातभर तीन या चार चरणों से गुजरते हैं।"

लैक, अनियमित जीवनशैली को अनिद्रा का कारण मानते हैं उनके अनुसार लेटने के बाद अगर 15 मिनट तक नींद न आए तो उठ जाना चाहिए नही तो कमरा डिप्रेशन से भर जाता है।

 

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