सांस से हो सकेगी आंत के कैंसर की पहचान

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Dec 13, 2012
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sans se ho sakegi aant ke cancer ki pehchan

शुरुआती दौर में कैंसर का पता बहुत मुश्किल से चल पाता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि उन्होंने कैंसर के परीक्षण का एक ऐसा तरीका खोज निकाला है जो कि आंत के कैंसर के बारे में काफी सही जानकारी दे सकता है।

 

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'ब्रीद टेस्ट' नामक ये परीक्षण सांस लेने के जरिए किया जाता है और फिर सांस को बाहर निकालने पर उसमें मौजूद रसायनों में ट्यूमर बनाने की क्षमता के आधार पर मरीज का परीक्षण किया जाता है। 'ब्रीद टेस्ट'तकनीक इस विचार पर आधारित है कि ट्यूमर्स की प्रकृति ऐसी होती है कि वे कुछ खास तरह के अस्थिर यौगिक का निर्माण करते हैं। ये यौगिक मरीज की सांस के साथ कुछ मात्रा में बाहर आ जाते हैं।  

दक्षिणी इटली के शहर बारी से आई डॉक्टरों की एक टीम ने आंत के कैंसर वाले 37 मरीजों की सांसों और 41 सामान्य लोगों की सांसों का तुलनात्मक अध्ययन किया। शुरुआती दौर में ये परीक्षण करीब 85 प्रतिशत तक सही पाए गए। यहां तक कि जब उसके बाद भी परीक्षण किया गया तब भी इनकी शुद्धता 76 प्रतिशत थी। शोधकर्ताओं के लिए ये परिणाम काफी उत्साहजनक थे।

 

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वैज्ञानिकों का कहना है कि ये परीक्षण उन मरीजों के लिए भी फायदेमंद हो सकता है जिनमें इलाज के बाद कैंसर दोबारा दिखने लगता है।

इस परीक्षण से जुड़े वैज्ञानिकों का कहना है कि व्यापक पैमाने पर इसके इस्तेमाल के लिए अभी और काम करने की जरूरत है।


ब्रिटिश जर्नल ऑफ सर्जरी ने इस परीक्षण को 76 प्रतिशत तक सही बताया है। वैज्ञानिक सांस लेने वाले परीक्षणों को दूसरी बीमारियों जैसे- टीबी, कैंसर और मधुमेह के लिए भी इस्तेमाल करने पर काम कर रहे हैं।

कैंसर की पहचान यदि आरंभिक अवस्था में हो जाती है और इसका सही इलाज हो सकता है जिससे ठीक होने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

 

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