'विज्ञान' ला रहा है रिश्तों में दरार, खत्म हो रहे हैं रिश्ते!

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jun 06, 2017
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  • 'विज्ञान' ला रहा है रिश्तों में दरार।
  • खत्म हो रहे हैं रिश्ते।
  • आधुनिक रिश्तों का सच।

आज के बढ़ते विज्ञान और तकनीकी भरे समय का जितना लोगों का फायदा हो रहा है उतना ही नुकसान भी हो रहा है। तकनीक का फायदा यह भी है कि जहां पहले किसी से बात करने के लिए खत और तार का सहारा ले कर घंटों इंतजार करना पड़ता था, वो अब आसान हो गया है। लेकिन इस तकनीक ने रिश्तों को खराब कर दिया है। आजकल लोगों को ही पता नहीं है कि वह किस तरह खुद को अपडेट रखने की आड़ में धोखा दे रहे हैं। खुद को अपडेट रखने, सोशल मीडिया पर अपना स्टेटस देखने और तस्वीरें शेयर करने के नाम पर युवाओं से लेकर बड़े तक मोबाइल के जाल में इस कद्र फंस चुके हैं कि रिश्तों में दरार आने लगी है। आइए जानते हैं ​कैसे रिश्तों को खराब कर रहा है विज्ञान।

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आज निजी जिंदगी में किसी के पास इतना वक्त नहीं है कि वह अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से मिल सके। ऐसे में सोशल मीडिया आज के दौर की जरूरत भी हो गया है। लेकिन सोशल साइट्स पर एक्टिव रहने वाले लोगों के कई दोस्त हैं, जिनसे बात करते हुए हम घंटों बिता देते हैं। यह बात करना अब एक आदत और जरूरत बन गई है। जिसके चंगुल से निकल पाना बहुत मुश्किल हो गया है।

बेडरूम में फोन


बेडरूम का मतलब होता है कि एक ऐसी जगह जहां सिर्फ आप और आपका पार्टनर रहें। ना तो किसी तीसरे आदमी की बात हो और ना ही बाहरी दुनिया कि किसी तरह की टेंशन। लेकिन आजकल ऐसा नहीं है। आजकल लोग फोन के बिना खुद को अधूरा महसूस समझ रहे हैं और हर जगह फोन के साथ जाते हैं। ​पति—पत्नी के रिश्ते में दरार आने का यह एक बहुत बड़ा कारण है। आजकल ना सिर्फ पुरुष बल्कि महिलाएं भी बेडरूम में फोन से चिपकी रहती हैं। ऐसे में जब आपके पार्टनर को यह पसंद नहीं आता या वह इन्सिक्योर फील करता है तो रिश्तों में दरार आना लाजमी है। इसलिए कोशिश करें कि फोन को बेडरूम से बाहर ही रखें।

पढ़ाई के नाम पर फोन


फोन में इंटरनेट डलवा कर पढ़ाई की आड़ में सोशल मीडिया से चिपके रहने वाले बच्चों की कमी नहीं है। आजकल बच्चे पढ़ाई कम और फोन में ज्यादा रुचि लेते हैं। जब रात को स्टडी रूप में ऐसा होता है और अचानक पेरेंट्स आ जाते हैं तो नोकझोंक होना लाजमी है। जबकि आजकल के बच्चे चाहते हैं कि कोई उन्हें ​परेशान ना करें। ऐसे में बच्चों और पेरेंट्स के रिश्ते तो खराब हो ही रहे हैं साथ ही पढ़ाई का नुकसान भी हो रहा है।

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